बुधवार, 8 जून 2011

अखण्ड ज्योति सितम्बर 1976

1. सफलता आत्मविश्वासी को मिलती हैं

2. भाग्य का बीज पुरूषार्थ

3. आत्मा का अस्तित्व झुठलाया न जाय

4. यान्त्रिक जीवन में हमारी खो रही सम्वेदना

5. ब्रह्माण्ड में पदार्थ की तरह चेतन भी भरा पड़ा हैं

6. व्यावहारिक वेदान्त

7. धर्म एक परिष्कृत दृष्टिकोण

8. आत्मिक और भौतिक प्रगति का सन्तुलन

9. अतीन्द्रिय क्षमता और उसके उद्गम स्रोत

10. मनुष्य को कृमि-कीटकों से तो ऊँचा होना ही चाहिए

11. संकीर्ण स्वार्थपरता ही पतन का मूल कारण

12. क्या हम सचमुच ही मर जायेंगे ?

13. अहिंसा कितनी व्यावहारिक कितनी अव्यवहारिक

14. एक आँख दुलार की, एक आँख सुधार की

15. मन्त्र शक्ति और देवसत्ताओं का तारतम्य

16. उपवास-आरोग्य का संरक्षक

17. यथार्थता और एकता में पूर्वाग्रहों की प्रधान बाधा

18. खाद्यान्नों की दुर्गति बनाने वाली दुर्बुद्धि त्यागें

19. आत्म-हत्या पलायन ही नहीं प्रतिशोध भी

20. अपनो से अपनी बात

अखण्ड ज्योति अगस्त 1976

1. मार्ग दर्शक की सत्ता उसकी महत्ता

2. त्राहि माम्-त्राहि माम्

3. मानवी अन्तराल में प्रसुप्त दिव्य क्षमता

4. जीवात्मा, महात्मा, देवात्मा ओर परमात्मा

5. चेतना अन्तःक्षेत्र में भी विकसित हो

6. भाग्य रेखायें

7. व्यक्तित्व को अलंकृत करने वाली व्यवस्था बुद्धि

8. देवासुर संग्राम हमारे दैनिक जीवन में

9. नष्टोः कान्या गति

10. वासना के ताप में विगलित व्यक्तित्व

11. आत्म-घाती उच्छ्रंखलता नहीं ही अपनाये

12. बुद्धिमान मनुष्य की मूर्खतापूर्ण प्रगति

13. सामूहिक आत्महत्या की तैयारी

14. समाज व्यवस्था का आर्ष दृष्टिकोण

15. भेद और अभेद

16. कष्ट-कठिनाइयाँ अच्छे लोगों के लिए क्यों ?

17. वाक् कौशल व्यवहार कुशलता का प्राथमिक चरण

18. भोजन तो ठीक प्रकार से करें

19. उपवास-शरीर शोधन की महत्वपूर्ण प्रक्रिया

20. हास्य एक टानिक, एक चिकित्सा

21. कुकल्पनाओं के नरक से हम स्वयं ही उबरें

22. अपनी भूलों को समझे और उन्हें सुधारे

23. तत्परता युक्त मनोयोग सफलता का मूल स्त्रोत

24. अपनो से अपनी बात

25. अगले वर्ष के महिला सम्मेलनों का इसी वर्ष निर्धारण

26. उस आत्मा का सौभाग्य अटल

अखण्ड ज्योति जुलाई 1976

1. अन्तःकरण की पुकार अनसुनी न करें

2. सुख और सन्तोष का अन्तर

3. ईश्वर का मनुहार बनाम आत्मपरिष्कार

4. स्वस्तिक सार्वभौम संस्कृति का प्रतीक चिन्ह

5. आत्मा और परमात्मा का अस्तित्व ज्ञान संगत भी और विज्ञान संगत भी

6. प्रगति भौतिक ही नहीं आत्मिक भी होनी चाहिए

7. चेतना की प्रगति का महत्व समझा जाय

8. चमत्कारी सिद्धियाँ न उपयोगी हैं न आवश्यक

9. कर्म में मनोयोग का समन्वय आवश्यक

10. स्वास्थ्य रक्षा प्रकृति के अनुसरण से ही सम्भव हैं

11. सात लोक-सात शरीर

12. खाद्य मोर्चे पर हम सब मिलकर लड़े

13. साधना सिद्धि का मूल आधार श्रद्धा

14. प्रगति तो हुई पर किस दिशा में ?

