गुरुवार, 2 जून 2011

अखण्ड ज्योति नवम्बर 1970

1. दुःख की निवृति ज्ञान से ही सम्भव

2. प्रेम जगत का सार और कुछ सार नहीं

3. प्रेम की आस, प्रेम की प्यास, पशु-पक्षियों के भी पास

4. यह रही सच्ची भावना की शक्ति-सामर्थ्य

5. अपूर्णता से पूर्णता की ओर

6. विभूतियाँ कुपात्र को नहीं सुपात्र को

7. हम आसुरी वृत्तियों को नहीं देव वृत्तियों को अपनाये

8. पवित्रीकरण-प्रकृति की आद्य प्रक्रिया

9. आत्मा-शरीर नही, शाश्वत और स्वतन्त्र द्रव्य

10. जितना सूक्ष्म स्वत्व, उतना अधिक महत्व

11. शरीर का मूल्य केवल सत्ताइस रूपये ?

12. जिज्ञासा और धैर्य में आत्म-ज्ञान की पात्रता सन्निहित

13. आत्म सुधार-विश्व कल्याण का सबसे सरल मार्ग

14. खेती करिए हवा में, मन भावे सो खाइये

15. वर्तमान की मुट्ठी में भूत और भविष्य दर्शन

16. अचेतन कुछ भी नहीं, जड़ भी चेतन

17. आत्म-चेतना की विलक्षण आकृतियाँ-प्रकृतियाँ

18. जर्रा जर्रा बोल रहा हैं-जियो और जीने दो

19. सत्य को सर्वोपरि मानने वाला सत्यकाम

20. निरहंकारी ही पापो से बच सकता हैं ?

21. वैज्ञानिक कसौटी पर फेल-आधुनिक फैशन

22. संयुक्त राष्ट संघ संयुक्त गृह राज्य की ओर

23. एक भाई की खोज

24. चक्कर, चैरासी लाख योनियों का

25. हृदय-परिवर्तन

26. काम वासना का अधिकतम 1/23 वाँ हिस्सा

27. इस वर्ष के गायत्री यज्ञों एवं युग निर्माण सम्मेलनों के कार्यक्रम

28. अपनो से अपनी बात

अखण्ड ज्योति अक्टूबर 1970

1. शक्ति-स्त्रोत की सच्ची शोध

2. प्यास जो बुझ न सकी

3. प्रेम का परिष्कार-पेड़-पौधों से भी प्यार

4. पदार्थ से पृथक् आत्म-चेतना का अस्तित्व

5. वेद और विज्ञान-ब्रह्माण्ड-विकास का तुलनात्मक अनुसन्धान

6. इष्ट की उपासना का मर्म

7. हमारी प्रगति उत्कृष्टता की दिशा में हो

8. यह प्रकाश क्या सुक्ष्म शरीर था ?

