विचार शक्ति इस विश्व कि सबसे बड़ी शक्ति है | उसी ने मनुष्य के द्वारा इस उबड़-खाबड़ दुनिया को चित्रशाला जैसी सुसज्जित और प्रयोगशाला जैसी सुनियोजित बनाया है | उत्थान-पतन की अधिष्ठात्री भी तो वही है | वस्तुस्तिथि को समझते हुऐ इन दिनों करने योग्य एक ही काम है " जन मानस का परिष्कार " | -युगऋषि वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पं. श्रीराम शर्मा आचार्य
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रविवार, 20 नवंबर 2011
शनिवार, 19 नवंबर 2011
बुधवार, 2 नवंबर 2011
रविवार, 30 अक्टूबर 2011
शुक्रवार, 28 अक्टूबर 2011
गुरुवार, 27 अक्टूबर 2011
सोमवार, 24 अक्टूबर 2011
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