15. विश्व उपवन में हमारा जीवन पुष्प् सा महकें

16. सभ्यता की उपेक्षा करना, अपने पैरो पर कुल्हाड़ी मारना

17. आशा जगाये, प्रशंसा करे और प्रोत्साहन दें

18. मांसाहार मानवता के प्रति अपराध

19. शाकाहारी भोजन ही पूर्ण हैं

20. अपनी हथौड़ी से अपने दांत न तोड़े

21. समृद्धि ऐसे चरण चेरी बन गई

22. अनियंत्रित प्रजनन-सर्वनाश का आह्वान

23. अपनो से अपनी बात

24. ‘‘एकाकी-साधना’’

अखण्ड ज्योति जून 1976

1. धर्म चेतना का अधिक विस्तृत प्रयोग

2. सम्पत्ति ही नहीं सदाशयता भी

3. कठिनाइयों से डरे नहीं, उन्हें खिलोना भर समझे

4. धर्म के बिना हमारा काम नहीं चलेगा

5. प्रगति तो हुई पर किस दिशा में

6. निकट भविष्य में यह परिस्थितियाँ सामने आयेगी

7. मानवी प्रगति में अपना नगण्य किन्तु महत्वपूर्ण योगदान

8. श्री को इतना महत्व किसलिए ?

9. चन्द्र मान्यताएँ कितनी वास्तविक कितनी अवास्तविक

10. वातावरण प्रदूषण का क्या कोई समाधान हैं ?

11. ‘मैं’ के जानने में ही ज्ञान की पूर्णता हैं

12. हम अहंकारी नहीं स्वाभिमानी बनें

13. लापरवाही राई जैसी, हानि पहाड़ जैसी

14. काश हम ध्वंस छोड़कर सृजन में लग सकें

15. महत्वाकांक्षाओं की उद्विग्नता अवांछनीय और अहितकर

16. वेदान्त पलायनवादी दर्शन नहीं हैं

17. योग का वामाचारी प्रयोग रोका जाय

18. नेकी कर और दरिया में डाल

19. सूर्य सेवन हमारे लिए परम उपयोगी

20. दुर्बुद्धि महान् उपलब्धियों को भी विभीषिका बना देगी

21. दूध पीना है तो गाय का ही पियें

22. हम अपना उत्तरदायित्व समझे और उन्हें निभायें

23. प्रसन्नता स्वयं सिद्ध उपलब्धि

24. सुसन्तति प्राप्ति के उपहासास्पद प्रयत्न

25. नीतिपूर्वक कमायें, विवेकपूर्वक खायें

26. अपनो से अपनी बात-नवनिर्माण की प्रयासों में तीव्रता आवश्यक

27. कविता-पात्रता का अभाव

अखण्ड ज्योति मई 1976

1. मरण-मात्र विश्राम-मात्र परिवर्तन

2. अध्यात्म सिद्धान्त न तो अनावश्यक हैं और न अप्रमाणिक

3. अन्तरंग प्रकाश का बहिरंग प्रभाव

4. पूर्व मान्यताओं के प्रति दुराग्रह उचित नहीं

5. प्रत्यक्ष से भी विचित्र अदृश्य संसार

6. सूक्ष्म चेतना को परिष्कृति किया जाय और सब नियन्त्रित रखा जाय

7. भ्रम जंजाल में उलझे हुए हम सब

8. मन्त्र में शक्ति कहाँ से और कैसे आती हैं ?

9. इन सपनों को फ्राइडवाद क्या कहेगा ?

10. कर्तव्य पालन-मानवी गरिमा की कसौटी

11. विष प्रयोग कीटकों को नहीं हमें मारेगा

12. आत्मविकास के लिए भक्तियोग की साधना

13. आधुनिक सभ्यता का अभिशाप समय से पूर्व बुढ़ापा

14. छिपे खजाने क्या हमारे हाथ लग सकते हैं ?

