गुरुवार, 9 जून 2011

अखण्ड ज्योति अप्रेल 1979

1. दृश्य नहीं, दर्शक बने

2. अवश्यमेव भोक्तव्यं कर्मफल शुभाशुभम्

3. नास्तिकता कोई विचारधारा नहीं, चित्त की स्थिति है

4. प्रतिकूलताओं को चुनौति देती मानवी चेतना

5. तोड़ना आसान, जोड़ना कठिन

6. परमात्मा का अस्तित्व और अनुग्रह

7. प्रकृति की विलक्षणताये और उनका अर्थ

8. यह रिश्तेदारी नहीं भूलें

9. यह अविच्छिन्न जीवन प्रवाह

10. जीवन का अर्थ चेतना

11.शक्तियां सँजाये, खोये नहीं

12. अन्यथा मनुष्य एक निरीह प्राणी ही है

13. नीतिमत्ता सर्वमान्य योग्यता

14. अन्तःकरण की प्यास प्रेम साधना से ही बुझेगी

15. कृपया कृपण न बने

16. पूजा के फूल

17. अतीन्द्रिय शक्तियाँ और उनका प्रयोजन

18. सम्पदायें ही नहीं विभूतियाँ

19. शान्ति-एकान्त की शक्ति और उपयोगिता

20. स्वाध्याय की उपेक्षा न करे

21. महापुरूष पुस्तकों की प्रयोगशाला में

22. विनोदवृति एक बहुमूल्य विशेषता

23. खिलखिलायें नहीं तो मुस्कराये अवश्य

24. आचार्य श्रीराम शर्मा का व्यक्तित्व और कृतित्व

25. अपनो से अपनी बात

26. युग निर्माण करेंगे अब हम

अखण्ड ज्योति मार्च 1979

1. प्रार्थना जीवन अमृत

2. सब काल के अधीन

3. नास्तिकता सबसे बड़ा अन्धविश्वास है

4. मनुष्य अपनी मौलिक विशेषतायें लेकर ही आया

5. असन्तोष का कारण अनुपयुक्त आकांक्षाएँ

6. स्थूल प्रकृति भी विलक्षण कौतुकमय

7. आत्म चेतना का प्रबल आकर्षण बल

8. निरंकुश भोगवाद अपराधी प्रवृत्तियों को बढ़ाता है

9. घटनाओं का स्वरूप घटने से पहले ही बन जाता है

10. उसे खोजा होता

11. जो मोत से लड़े और अन्ततः विजयी हुए

12. प्रकृति के आँगन में ब्रह्म विद्या के पाठ

13. जीव-जन्तु मनुष्य से कम सम्वेदनशील नहीं

14. समस्त विग्रह और क्लेशों का मूल अहंकार

15. सदाचरण से दीर्घ जीवन की प्राप्ति

16. पितरों के प्रति कृतज्ञ रहे

17. कलि का प्रभाव क्षेत्र

18. विलुप्त सभ्यता के पुनरोदय की सम्भावना

19. सर्व सुलभ बेहद सस्ता पौष्टिक भोजन

20. श्रम स्वेदों की गंगा

21. अद्भुत इमारतें और रहस्यमय सुरंग

22. अजीब लोग और उनके विचित्र संकल्प

23. मनोबल गिराने वाले आक्रमणो से रक्षा

24. अपनो से अपनी बात

25. अंशदान

अखण्ड ज्योति फरवरी 1979

1. आनन्द प्राप्ति की दिशा

2. मंगला मंगलम्

3. ईश्वर हमें दीखता क्यों नहीं ?