9. हम भूत और भविष्य भी जान सकते हैं

10. कर्मफल-हाथों-हाथ

11. अद्भुत प्रकृति के अद्भुत रहस्य

12. क्रोधात् जयेत अक्रोधेन

13. दान का लक्ष्य यश नहीं आत्मसंतोष हो

14. अण्डा खाइये और लकवा बुलाइये

15. शारीरिक शक्ति से वृहत्तर-इच्छा शक्ति

16. हँसिये जी खोलकर-स्वस्थ रहिए जीवन भर

17. धुँआ एक मारता हैं और एक जिन्दगी देता हैं

18. अहंकार के सर्पदंश से सदा बचे रहिए

19. सत्यमेव जयते

20. जन्म से मृत्यु तक अविराम-काम ही काम

21. भौतिकता की बाढ़ मारकर छोड़ेगी

22. संगीत कला विहीनः साक्षात् पशु पुच्छ हीन

23. धर्म और विज्ञान में सामन्जस्य अनिवार्य

24. भारतीय संस्कृति का मर्म और स्वरूप

25. विधवा नास्ति अमंगलम्

26. अपनो से अपनी बात

27. ज्ञान यज्ञ करना हैं

अखण्ड ज्योति सितम्बर 1970

1. कर्मो की खेती

2. अधूरी साधना-अपूर्ण फल

3. ईश्वर बोध की सर्व सुलभ साधना-प्रेम

4. रमणीक देह नगरी-एक देव उद्यान

5. हम अणु से ही उलझे न रहे, ‘विभु’ बने

6. प्रपन्च प्रेम नहीं-निस्वार्थ प्रेम

7. अनासक्त कर्मयोग और उसका दर्शन

8. कुसंस्कार धोते चले-अगला जन्म पछतावा न बने

9. विस्तार की धुन में सिमट रही दुनिया

10. हड्डियां कमजोर करनी हो तो मांस खाइये

11. सिद्धि से श्रेष्ठ सन्निधि

12. कठिनाइयां हमारे व्यक्तित्व को प्रखर बनाती हैं

13. जनसंख्या निरोध की निर्दय किन्तु प्राकृतिक प्रविधि

14. प्रकृति के अनोखे योग

15. सन् 2000 और उसके पूर्व के 30 वर्ष

16. मैत्रेयी-जिसने धन नहीं आत्म कल्याण चाहा

17. सम्पूर्ण दृश्य प्रकृति सूर्य प्रकाश की अनुकृति

18. वासनाओं के कुचक्र में आत्मबल का ह्रास

19. प्रकृति का निर्मम सत्य और वीर भोग्या वसुंधरा

20. एक अंग्रेज-आत्म-तत्व की खोज में

21. ‘‘संस्कारात् द्विजोच्चते’’

22. वायु प्रदुषण से हमें यज्ञ बचायेंगे

23. विज्ञान ने समस्यायें सुलझाई कम, उलझाई अधिक

24. सात लोक-जीवों की सात अवस्थायें

25. अपनो से अपनी बात

26. राजनीति पर धर्म की विजय

27. स्नेह-दीप धरना

अखण्ड ज्योति अगस्त 1970

1. जीवन की त्रिधारा

2. जिन खोजा तिन पाइया, गहरे पानी पैठ

3. प्रेमा-भक्ति का विकास और विस्तार

4. एकोऽहं बहुस्यामः की पृष्ठभूमि

5. भारतीय दर्शन का विस्तार और वैज्ञानिक विश्लेषण

6. कर्मयोगी-अनाशक्ति

7. धर्म-विहीन विज्ञान-नितान्त अपूर्ण

8. जो ब्रह्माण्ड में हैं वही अण्ड में हैं

9. मना का जन्म कु. शुक्ला के रूप में

10. पृथ्वी कब बनी ? मनुष्य कब बना ?