15. महत्वाकांक्षा बनाम महानतानुराग

16. मनुष्य तो मच्छर से भी हार गया

17. परिस्थिति पर नहीं, मनःस्थिति पर उत्कर्ष सम्भव

18. शरीरगत स्वस्थता मानसिक सन्तुलन पर निर्भर हैं

19. गायत्री उपासना की क्रिया-प्रक्रिया

20. अपनो से अपनी बात

21. जिन्दगी जीना कला हैं

अखण्ड ज्योति अप्रेल 1976

1. जीवात्मा परमात्म सत्ता का प्रतिनिधि

2. आत्म-निर्भर बनें, अपने आप उठें

3. मन्त्र विद्या का स्वरूप और उपयोग

4. जीवन संग्राम में जूझें और विजय प्राप्त करें

5. स्थूल में ही न उलझे रहें, सूक्ष्म की शक्ति भी समझे

6. तप द्वारा प्राण शक्ति का अभिवर्द्धन

7. ईश्वर भक्ति और सेवा साधना की एक रूपता

8. प्रज्ञा की देवी गायत्री और उसकी विभूतियाँ

9. कलि का निवास

10. प्रसन्न रहें-प्रसन्न रखें

11. गायत्री से बढ़कर और कुछ नहीं

12. दिव्य प्रकाश का उन्नयन, साधना का उद्देश्य

13. जीभ को चटोरी बनाकर हम अपनी हानि ही करते हैं

14. गायत्री उपासना बनाम द्विजत्व-ब्राह्मणत्व

15. लक्ष्य वेध का रहस्य

16. प्रगति पथ पर अपने ही पैरों चलना पड़ेगा

17. निर्बलता का पाप और प्रकृति का दण्ड

18. महत्वाकांक्षा कुंठित तो नहीं हैं

19. अपनो से अपनी बात

20. पाँच दिवसीय परामर्श सत्रों के लिए आमन्त्रण

अखण्ड ज्योति मार्च 1976

1. आत्मा की परमात्मा से पुकार

2. संकल्प के साथ शक्ति भी आवश्यक

3. शब्द शक्ति का परिष्कृत उपयोग मन्त्र साधना में

4. भावना, आनन्द और प्रावीण्य

5. गायत्री गान से सबका सब प्रकार कल्याण

6. साहस के बल पर मनुष्य बढ़ता और जीतता हैं

7. मनुष्य की प्राण ऊर्जा और उसका अभिवर्द्धन

8. सर्वतोमुखी समर्थता की अधिष्ठात्री गायत्री महाशक्ति

9. हँसता-हँसाता जीवन क्यों न जीया जाय

10. अवांछनीयता की जड़े काटनी पड़ेगी

11. हमारा मस्तिष्क दिव्य शक्तियों का भण्डार

12. अपने भाग्य भविष्य का निर्माण हम स्वयं ही करते हैं

13. औषधियों की गुलामी स्वीकार न करें

14. शक्ति का अजस्र स्त्रोत-आत्मविश्वास

15. गायत्री के 24 अक्षरों में सन्निहित दिव्य शक्तियाँ

16. विचार मात्र कल्पना नहीं शक्ति के पुंज हैं

17. योग के प्रति विश्व आकर्षण और हमारा उत्तरदायित्व

18. कुण्डलिनी महाशक्ति एक दिव्य ऊर्जा

19. अपनो से अपनी बात

20. अगले दिनों कुछ अति महत्वपूर्ण सत्र

21. अन्न को औषधि मानकर सेवन करे


22. सच्चा प्यार

अखण्ड ज्योति फरवरी 1976

1. साधना से सिद्धि की प्राप्ति

2. इस अंक की पाठ्य सामग्री और उसका प्रयोजन

आत्मज्ञान सर्ग-

3. आत्मज्ञान सबसे बड़ी उपलब्धि

4. उत्थान-पतन की कुंजियाँ अपने हाथों में

5. सादगी आत्मिक प्रगति का प्रमुख आधार

6. समय सम्पदा का उपयुक्त विभाजन

ब्रह्मज्ञान सर्ग-

