विचार शक्ति इस विश्व कि सबसे बड़ी शक्ति है | उसी ने मनुष्य के द्वारा इस उबड़-खाबड़ दुनिया को चित्रशाला जैसी सुसज्जित और प्रयोगशाला जैसी सुनियोजित बनाया है | उत्थान-पतन की अधिष्ठात्री भी तो वही है | वस्तुस्तिथि को समझते हुऐ इन दिनों करने योग्य एक ही काम है " जन मानस का परिष्कार " | -युगऋषि वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पं. श्रीराम शर्मा आचार्य
सोमवार, 25 अप्रैल 2011
अखण्ड ज्योति मार्च 1942
10. नर तन का सदुपयोग
11. देने से मिलेगा
12. मिल कर चलो
16. प्रेम का भगवान
18. बड़ा आदमी
19. स्वर्ग और नरक
20. ईश्वर का भजन
21. सतयुग की कल्पना
22. तृष्णाएं छोड़ो
24. पिशाच से देवता
31. सत्य सन्देश
अखण्ड ज्योति जनवरी 1942
10. मथुरा का भविष्य
11. सतयुगी वीर
13. सतयुगी मित्र
18. अवतार का ठीक समय
19. इस्लाम और सतयुग
20. लोकवाणी
21. सत्य का प्रकाश
23. सतयुगी अदालत
24. क्रतयुगी-कल्पना
28. पृथ्वी के खम्भ
30. प्रसव की वेदना
31. अवतार कैसे होगा
33. बाइबिल और सतयुग
34. तप कीजिए
रविवार, 24 अप्रैल 2011
सक्सेस मंत्र - कलाम के पाँच सूत्र
1. जीवन में एक लक्ष्य बनाईए। उस लक्ष्य के मुताबिक ज्ञान अर्जित कीजिए। ज्ञान अर्जित करने के लिए किताबें पढि़ए, नामचीन लोगों से मुलाकात कर उनके अनुभव जानिए। मशहूर वैज्ञानिक, दार्शनिक, इतिहासकार, तकनीकी विशेषज्ञों की जीवनी पढि़ए। इससे आपको सफलता की प्रक्रिया के सूत्र मिलेंगे।
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2. समस्याओं को अपना कप्तान मत बनाइए। आप समस्या के कप्तान बनिए। समस्या आप पर हावी होगी, तो आप सफल नहीं हो पाएंगे। आप सफल केवल तब हो सकते हैं, जब आप समस्या पर हावी हो। इसलिए, मेहनत कीजिए और पूरे साहस के साथ हर समस्या का सामना कीजिए।
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3. आप एक दिन में बेस्ट नहीं बनते। यह एक प्रक्रिया हैं, जिसे कई पड़ावों से गुजरकर हासिल करना होता हैं। सबसे पहला पड़ाव हैं - अपना आदर्श तय करना, फिर उसके मुताबिक लक्ष्य तय कराना, उन लक्ष्यों पर अडिग रहना। उन्हें पूरा करने के के लिए हर जोखिम उठाना । जो इन सारे पड़ावों को पार करता हैं, वही बेस्ट का तमगा हासिल कर पाता हैं।
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4. तीन गुण अगर आप में हैं, तो आप आसानी से सफल हो सकते हैं। जानने की इच्छा, सोचने की क्षमता, ज्ञान हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करने की चाहत, ये तीन ऐसे सूत्र हैं, जिन्होने मुझे राष्ट्रपति भवन की राह दिखाई। ये आपको भी आपकी मंजिल तक पहुँचा सकते है।
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5. ईश्वर ने इंसान को जो दिमाग दिया हैं, यह सर्वोत्तम उपहार हैं इसका उपयोग कीजिए। याद रखिए, सोचना विकास की निशानी , न सोचना विनाश की निशानी।
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गुरुवार, 21 अप्रैल 2011
अखण्ड ज्योति दिसम्बर 1941
1. योग वीणा
3. बलमुपास्व
5. भागिए मत
13. सच्ची दौलत
14. गुरू नानक के वचन
16. मोह में दुःख
18. सन्तों के लक्षण
25. स्वर्णिम-पथ
26. पाठकों का पृष्ठ
अखण्ड ज्योति नवम्बर 1941
1. अपने पथिक से
4. आत्मबल
13. असभ्य की सभ्यता
17. कर्तव्य कर्म
21. प्रभु प्रेम
23. खुद भी मदद कीजिए
26. पतन का मार्ग
27. सदाचार का सोपान
30. असन्तो के स्वभाव
31. पाठकों का पृष्ठ
32. समालोचना
अखण्ड ज्योति अक्टूबर 1941
1. जाग्रति गान
2. दिवाली
6. दुःख का कारण
7. प्रार्थना
12. सद्व्यवहार
17. देवी सम्पत्ति
19. एक कदम नीचे
24. ध्येय की सिद्धि
25. भीरूता का अभिशाप
26. निराश मत करिए
अखण्ड ज्योति सितम्बर 1941
1. एक ज्योति
11. संतोषी सदा सुखी
13. सतयुग आ गया
16. भलमनसाहत व्यवहार
17. आत्मविश्वास
18. खोज में
20. स्वरोदय
22. शिखा के लाभ
24. थियोडर पार्कर
अखण्ड ज्योति अगस्त 1941
1. प्रभु से
7. गुप्त साधना
10. सत्संग
12. गृहस्थ योगी
14. थोथा ब्रह्मज्ञान
19. दंभ मत करो
20. कलियुग या सतयुग
25. स्वरोदय
26. अलिप्त कर्मकर्ता
27. उत्साह का जादू
28. गरीब की हाय
29. अपरोक्ष आवाहन
अखण्ड ज्योति जुलाई 1941
1. अमर ज्योति
3. आश्रम धर्म
8. ऐसा यज्ञ करो
10. शक्ति या सेवा
11. व्यर्थ की बकवात
12. अमर नारद
15. ओ मेघ ! वर्षो !
16. सफलता पर दुख
17. तपस्या और सत्संग
18. शक्ति का उपयोग
19. आत्म दंड
22. संगठन और लक्ष्मी
25. कहाँ बैठूं
26. पाठकों का पृष्ठ
अखण्ड ज्योति जून 1941
1. बबूला
5. प्रेम-मार्ग
15. प्रेम और मोह
16. शिखा के लाभ
17. मेरी झोली
18. ज्ञानी कौन हैं ?
22. जीन जेक रूसो
23. तुम क्या हो ?
25. पंडित कौन हैं ?
26. पाठकों के पत्र
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