11. प्रलय की मान्यतायें कल्पित नहीं

12. विद्या ही तो सफलता का मूल आधार हैं

13. संगीत एक हृदयस्पर्शी शक्ति

14. एक शरीर यहाँ भी-वहाँ भी

15. बच्चों को दण्ड नहीं, दिशायें दे

16. अमैथुनी सृष्टि भी होती हैं-हो सकती हैं

17. हमारी इच्छा-शक्ति प्रबल एवं प्रखर हैं

18. बम विस्फोट कितने घातक

19. नमक शरीर के लिए आवश्यक नहीं

20. योग-पूर्व परिचय एवं प्रारम्भिक तैयारी

21. विद्रूप और उसकी साधना दृष्टि

22. सृष्टि का सौन्दर्य ऐसे नष्ट न करे

23. जीवों की सात अवस्थायें और उसका विज्ञान

24. यह विशाल धनराशि निर्धनता पाट सकती है

25. अपनो से अपनी बात

26. सत्य-दर्शन

अखण्ड ज्योति जुलाई 1970

1. जिसे जीना आता हैं वह सच्चा कलाकार हैं

2. विश्व-मैत्री

3. प्रेम-प्रतिरोपण से पत्थर भी परमात्मा

4. बिन्दु में सिन्धु समाया

5. मनुष्य-अनन्त शक्तियों का भाण्डागार

6. जीवनोद्देश्य से विमुख न हूजिए

7. बाहर नहीं, भीतर देखते हैं

8. असुरता के संहार में प्रवृत-हमारी अन्तःचेतना

9. सौ प्यारे को सौ दुःख

10. उपकारिणी धरती माता

11. समय और चेतना से उठकर आत्म-चेतना के दर्शन

12. संख्या नहीं समर्थता जिन्दा रहेगी

13. प्रयोग कितने उत्पीड़क

14. पतिव्रत ही नहीं, पत्नीव्रत भी

15. सजीव स्वर्ग-हिमालय की पुष्प घाटी

16. एक भाषा-संस्कृत भाषा

17. मोह-माया में भ्रमित अग-जग

18. मकड़ी भी भगवान दत्तात्रेय की गुरू

19. अज्ञ रहना अन्धकार में भटकना हैं

20. बिना कुछ खाये जिन्दगी बीत गई

21. अपनी संस्कृति को प्रवासी पक्षी भी नहीं भूलते

22. हम सुधरे तो बच्चे सुधरे-वैज्ञानिक दृष्टि

23. विज्ञान और धर्म में पारस्परिक सम्बन्घ

24. शरीर के हरिजन फेफड़े

25. अपनो से अपनी बात

26. धर्मात्मा गिद्धराज जटायु

27. अब बलिदानो की बात करो

अखण्ड ज्योति जून 1970

1. साधन त्रिवेणी

2. अनैतिक सफलता-नैतिक असफलता

3. प्रेम की परख-प्रेम की परिणति

4. लघुत्तम मानव जीवन-यह संसार महत्तम

5. पदार्थ और प्रतिपदार्थ-गुरूत्वाकर्षण और प्रतिगुरूत्वाकर्षण

6. आत्म विस्तार-अखण्ड आनन्द का एकमात्र साधन

7. एक ओर सलीब-हूबहू ईसा जैसा

8. प्राणियों के पोषण और रक्षण में रत-मरूतदेवता

9. बच्चों को अंगुली पकड़ कर सिखाना

10. धर्म का स्वरूप और आधार

11. नागेश का तप

12. हाइड्रोजन और ईश्वर का साम्य

13. जीवन एक प्रिय-प्रवास

14. ध्यान-भारतीय दर्शन का गम्भीरतम विज्ञान

15. विद्याध्यन की उपेक्षा न करे

16. सन्त स्नेहवश श्रेष्ठी पुत्र को अज-रहस्य बतलाते

17. क्या हम भविष्य में अति कुरूप हो जायेंगे ?