7. आस्तिकता का स्वरूप और आधार

8. उपासना की आवश्यकता और प्रतिक्रिया

9. ईश्वर प्रदत्त सम्पत्तियाँ और उनका सदुपयोग

तत्वज्ञान सर्ग-

10. विकृत दृष्टिकोण ही नरक और परिष्कृत चिन्तन ही स्वर्ग है

11. राग-द्वेष रहित सुसंतुलित स्नेह-सद्भाव

12. महत्वाकांक्षाओं की मोड़-जीवन का कायाकल्प

सद्ज्ञान सर्ग-

13. कर्मयोग की सर्वसुलभ साधना

14. सफलता के लिए प्रखर कर्म और उसके लिए संकल्प बल चाहिए

15. अध्यात्म बनाम परमार्थ

नवरात्रि तपश्चर्या सर्ग-

16. नवरात्रि पर्व और गायत्री की विशेष तप साधना

17. नवरात्रि अनुष्ठान का विधि विधान

साधन अनुदान और प्रशिक्षण सर्ग-

18. अपनो से अपनी बात

19. शान्ति कुन्ज के शिक्षण सत्रों की नई व्यवस्था

अखण्ड ज्योति जनवरी 1976

1. आत्म-साधना-मानव संस्कृति का उच्चतम शिखर

2. जीवन का सबसे बड़ा पुरूषार्थ और संसार का सबसे बड़ा लाभ

3. साधना का विज्ञान और स्वरूप

4. साधना-अपने आप को साधना

5. जीवात्मा के तीन शरीर और उनकी साधना

6. मूर्छा से जाग्रति-आत्मिक प्रगति

7. साधना के विभिन्न स्तर एवं पक्ष

8. योग-साधना से चरम लक्ष्य की पूर्ति

9. चित्त-वृत्ति निरोध का साधन अभ्यास

10. तप साधना अतीव लाभदायक प्रक्रिया

11. तप द्वारा दिव्य शक्तियों का जागरण

12. प्रतीक उपासना की आवश्यकता और उपयोगिता

13. देवपूजन से पूर्व आत्म शुद्धि

14. आत्मशोधन के षट्कर्म

15. जप द्वारा चेतना का उच्चस्तरीय शिक्षण

16. शब्द की प्रचण्ड शक्ति और मन्त्र साधना

17. जप से परिपेषण शक्ति का उद्भव और उपयोग

18. आत्म-जागरण के लिए ध्यान योग की आवश्यकता

19. ध्यान योग से एकाग्रता की दिव्य शक्ति का उद्भव

20. प्राण योग-प्रचण्ड ऊर्जा का उत्पादन

21. उच्च स्तरीय प्राण योग सोऽम् साधना

22. अपनो से अपनी बात

23. आत्मबोध चिन्तन-तत्वबोध मनन

24. ज्ञातव्य-स्पष्टीकरण और समाधान

अखण्ड ज्योति दिसम्बर 1975

1. आत्मीयता का विस्तार

2. जड़ता का नाम मर्यादा नहीं

3. भार से लद न जायें, हलके फुलके रहे

4. सही और सफल प्रार्थना की स्थिति

5. हमारी रक्त सम्पदा जिसका मूल्यांकन कभी किया ही नहीं

6. प्रगति और परिवर्तन परस्पर अविभाज्य हैं

7. ईश्वर विश्वास की प्रतिक्रिया-सर्वतोमुखी सुख शान्ति

8. सफलता साहसी के चरण चूमती हैं

9. सहकारिता विकसित करें, संघ-शक्ति संजोये

10. आत्महीनता की ग्रन्थि में अपने को जकडि़ये मत

11. प्रामाणिकता की प्रभावोत्पादक शक्ति

12. वातावरण का मनुष्य पर प्रभाव

13. सूर्य शक्ति बनाम सूर्य पूजा

14. एकांगी चिन्तन की भावुक आतुरता अहितकर

15. हम माया मूढ होकर भ्रम जंजाल में भटक रहे हैं

16. हमारा ज्ञान बढ़ा हैं और साथ में संसार भी

17. हम न जाने सो रहे हैं या जग रहे हैं ?

