मंगलवार, 28 दिसंबर 2010

जीवन क्या हैं ?

जीवन क्या हैं ? यह एक ऐसा प्रश्न हैं, जो युगों-युगों से पूछा जा रहा हैं एवम् अनुत्तरित हैं। श्रुति की शरण मे जायें, तो वह कहती हैं कि हर व्यक्ति द्वारा जीवन के स्वरूप को समझा जाना चाहिए और उससे जुड़े तथ्यों को स्वीकार करना चाहिए, चाहे वे कितने भी कडुए एवम् अप्रिय क्यों न प्रतीत होते हों ? जीवन एक चुनौती हैं, एक समर हैं, एक जोखिम हैं एवम् उसे इस रूप में स्वीकार करने के अलावा हमारे पास और कोई चारा भी नही।

जीवन एक रहस्य हैं, तिलिस्म हैं, भूल-भुलैया हैं, एक प्रकार से एक गोरखधन्धा हैं।जिस किसी के पास भी गंभीर प्रयवेक्षण करने की दृष्टि हो, वह उसकी तह तक पहुँच सकता हैं। इसी आधार पर जीवन से जुड़ी भ्रांतियों के कुहासों को भी मिटाया जा सकताहैं। कई प्रकार के खतरों से भी बचा जा सकता हैं। कर्तव्य के रूप में जीवन अत्यन्त भारी किंतु अभिनेता की तरह हंसने-हंसाने वाला हल्का-फुल्का रंगमंच भी हैं, जिसका विनोदपूर्वक मंचन कर आनंद लिया जा सकता हैं।

जीवन एक गीत हैं, जिसे पंचम स्वर मे गाया जा सकता हैं। जीवन एक अवसर हैं, जिसे गँवा देने पर सुब कुछ हाथ से निकल जाता हैं। जीवन एक स्वप्न हैं, जिसमे स्वयं को खोया जा सके तो भरपूर आनंद का रसास्वादन किया जा सकता हैं। जीवन एक प्रतिज्ञा हैं, यात्रा हैं, जीने की एक कला हैं। उसे सफल कैसे बनाया जाए, यह यदि जान लिया जाए, इस पर मनन कर लिया जाए, तो फिर उससे बड़ा भाग्यशाली कोई नही। जीवन सौंदर्य हैं, प्रेम हैं, सत्-चित-आनंद हैं। वह सब कुछ हैं, जो नियंता की इस स्रष्टि में सर्वोत्तम कहा जाने योग्य हैं। हम इसे जीकर तो दिखाएँ।

अखंड ज्योति अगस्त २०००

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