18. निदान रोग का या मोह का

19. भारत एक राष्ट्र संघ, वैदिक संस्कृति-विश्व संस्कृति

20. शाकाहार इसलिए आवश्यक

21. चरित्र साधना से भी अधिक पवित्र

22. संगीत सत्ता और उसकी महान् महत्ता

23. मृत्यु घाटी में परिवर्तित हो रहा संसार

24. साहस का देवता और उसकी उपासना

25. वन्दनीय तो आत्मा हैं, जाति नहीं

26. वृद्ध शरीर 80 दिन में फिर नया

27. अपनो से अपनी बात

28. मोह-भंग 

अखण्ड ज्योति मई 1970

1. जीवन का अर्थ

2. सन्त की दया सब पर समान

3. हारे को हरि नाम

4. भारतीय दर्शन का विस्तार व वैज्ञानिक विश्लेषण-1

5. सूक्ष्म शरीर का आणविक विश्लेषण-3

6. चमत्कारी शक्तियों का स्त्रोत-मस्तिष्क

7. औषधि के नाम पर जघन्य हिंसा

8. साधना में कड़ाई एक वरदान

9. जीव शास्त्री एक ओर-प्रकृति एक ओर

10. बिना पतवार-सिद्धि के द्वार-3

11. आत्म विश्वास की महती शक्ति सामर्थ्य

12. पात्र की परख

13. परकाया-प्रवेश एक सत्य घटना

14. संगीत सत्ता और उसकी महान् महत्ता-2

15. मारने की बात बहुत हो चुकी, कुछ जिलाने की भी हो-2

16. भारतीय संस्कृति विश्व संस्कृति

17. भारत द्वारा नवयुग नेतृत्व की भविष्यवाणी

18. वेष-भूषा की मनोवैज्ञानिक कसौटी

19. भूत बड़े बड़ो ने देखा

20. 15 करोड़ लम्बी पूछ वाले ब्रह्मकीट-धूमकेतु

21. मनुष्य अपना उत्तरदायित्व समझे और निभाये

22. कल्कि अवतार और उनकी युग निर्माण प्रक्रिया

23. अपनो से अपनी बात

24. निष्फल बलिदान नहीं होता

अखण्ड ज्योति अप्रेल 1970

1. जीवन का अभिप्राय-दिव्य प्रेम

2. दर्शन की प्यास

3. हमारी अदृश्य किन्तु अति समर्थ सूक्ष्म शक्तियाँ

4. सूक्ष्म शरीर का आणविक विश्लेषण

5. अध्यात्म का भावनात्मक आधार

6. अपमान और युक्ति का अन्तर

7. भारतीय दर्शन का विस्तार और वैज्ञानिक विश्लेषण

8. शब्द की सामर्थ्य मन्त्र विज्ञान

9. वैराग्य की प्रथम पाठशाला

10. परमार्थ के लिए आत्मोन्नति आवश्यक

11. गंगाजल की महान् महिमा

12. वृति शोधन से आत्मिक प्रगति

13. आओ हम आप दोनो जिये

14. बिना पतवार सिद्धि के द्वार

15. भूत बड़े बड़ो ने देखा

16. ईर्ष्या न करे, प्रेरणा ग्रहण करे

17. संगीत सत्ता और उसकी महान् महत्ता

18. सदाचार की शक्ति

19. खिन्नता के पाप सन्ताप से बचिए

20. मारने की बात बहुत हो चुकी, कुछ जिलाने की भी हो

21. निष्काम कर्मयोग की साधना

22. अपनो से अपनी बात

23. युग-निर्माण अभियान का महान् सत् साहित्य

24. पूजा का मर्म

अखण्ड ज्योति मार्च 1970

1. धर्म एक महासागर

2. अनासक्तः-सुखिनो भवन्ति

3. हमारी अदृश्य किन्तु समर्थ सूक्ष्म शक्तियाँ

4. सूक्ष्म शरीर का आणविक विश्लेषण

5. श्रेय और प्रेय पथ के परिणाम

6. कथा-तितीक्षा की कसौटी पर

7. संकल्प शक्ति के अद्भुत चमत्कार

8. शब्द की सामर्थ्य-मन्त्र का विज्ञान-1

9. आओ हम आप दोनो जिये

10. क्षमया वशीकृते लोके

11. आत्म जाग्रति की अमर साधना-प्रेम

12. प्रकाश (सूक्ष्म) शरीर की विकास प्रक्रिया

13. अपने लिए नहीं ओरो के लिए

14. गंगाजल और उसकी महान् महिमा-1

15. 1998 ईस्वी की दुनिया कुछ ओर ही होगी

16. जीवन-यापन की दिशा क्या हो ?