18. खाद्य को अखाद्य बनाकर न खायें

19. यौवन आजीवन अक्षुण्ण रह सकता हैं

20. परिवार निर्माण में कथा प्रसंगो की भूमिका

21. परिवार निर्माण एक महत्वपूर्ण उपकरण

22. मित्रता और उसका निर्वाह

23. सत्यानाशी शराब से आत्मरक्षा करे

24. श्रमयोग की साधना

25. साहस हो तो साधन भी हो जाते हैं

26. अपनो से अपनी बात

27. उन चरणों को नमन् हमारा

अखण्ड ज्योति नवम्बर 1975


1. दुःख और सुख सहोदर सहचर

2. प्रकाश भरा आनन्द हमारी ही मुट्ठी में है

3. आस्तिकता मानवी प्रगति के लिए नितान्त आवश्यक

4. प्रायश्चित द्वारा पुनर्जीवन

5. विलक्षण क्षमताओं से सम्पन्न, हमारे कलपूर्जे

6. अपने ब्रह्माण्ड की जन्म और मरण

7. मानवी प्रगति का एकमात्र आधार-भाव भरा सहयोग

8. आनन्द प्राप्ति की दिशा और चेष्टा

9. विक्षुब्ध आत्मा और उसके उपद्रव

10. सुख ओर दुःख हमारी कल्पनाओं पर निर्भर हैं

11. नेत्रों की सुरक्षा इस प्रकार की जाय

12. शान्ति और प्रगति तरलता-सरलता पर निर्भर हैं

13. कल्पना नहीं तत्परता सफल होती हैं

14. आत्महीनता एक महान् व्याधि

15. विज्ञान और अध्यात्म साथ-साथ ही बढ़ेंगे

16. बीमारियों को हम निमन्त्रण देकर बुलाते हैं

17. आत्महत्या-मानसिक विकृति की दुःखद प्रतिक्रिया

18. टहलना एक अति उपयोगी और अति सरल व्यायाम

19. बढ़ती हुई हिंसा वृत्ति, उसका कारण ओर निवारण

20. परिवार संस्था का नवनिर्माण नारी जागरण से ही होगा

21. वधू को गृहलक्ष्मी बनाया जाय

22. सिगरेट जिसने मार्क वाटर्स को केन्सर के द्वार तक पहुँचाया

23. समय का पालन एक महत्वपूर्ण आदत

24. अपनो से अपनी बात



अखण्ड ज्योति अक्टूबर 1975

1. उदार जीवन यात्रा

2. विचारों की प्रचण्ड शक्ति और प्रतिक्रिया

3. जीवन क्या हैं ? एक अनबूझ पहेली

4. क्या स्वर्ग और अपवर्ग धरती पर ही थे ?

5. मानसिक विकृतियों का शरीर पर प्रभाव

6. सूक्ष्म की शक्ति को समझा जाय

7. हारमोन सूक्ष्म शक्तियों का केन्द्र

8. विज्ञान के साथ सद्ज्ञान के समन्वय की आवश्यकता

9. मानसिक अस्वस्थता की उपेक्षा न की जाय

10. स्नेह और सहयोग भरी पितर आत्मायें

11. दोषारोपण से घृणा-घृणा से युयुत्सा

12. बढ़ती हुई पैशाचिकता हमारा सर्वनाश करेगी

13. धरती और सूरज जराजीर्ण हो चुके, अब मरने ही वाले हैं

14. एक नई दुनिया अब हाथ लगने ही वाली हैं

15. प्रौढ़ शिक्षा का महत्व समझा जाय और उस पर जोर दिया जाय

16. न्याय की कमाई का दान-श्रेष्ठ दान

17. तरलता और सरलता का स्त्रोत सूखने न दे

18. अपने को पहचानें और विकसित करें

19. परिवर्तन और आदान-प्रदान सृष्टि के सुदृढ नियम

20. अपने हाथों अपना श्राद्ध-नेत्रदान

21. एकाग्रता के लिए ध्यान योग की साधना

22. गौ दुग्ध की उपयोगिता समझी जाय

23. मानवी व्यक्तित्व एवं चुम्बक

24. मधुर निद्रा में सबसे बड़ी बाधा-चिन्ता

25. अनिद्रा के अभिशाप का कारण और निवारण

26. अवांछनीय संग्रह का दुर्भाग्यपूर्ण अन्त

27. अपनो से अपनी बात

28. गायत्री विद्या के अमूल्य ग्रन्थ रत्न

अखण्ड ज्योति अगस्त 1975

1. कर्म का प्रतिफल अकाट्य हैं

2. ईश्वर का द्वार सबके लिए खुला हैं

3. आत्मा को कैसे जाने, परमात्मा को कैसे देंखे ?

