मंगलवार, 4 अक्तूबर 2011

विभिन्न देवता और उनकी अलंकारिक कल्पना

भारतीय संस्कृति एक ही ब्रह्म मानती है । वस्तुत: भगवान एक ही है । नाम उसके अनेक हैं । रूपों की कल्पना अलग-अलग मतानुसार अलग-अलग प्रकार की गई है पर इससे ब्रह्म की एकता में कोई अन्तर नहीं आता है । अनेक देवता अनेक सत्ताएँ नहीं है वरन् एक ही परमात्मा की शक्तियाँ भर हैं ।
अनेक देवताओं की अलंकारिक कल्पना परोक्ष रूप में सद्गुणों और सत्प्रवृत्तियों की प्रतिष्ठापना के लिए है । उनके स्वरूप, वाहन, आयुध आदि में भी अनेक रहस्य और अर्थ छिपे पड़े हैं । जिन्हें चर्चा का विषय बनाकर हम उस देवता के भक्त, अनुयायी बनकर वैसा ही आचरण करने की प्रेरणा ग्रहण कर सकते हैं । हर देवता इसी प्रकार की प्रेरणा, शिक्षा एवं अभिव्यंजना का रहस्यवाद अपने भीतर छिपाये हुए हैं ।

देवपूजा में प्रयुक्त होने वाले पदार्थ और कर्मकाण्डों के पीछे भी धर्म और अध्यात्म के पथ पर चलने वाले साधकों को बहुत ही महत्वपूर्ण शिक्षण प्रस्तुत मिलेगा ।

-पं. श्रीराम शर्मा आचार्य
युग निर्माण योजना - दर्शन, स्वरूप व कार्यक्रम-६६ (६.११)

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