17. बिना पतवार-सिद्धि के द्वार-1

18. अणु विकिरण की विभषिका और यज्ञ

19. मस्तिष्क उद्वेग ग्रस्त न होने दे

20. पुरोहित-सर्वोच्च पद

21. चित्त-वृद्धि निरोध का विज्ञान व मनोविज्ञान

22. अपनो से अपनी बात

23. जीवन विकास की समग्र शिक्षा

24. जीवन दर्शन

अखण्ड ज्योति फरवरी 1970

1. व्यक्ति-व्यक्ति जीवन सुन्दर बनाने में सहायता करे

2. सुख-दुःख में एक समान

3. अति सूक्ष्म जीवाणुओं की महत्तम सत्ता

4. लघुत्तम से महत्तम-महत्तम से विराट्तम

5. ज्ञानार्जन के स्त्रोत सूखे कि मृत्यु हुई

6. विज्ञान की अपूर्णतायें और उनका विकल्प

7. गृहस्थ का अधिकार

8. जाबालि का ब्रह्म दर्शन

9. अध्यात्म-मानवीय प्रगति का आधार

10. चालीस इन्च की पत्नी चार इन्ची पति

11. वंश, कुल, गौत्र

12. जीवन क्रियाशील और उर्ध्वगामी बने

13. विज्ञान और यंत्रीकरण कितने पीड़ाजनक

14. मद्यपान महामारी और महायुद्ध से भी अधिक भयंकर

15. उर्ध्वगामी मन की सामर्थ्य

16. अपनी मान्यताओं के प्रति आस्थावान रहे

17. बदलती परिस्थितियों में स्वयं भी बदले

18. बच्चे यों न बढ़ाइये कि उन्हें पालते-पालते मर जाइये

19. चन्द्रगुप्त जीता, पर जब तब उतावलापन मिटा

20. संगठित जातिया चट्टानवत् दृढ़ हो जाती हैं

21. साधु का शाप यों फलित हुआ

22. हम असत्य का आश्रय न लें

23. मानव जीवन का प्रादुर्भाव और 84 लाख योनिया

24. स्वप्न कभी-कभी सत्य क्यों होते हैं

25. जीवन को उत्तमता की ओर बढ़ाइये

26. गायत्री उपासना से ब्रह्मवर्चस की प्राप्ति

27. अपनो से अपनी बात

28. जलो और जग को उजाला जुटाओ

अखण्ड ज्योति जनवरी 1970

1. सत्य के लिए सर्वस्व त्याग

2. संस्कृति के लिए त्याग

3. गति का दर्शन और परम गति

4. विज्ञान द्वारा प्रमाणित अन्तर्चेतना को भूला न जाय

5. इस संसार में सब कुछ चेतना ही हैं

6. आत्म-शक्ति का कुछ ठिकाना नही

7. लड़ रहा हो जब स्वयं विज्ञान से विज्ञान

8. वासना स्वभाव नहीं-विकार मात्र

9. मनुष्य शरीर जैसी मशीन नहीं

10. शरीर का ही नहीं आत्मा का भी ध्यान रखे

11. मुशल पर्व आस्ट्रेलियाई खरगोशों का

12. जल (वरूण देवता) की अनुपम, अद्भुत और अन्यतम सत्ता

13. मांसाहार का पाप पूर्व को भी पश्चिम न बना दे

14. अपनी कमाई-सदा काम आई

15. हमारा दृष्टिकोण अध्यात्मवादी बने

16. बदलती परिस्थितियों में स्वयं भी बदले

17. महानता का जनक-शुद्ध अहंभाव

18. हृदय-परिवर्तन

19. मेजर कार्लडिक को एक साधु का श्राप

20. आत्मिक प्रगति के लिए-उत्कृष्ट शिक्षा की आवश्यकता

21. दाम्पत्य जीवन की तैयारी और पत्नीव्रत की रक्षा

22. मानव मस्तिष्क की वैभव विभूतिया

23. स्वप्नों की सत्यता का रहस्य क्या हैं

24. गुरू भक्ति की परीक्षा

25. जीवन के उतार चढावों पर उद्विग्न न हो

26. अपनो से अपनी बात

अखण्ड ज्योति दिसम्बर 1969

1. बसंत पंचमी अपने परिवार का सबसे बड़ा पर्व

2. प्रार्थना आत्मा का सम्बल

3. आत्म कल्याण की भूमिका

4. प्रेममय परमेश्वर

5. आत्मा के सनातनत्व का प्रमाण पूर्वाभास

6. सर्वोत्कृष्ट सम्पत्ति

7. मनुष्य शरीर में कोई सर्वदर्शी सत्ता हैं ?