4. आत्मा, मात्र मस्तिष्क नहीं

5. अदृश्य से दृश्य, दृश्य से अदृश्य

6. ब्रह्माण्डीय प्राण-चेतना का मिलन अब निकट ही हैं

7. प्राण शक्ति का स्वरूप अभिवर्द्धन

8. विज्ञान और अध्यात्म को साथ-साथ चलना होगा

9. हमारी दुर्दशा दुमुँहें सांप जैसी

10. मानसिक रोग-कितने विचित्र, कितने भयावह

11. विचार शक्ति-एक प्रत्यक्ष शक्ति ऊर्जा

12. सद्गुरू प्राप्त कर सकने का असाधारण सौभाग्य

13. आन्तरिक दरिद्रता से पीछा छुड़ायें

14. प्रशिक्षण हर प्राणी को बुद्धिमान बनाता हैं

15. अन्य लोकवासियों की धरती पर हलचलें

16. वृक्ष न रहेंगे तो मनुष्य भी न रहेगा

17. तूफान और बवंडर करने वाली उथल-पुथल

18. उदास न रहें, सरसता न खोयें

19. आकांक्षाएँ बनाम उपलब्धियाँ

20. कोलाहल के दुष्परिणाम से सतर्क रहे

21. अग्निहोत्र से मानसिक रोगों का निवारण

22. एन्टीब योटिक्स दवाओं के द्वारा होने वाला कत्ले आम

23. मांसाहार मनुष्य के लिए नितान्त अवांछनीय

24. इस असह्य स्थिति का अन्त होना ही चाहिए

25. हमारी अधूरी जानकारियाँ और मूढ़ मान्यतायें

26. क्या बन्दर सचमुच हार गया ?