4. ब्रह्म सत्यं जगत् मिथ्या का व्यावहारिक स्वरूप

5. आश्चर्यवत्पश्यति कश्चिदेनं

6. श्रद्धा विश्वास रूपिणौ

7. भावना से सिद्धि

8. प्रकृति का दुलार, उपहार-विलक्षण क्षमताओ का भण्डार

9. वनस्पति जगत मनुष्य से कहीं अधिक संवेदनशील है

10. उपासना सफल तो जीवन भी सफल

11. जीवन का सत्य और सार्थकता

12. मरण और उसके साथ जुड़ी हुई समस्यायें

13. धर्म जानि कुसुमानि

14. पुनर्जन्म सिद्धान्त को भली-भाँति समझा जाय

15. अपराध न समाज से छिपता है न अपने आप से

16. खीझते रहने की आदत से पीछा छुड़ायें

17. भ्रमण और स्वास्थ्य

18. बुढ़ापा मिटाया तो नहीं घटाया जा सकता है

19. रोग का कारण कीटाणु नहीं, शरीरगत विषाक्तता

20. एक बहुत बुरी खबर

21. अपनो से अपनी बात-जाग्रत आत्माओं को रजत जयन्ती वर्ष का आह्वान उद्बोधन

22. बुझा सकेगी इसे न झंझा-कविता

अखण्ड ज्योति जनवरी 1979

1. आत्मिक विभूतियों का उभार, उत्कृष्ट जीवन में

2. भगवान बुद्ध की अमृतवाणी

3. वन्दे महापुरूष ते चरणारविन्दे

4. यदि जीवन मे ईश्वर घुल जाय

5. सर्वतः पाणिपाद तत्सर्वनतोऽक्षिशिरोमुखम्

6. मायामय संसार के सुलझते हुए रहस्य

7. दुर्बुद्धि ने विज्ञान को भी अभिशाप बना दिया

8. स्वप्नो के माध्यम से सूक्ष्म जगत् में प्रवेश

9. चेतना को उर्ध्वगामी बनायें, जड़ नहीं

10. सर्वस्व त्याग का अर्थबोध

11. न यन्त्र न विज्ञान फिर भी दूरवर्ती का ज्ञान

12. अतीन्द्रिय शक्तियों का आधार हमारा मन

13. शोक का कारण व निवारण

14. मनःस्थिति सन्तुलित रखिए

15. चरित्र-निष्ठ व्यक्ति ईश्वर के समान

16. विधेयात्मक श्रद्धा-उत्कर्ष का आधार

17. जीवन कला में पारंगत वृक्ष वनस्पति

18. विज्ञान की कसोटी पर ध्यान

19. सारा शरीर ही जलमय है

20. सारे वातावरण को ही गायत्रीमय बनाना होगा

21. कुछ-जीभ की भी सुनिये, मानिये

22. अपनो से अपनी बात-इस वर्ष की सत्र श्रंखला का विवरण और आमन्त्रण

23. ध्यान आया नहीं-कविता

अखण्ड ज्योति दिसम्बर 1978

1. भूत न बनें, देवत्व की ओर बढ़े

2. यह सच या वह सच

3. युग क्रान्ति में गायत्री यज्ञों की भूमिका

4. कुछ हैं जो इन्द्रिय चेतना से परे है

5. जीवन की पहेलियाँ और विचित्रतायें

6. चेतना की निस्सीमता को समझें और साधे

7. आत्मा न स्त्री हैं न पुरूष

8. श्रद्धा सत्यमाप्यते

9. ।।मन एवं मनुष्याणां कारणं बन्ध मोक्षयो।।

10. अमृतपान से वंचित

11. चाहें जो बन जायें-इतनी भर ही छुट्टी है

12. प्रार्थना का अर्थ मांगना नहीं है

13. प्रार्थना के सही स्वरूप से अभीष्ट प्राप्ति

14. प्रकृति-उपभोग्य ही नहीं उपास्य भी

15. पेड़ तो चल पड़े-पर मनुष्य बैठा है

16. वानप्रस्थ-नवयुग का प्रमुख आधार

17. क्षुद्र प्राणियों का विशाल अन्तःकरण

18. प्रतिगृह का दान

19. प्रेम और करूणा का चुम्बकीय आकर्षण

20. दिलदार पत्थर और संगीतकार रेत

21. चिरयौवन का रहस्य

22. संकल्प शक्ति का उपार्जन उपयोग !