8. प्रतिशोध कथा

9. दीर्घायुष्य, दीर्घायुष्य, दीर्घायुष्य-रहस्य

10. सन्त-राष्ट्र की आत्मा

11. सन्त हरदास की भूमि समाधि

12. बैताल भट्ट का बानप्रस्थ

13. संसार उपयोगितावाद नहीं सहयोग और सद्भाव पर जीवित

14. आज जियेंगे तो कल सुनेंगे

15. जो बुद्धि से परे हैं वह केवल ‘अन्धविश्वास’ ही नहीं

16. कर्तव्य धर्म की साधना

17. आत्म-हीनता के बोझ से आप न दब मरे

18. धरती खिसक जाय तो आश्चर्य नहीं

19. सर्वव्यापी गरिमा मनुष्येतर प्राणियों में भी हैं

20. पौराणिक कथा गाथा-कवष की ऋषि पद प्राप्ति

21. जन्म-मृत्यु के जाल में इच्छायें बांधती हैं

22. जीवन-मुक्ति की साधना

23. त्यौहार और संस्कार प्रेरणाप्रद पद्धति से मनाये जाय

24. संयुक्त परिवार प्रणाली एक श्रेयस्कर परम्परा

25. देव शक्तियों का केन्द्र बिन्दु-गायत्री

26. कुण्डलिनी महाशक्ति की पौराणिक व्याख्या

27. निर्भयता-अपराजेय

28. अपनो से अपनी बात-हमारे शेष जीवन का कार्यक्रम और प्रयोजन

अखण्ड ज्योति नवम्बर 1969

1. निस्वार्थ प्रेम

2. निर्भय, निष्काम, निःशेष

3. दीवानगी तो अब तुमसे मिलकर ही रहेगी

4. भगवान् का स्वरूप, दार्शनिकों और वैज्ञानिकों की दृष्टि में

5. आत्मा की अमरता कल्पना मात्र नहीं

6. आध्यात्मिक जीवन इस तरह जिये

7. वह जो शरीर सहन नहीं कर सकता

8. सन्तोष का आभूषण

9. बहुरूपिये विज्ञान से सत्य का सम्बन्ध कितना ?