27. आत्मिक प्रगति के पाँच सोपान पंचकोश

28. अपनो से अपनी बात

अखण्ड ज्योति जुलाई 1975

1. अपने को अधिकाधिक सुविस्तृत बनाते चले

2. शरीर का करूणार्द्र उपयोग

3. ब्रह्माण्ड एक चैतन्य शरीर

4. गहरे उतरें चमत्कारी अद्भुत का दर्शन करे

5. मानवी एकता के लिए प्रयत्नशील रहने में ही हमारा कल्याण हैं

6. पृथ्वी और सूर्य, आत्मा और परमात्मा आदर्श पति-पत्नी

7. आकृतियों और साधनों का रहस्य

8. व्यक्ति का समाज के प्रति दायित्व

9. दूरदर्शिता एवं परमार्थ परायणता की बुद्धिमानी

10. दुर्बल मनःस्थिति पर पड़ने वाले आघात और उनकी प्रतिक्रिया

11. जीवन साधना के तीन सूत्र

12. लम्बे समय तक जवान रहा जा सकता हैं

13. क्या अगली शताब्दी में हमें प्यासे मरना पड़ेगा

14. अस्त-व्यस्त और असम्बद्ध विचार करने की मानसिक बर्बादी

15. सूर्य-चन्द्र ग्रहण और उनमें सन्निहित तथ्य

16. अतीन्द्रिय शक्ति-विकास के प्राचीन और नवीन प्रयोग

17. सद्विचारों पर ही समुन्नत जीवन की सम्भावनायें आधारित हैं

18. प्रोटीन प्राप्ति के लिए मांसाहार आवश्यक नहीं

19. प्राण जाय पर वचन न जाई

20. नारी उत्कर्ष के लिए निवारक और विधेयक कार्यक्रमों की आवश्यकता

21. हृदय रोग एवं रक्तचाप का कारण और निवारण

22. अपनो से अपनी बात

अखण्ड ज्योति जून 1975

1. जीवन सम्पदा का सदुपयोग सीखा जाय

2. सिद्धिश्चः सोपानः

3. मनुष्य की चमत्कारी अतीन्द्रिय चेतना

4. परमाणु शक्ति से बढ़कर जीवाणु सत्ता

5. एकता की तीन सूत्र

6. हम उत्कृष्टता की ओर अनवरत गति से अग्रसर हो

7. मनुष्य-जीवन समुद्र से भी अधिक गहरा और विस्तृत

8. चिन्तन की विकृति-मनोरोगों का प्रधान कारण

9. अपनत्व का विस्तार-मानवता का गौरव

10. विकास की सोचें पर विनाश को न भूलें

11. छोटे कीड़े मकोड़ों की दुनिया हम से कम रोचक नहीं

12. उत्पादक संघर्ष नहीं सहयोग ही हैं

13. मनुष्य विवश हैं या समर्थ स्वतन्त्र

14. सविता देवता की शरण में जाये बिना अन्यत्र कहीं कोई ठिकाना नहीं

15. जीवन और शक्ति अन्योन्याश्रित

16. नर से नारायण

17. हमारी उदारता विवेक सम्मत हो

18. मनुष्य जन्म प्रचण्ड पुरूषार्थ का प्रतिफल

19. आँवला सस्ता किन्तु अति उपयोगी फल

20. आहार के सम्बन्ध में समुचित सतर्कता बरती जाय

21. गंगा की गौरव गाथा अकारण नहीं गाई जाती

22. भारतीय धर्म नारी के प्रति अनुदार नहीं

23. क्षुद्रता अपना कर हम पाते कुछ नहीं खोते ही हैं

24. अपनो से अपनी बात

अखण्ड ज्योति मई 1975

1. दृढ़ इच्छाशक्ति एक चमत्कारी उपलब्धि

2. विज्ञान ईश्वर के अस्तित्व से इन्कार नहीं करता

3. आत्म तत्व की अखण्डता

4. आध्यात्मिक क्षमताएँ और उनकी उपलब्धि

5. धन का उपार्जन और उपयोग नीति पूर्वक हो

6. हे परम प्रभु हमें पवित्र बना दें

7. अध्यात्म का अभाव ही व्यक्तित्व को विकृत करता हैं

8. मनुष्य क्या था ? और क्या बनेगा ?

