मंगलवार, 28 दिसंबर 2010

क्षण में शाश्वत की पहचान

क्षण मे शाश्वत छुपा है और अणु मे विराट | अणु को जो अणु मानकर छोड़ दे, वह विराट को ही खो देता है | इसी तरह जिसने क्षण का तिरस्कार किया, वह शाश्वत से अपना नाता तुडा लेता है | क्षुद्र को तुच्छ समझने की भूल नही करनी चाहिए, क्योंकि यही द्वार है परम का | इसी मे गहरे-गहन अवगाहन करने से परम की उपलब्धि होती है |

जीवन का प्रत्येक क्षण महत्वपूर्ण होता है | किसी भी क्षण का मूल्य, किसी दूसरे क्षण से न तो ज्यादा है और न ही कम है | आनन्द को पाने के लिए किसी विशेष समय की प्रतीक्षा करना व्यर्थ है | जो जानते है, वे प्रत्येक क्षण को ही आनन्द बना लेते है और जो विशेष समय की, किसी खास अवसर की प्रतीक्षा करते रहते है, वे समूचे जीवन के समय और अवसर को ही गँवा देता है |

जीवन की कृतार्थता इकट्ठी और राशिभूत नही मिलती | उसे तो बिन्दु-बिन्दु औरक्षण-क्षण मे ही पाना होता है | प्रत्येक बिन्दु सच्चिदानंद सागर का ही अमृत अंश है और प्रत्येक क्षण अपरिमेय शाश्वत का सनातन अंश | इन्हे जो गहराइयों से अपना सका, वही अमरत्व का स्वाद चख पता है |

एक फ़कीर के महानिर्वाण पर जब उनके शिष्यों से पूंछा गया की आपके सदगुरु अपने जीवन मे सबसे श्रेष्ट और महत्वपूर्ण बात कोन सी मानते थे ? इसके उत्तर मे उन्होंने कहा था, " वही जिसमे किसी भी क्षण वे सलंगन होते थे | "

बूंद-बूंद से सागर बनता है और क्षण-क्षण से जीवन | बूंद को जो पहचान ले, वह सागरको जान लेता है और क्षण को जो पा ले, वह जीवन को पा लेता है | क्षण मे शाश्वत की पहचान ही जीवन का आध्यात्मिक रहस्य है |

अखंड ज्योति जून २००१

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