10. सुख-दुःख मानसिक स्थिति पर अवलम्बित हैं

11. समाज निर्माण मे पुस्तकालयों की भूमिका

12. कथा-अग्नि दीक्षा

13. मनोविकार हमारे सबसे बड़े शत्रु

14. विलासिता हमें अपंग करके छोड़ेगी

15. अमैथुनी सृष्टि भी होती हैं-हो सकती हैं

16. अपने अनुकूल बने-सुखी रहे

17. संयम ही हमे नष्ट होने से बचायेगा

18. प्रचण्ड शक्ति सम्पन्न सविता

19. कुण्डलिनी प्रचण्ड प्राण शक्ति की गंगोत्री

20. नवयुवक सज्जनता और शालीनता सीखे

21. अपना ही नहीं कुछ समाज का भी हित साधन करे

22. अपनो से अपनी बात-इन कर्तव्यों की उपेक्षा नहीं की जानी चाहिए

अखण्ड ज्योति अक्टूबर 1969

1. आदर्शो की रक्षा

2. सच्चा सहचर

3. एक तुम्ही जीवन-आधार

4. धर्म और विज्ञान परस्पर विपरीत-किन्तु परिपूरक

5. ईश्वर-विश्वास और आत्म-विकास की परम्परा

6. मस्तिष्क और मानवीय शक्ति का रहस्योद्घाटन

7. पूर्णता की प्राप्ति

8. भाग्य और भविष्य के महालेख और जीन डिक्सन

9. चेतन सत्ता की अनन्त सामर्थ्यवान शक्ति-विचार

10. अपरिग्रह का अर्थ

11. मनुष्य वृक्ष-वनस्पतियों से ही कुछ सीखे

12. तब, जब ज्वालामुखी फूटते हैं

13. जीवन दान

14. अमैथुनी सृष्टि भी उत्पन्न होती हैं, हो सकती हैं

15. जैविक औषधियाँ और जन स्वास्थ्य से खिलवाड़

16. अर्थात् ब्रह्म जिज्ञासा

17. मानवेतर प्राणियों का संसार भी मनुष्यों जैसा

18. कर्तव्य परायणता-मानव जीवन की आधारशिला

19. बेईमानी का नही, ईमानदारी का मार्ग अपनाये

20. अपव्यय एक पाई का भी न करे

21. पशु-बलि भारतीय धर्म पर एक कलंक

22. कुण्डलिनी महाशक्ति और प्राण प्रवाह

23. अपनो से अपनी बात

अखण्ड ज्योति सितम्बर 1969

1. सार्वभौमिक-उपासना

2. प्रेम-अमृत का झरना

3. अणोरणीयान् महतो महीयान्

4. शरीर और मनुष्य समाज का तुलनात्मक अध्ययन

5. माना कोई एक ईश्वर हैं

6. साधन-अनुसन्धान

7. परमात्म-सत्ता की इच्छा शक्ति-आकाश तत्व

8. विश्व-शान्ति का वैज्ञानिक आधार-सहयोग और सामूहिकता

9. श्रेष्ठ की परीक्षा

10. अनन्त सुप्त शक्तियों का भाण्डागार-सहस्त्र कमल

11. ब्रह्म सत्य जगन्माया-अल्बर्ट आइन्सटीन की दृष्टि में

12. आलस्य त्यागें-सुसम्पन्न बने

13. सज्जनता और मधुर व्यवहार-मनुष्यता की पहली शर्त

14. ऊँच-नीच की मान्यता अवांछनीय और अन्याय मूलक

15. संयम बरते-सुखी रहे

16. गौ संरक्षण हमारी एक महत्ती आवश्यकता

17. सन्तान कितनी और क्यों पैदा करे ?