9. मानवीय मस्तिष्क ऋद्धि सिद्धियों का भाण्डागार

10. ताते यह चाकी भली

11. अन्तर्ग्रही आदान प्रदान की तैयारी

12. परिवर्तन अवश्यम्भावी हैं उसके लिए तैयार रहें

13. देवत्व का वरण करें, असुरता का नहीं

14. मनुष्य सृष्टि का एक तुच्छ सा अल्पसंख्यक प्राणी हैं

15. अन्तर का परिष्कार, सफल जीवन का आधार

16. किसी का मनोबल न गिरायें, साहस प्रदान करे

17. पिछड़ापन अज्ञान का ही प्रतिफल हैं

18. जीवनी शक्ति का अपव्यय-तनाव उत्पन्न करेगा अन्यथा थकेगा

19. चिर यौवन और दीर्घ जीवन की अतृप्त आकांक्षा

20. सर्वनाश उन्माद को हम मूक दर्शक बनकर न देखें

21. धन दान न सही, हमारे पास और भी बहुत कुछ देने योग्य हैं

22. धन का संग्रह नहीं, सदुपयोग किया जाय

23. प्रदर्शन और उद्वेग से बचना ही बुद्धिमत्ता हैं

24. प्रकृति प्रतिकूलता को अनुकूल कैसे बनाया जाय

25. अपनो से अपनी बात

अखण्ड ज्योति अप्रेल 1975

1. ईश्वर का अस्तित्व असिद्ध नहीं हैं

2. सुख दुःख केवल तुलना शैली पर निर्भर हैं

3. जीवात्मा की सत्ता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण

4. मानवी चेतना में सन्निहित दिव्य शक्तियाँ

5. अंगदान की परम्परा भी चलेगी

6. ईश्वर को साथी बनाकर सफल जीवन जिये

7. क्या नर और नारी एक दूसरे के पूरक हैं

8. धर्म का अन्तःकरण और आवरण

9. साधन सिद्धि समय साध्य हैं

10. भारतीय संस्कृति अनन्त काल तक अक्षुण्ण बनी रहेगी

11. हम सुसंस्कृत बनें, संस्कारवान बने

12. मनुष्यों के बीच पाई जाने वाली भिन्नता और उसका विश्लेषण

13. मानवी अस्तित्व को चुनौति देने वाली समस्या की ओर से हम आँखे न मूँदे

14. सुखी दाम्पत्य जीवन इस तरह बनता हैं

15. अन्तरिक्षीय सहयोग प्रयास प्रक्रिया

16. हम सब सनकी बनते जा रहें हैं

17. दूसरों के गुण और अपने दोष देखें

18. स्वच्छ जलवायु के बिना स्वास्थ्य रक्षा सम्भव नहीं

19. सम्पत्ति की खोज में जल-थल और नभ का मानवी मन्थन

20. दूध पीना हो तो केवल गाय का पियें

21. अपव्यय की आदत जीवन को नरक बनाती हैं

22. अंक और उनका मनुष्य जीवन का सम्बन्ध

23. भ्रष्टता का प्रतिरोध किया जाना चाहिये

24. मनुष्य न तो सर्वोपरि है और न सर्वशक्तिमान

25. सर्प उतना भयंकर नहीं जितना उसे समझा जाता हैं

26. अपनो से अपनी बात

अखण्ड ज्योति मार्च 1975

1. सत्य को ही अपनायें-असत्य को नहीं

2. धर्म विज्ञान के द्वारा ही मनुष्य सुखी बनेगा

3. मानवी सत्ता समुद्र जैसी विशाल और महान् हैं

4. समय का एक क्षण भी निरर्थक न गँवाये

5. मनुष्य अतीन्द्रिय शक्तियों का भी भण्डार हैं

6. हम श्रेष्ठ बनें, सद्गुणी बने

7. मन्त्र सिद्धि के चार प्रधान आधार

8. योग निद्रा द्वारा अतिमानवी चेतना की उपलब्धि

9. उत्कृष्टता के दर्शन का बुद्धिवादी प्रतिपादन

10. अन्धविश्वास-खून का प्यास महादैत्य

11. प्रबल पुरूषार्थ से प्रतिकूलता भी अनुकूलता बनती है

12. महिला जागरण अभियान का उद्घोष

13. साधन बड़ा या साहस

14. अपने उपार्जन का अकेले ही उपभोग न करें

15. हमारा कर्तव्य और उत्तरदायित्व

16. खर्च आमदनी से कम करें

17. धर्म और विज्ञान जुड़वां भाई

18. सन् 2000 और उसकी सम्भावनायें

19. अपनो से अपनी बात

अखण्ड ज्योति फरवरी 1975

1. पगडंडिया न खोजें, राजमार्ग पर चलें

2. सत्य ही हमें स्वर्ग तक पहुँचाता है

3. जड़ और चेतन में एक ही सत्ता ओत-प्रोत हैं

4. हमारी बुद्धि सर्वज्ञाता नहीं हैं

5. धर्म और ईश्वर भी प्रगति पर

6. दुःख और सुख मिल बाँट कर हल्के करें

7. जिजीविषा की अजेय सामर्थ्य

8. संघर्ष रचनात्मक पथ समर्थन के लिए किया जाय

9. जिन्दगी और मौत सगी सहोदर बहने

10. हम निष्ठावान बने, स्वर्ग का सृजन करें

11. मानवी अस्तित्व और सभ्यता को चुनौति देने वाला अभूतपूर्व विश्व संकट

12. भारत ज्ञान क्षेत्र में विश्व नेतृत्व करेगा

13. अपने पर भरोसा करें, आप समर्थ हैं

14. जीवन-यात्रा के अवरोधों से सर्तक रहें

15. असफलता हमें हताश न कर पाये

16. विदेशों में योग प्रचार प्रचार-बचकाना खिलवाड़ न बनाया जाय

17. हिंसा और अहिंसा की विवेचना

18. अनासक्ति योग में ज्ञान-भक्ति-कर्म का समन्वय

19. दृष्टिकोण बदलें, सब कुछ बदलेगा

20. सफल जीवन की सरल रीति-नीति

21. रोग मुक्ति दवाओं से नहीं-प्रकृति की शरण में जाने से

22. शरीर तब स्वस्थ रहेगा जब मन स्वस्थ हो

23. अपनो से अपनी बात

24. रक्षक-भक्षक

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