18. अपव्यय और फैशन-परस्ती एक ओछापन

19. मन्दिर आस्तिकता और सत्प्रवृतियाँ जगाने में लगे

20. भिक्षा-वृति का व्यवसाय न रहने दे

21. ढलती आयु का उपयोग इस तरह करे

22. भाग्यवाद हमें नपुंसक और निर्जीव बनाता हैं

23. हँसती और हँसाती जिन्दगी ही सार्थक हैं

24. अपनो से अपनी बात


25. विदाई के क्षण और कर्तव्य

अखण्ड ज्योति अगस्त 1969

1. निकृष्टता नहीं, उत्कृष्टता ही हमें प्रभावित कर सके

2. प्रयोजन अति महान्, आरम्भ अति सरल

3. विचार क्रान्ति की दिशा में एक अति महत्वपूर्ण चरण

4. अपनी श्रद्धा को उर्वर एवं सार्थक बनने दे

5. दो छोटे कदम जो हमें बढ़ाने ही चाहिए

6. कर्मठता की चुनौति और समर्थता की खोज

7. आस्तिकता बढ़े तो देवत्व विकसित हो सके

8. प्रबुद्ध परिजनों का संगठन और जन्म दिवसोत्सव प्रक्रिया

9. धर्म मंच और शिक्षण का समन्वय

10. हमारी नसों में उष्णता उत्पन्न होकर रहेगी

11. युग परिवर्तन के छोटे किन्तु महान् शस्त्रागार

12. युग निमार्ण अभियान का महान् सत्साहित्य

13. विवाहों के आदर्श ऊँचे रखे जाय

14. खर्चीली शादियां हमें बेईमान और दरिद्र बनाती हैं

15. पतिव्रत ही नहीं पत्नीव्रत भी निभाया जाय

16. शाक हमारी खाद्य समस्या का हल करेंगे

17. मृतक भोज भी अविवेकपूर्ण न हो

18. तमाखू का दुर्व्यसन छोड़ा ही जाना चाहिए

19. धर्म तंत्र को प्रगतिशील बनने दिया जाय

20. मांस मनुष्यता को त्याग कर ही खाया जाता हैं

21. लो जल उठी, मशाल क्रान्ति की

अखण्ड ज्योति जुलाई 1969

1. कर्म ही ईश्वर-उपासना

2. ईश्वरीय सत्ता पर अविश्वास न करे

3. प्रेम-अमृत से बढ़कर मधुर कुछ नहीं

4. आत्मवत् सर्वभूतेषु

5. छोटे से छोटा और बड़े से बड़ा ‘‘मैं हूँ’’

6. हमारा दृष्टिकोण अध्यात्मवादी हो

7. जो दिखाई देता है, वह भी सत्य नहीं

8. मनुष्य जीवन का उद्देश्य समझे, और उसे पूरा करे

9. रोगों की गांठ तन में नहीं मन में

10. धर्मोरक्षति रक्षिताः

11. सेवा का अवसर हर समय

12. परलोक को भूलकर कही आपको भी पछताना न पड़े ?

13. एषणाओं की आग में न जल मरे

14. श्रद्धावान लभते ज्ञानम्

15. मानवेत्तर प्राणियों के दुनिया भी मनुष्यों जैसी

16. यज्ञीय वातावरण का स्वास्थ्य पर प्रभाव

17. विनोदप्रिय भगवान को मनोरंजन दरबार

18. समस्त दुःखों का एकमात्र कारण-अज्ञान

19. स्वर्ग की स्थिति और उपलब्धि

20. रंगों में शोभा ही नहीं, शक्ति भी हैं

21. हमारे अधिक विरोधी इसलिए बनते है

22. वैज्ञानिक अन्धविश्वास-और उसकी लाल रोशनी

23. अपनो से अपनी बात


सोमवार, 30 मई 2011

अखण्ड ज्योति जून 1969

1. विश्वात्मा ही परमात्मा

2. अहंकार की पराजय

3. ईश-प्रेम से परिपूर्ण और मधुर कुछ नहीं

4. वेदान्त की महनीयता-एको ब्रह्म द्वितीयो नास्ति

5. रोगों की जड़ शरीर नहीं, मन में

6. धार्मिक परिप्रेक्ष्य में विज्ञान की सीमितता

7. महान् मानव जीवन का महान् सदुपयोग

8. मनुष्य के अन्दर का रेडियो टेलिविजन

9. पूर्व ज्ञान केवल आत्म-चेतना के लिए सम्भव

10. हम आत्मविश्वासी बने, अपना भरोसा करे

11. मनुष्य अमीबा से नहीं, ईश्वर की इच्छा से बना हैं

12. भौतिक ही नहीं, आध्यात्मिक प्रगति भी आवश्यक हैं

13. मनुष्य मरने के बाद भी जिन्दा रहता हैं

14. हमारी महत्वाकांक्षाये-निकृष्ट न हो

15. चन्द्रमा देवता कुल 69 मील दूर

16. क्रूरता-मानवता पर महान् कलंक

17. ग्रह-नक्षत्रों की गतिविधियां हमें प्रभावित करती हैं

18. निराशा का अभिशाप-परिताप

19. एटम बमों की मार से हमे यज्ञ बचाते हैं

20. अहंकार अपने ही विनाश का कारण

21. पूजा का मर्म

22. अपनो से अपनी बात

23. यज्ञ कुण्ड जागो, आहुति लो

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