23. मृत्यु अर्थात् जीवन का अन्त नहीं

24. शक्तियों का क्षरण रोका जाय

25. अकेलेपन को पहचानिये

26. कर्मयज्ञ से सिद्धि

27. भावना क्षोभ से मुक्ति अर्थात् रोग से छुट्टी

28. अपनो से अपनी बात-अध्यात्म और विज्ञान के समन्वय का समग्र अनुसन्धान

29. अनुदान-कविता

30. युग क्रान्ति में गायत्री यज्ञों की भूमिका

अखण्ड ज्योति नवम्बर 1978

1. आत्मदेव की साधना और सिद्धि

2. भगवान बुद्ध की अमृतवाणी

3. सिद्ध न होने पर भी ईश्वर तो है ही

4. सर्वज्ञ सर्वशक्तिमान चीफ इंजीनियर

5. अपनी ही काया अनजानी

6. बोझी पाथर भार

7. महर्षि पद की पात्रता

8. जन्म-जन्मान्तर के अभिन्न मित्र-सत्संस्कार

9. कुछ दिन जानवरों के बीच रहिए

10. आस्था संकट से संस्कृति नाव ही पार करेगी

11. भर गया उस दिन भिक्षा पात्र

12. आज्ञाकारी पेड़ और गणितज्ञ कैक्टस

13. अद्भुत की व्यवस्था अद्भुत

14. व्यक्तित्व विकास में स्वाध्याय का योगदान

15. प्राप्तः को भवता गुणः

16. पराज्ञानी महिला द्वारा स्वर्णिम भविष्य की घोषणाएँ

17. मनोरंजन की आवश्यकता और स्तर

18. हलो मंगल ग्रह एक सैकण्ड अभी आया

19. युग शक्ति गायत्री का अवतरण अभिप्राय

20. मानसिक संक्षोभो से स्वास्थ्य की बर्बादी

21. वृद्धावस्था हम स्वयं बुलाते हैं

22. खाने के लिए जीयें या जीने के लिए खायें

23. आध्यात्मिक शोधों के लिए नई प्रयोगशाला का शुभारम्भ

24. ‘‘अखण्ड ज्योति’’ क्यों पढ़े ? क्यों मंगायें ?

25. स्वाध्याय तपः

26. लो तुम इसे सुधार-कविता


अखण्ड ज्योति अक्टूबर 1978

1. वैभव की जड़े अन्तरंग की गहराई में धँसी होती है

2. आत्मज्ञान से कल्याण

3. भगवान बुद्ध उनका मार्ग और व्यक्तित्व

4. मानवी सामर्थ्य और प्रकृति से भी बृहतर शक्ति

5. आत्म-परिष्कार की तीन सरल किन्तु महान् साधनायें

6. विषया शक्ति के मायावी घेरे

7. विज्ञान ओर अध्यात्म का समन्वय सन्निकट

8. विस्तार को नहीं स्तर को महत्व दिया जाय

9. इस संसार में रहस्य कुछ नहीं, सर्वत्र नियम और व्यवस्था ही हैं

10. प्रेम-मानव जीवन की सर्वोपरि सम्पदा

11. समर्थक सहयोगी का पातक

12. स्मरण शक्ति प्रयत्नपूर्वक बढ़ाई जा सकती हैं

13. समय और साधनों की अस्त-व्यस्तता पर भी ध्यान दे

14. दान की महिमा और भिक्षा की गरिमा

15. कर्मफल का प्रारब्ध में भुगतान

16. अनुत्तरित प्रश्न-सटीक समाधान

17. विलुप्त जीवन ही नहीं, मनुष्य भी होगा

18. अवांछनीयता को अस्वीकार कर दे

19. विग्रहों का कुचक्र और उसका निराकरण

20. प्रभावी प्रशिक्षण के लिए उपयुक्त वातावरण की आवश्यकता

21. संयम बनाम समर्थता बनाम सुनिश्चित जीवन

22. अपनो से अपनी बात

23. कुछ आवश्यक ज्ञातव्य एवं अनुरोध

24. मौन-भंग (कविता)

अखण्ड ज्योति सितम्बर 1978

1. साधना और सिद्धि का सिद्धान्त

2. ब्रह्म दर्शक के लिए सेवाधर्म

3. आत्मसाधना के तीन चरण

4. अर्थवसुश्चपरिग्रह

5. विज्ञान भावनाशील बने और धर्म तथ्यानुयायी

6. एकाग्रता कुशलता की जननी

7. पदार्थ भी व्यक्ति और वातावरण से प्रभावित होते हैं

8. सोने का अण्डा देने वाली मुर्गी का पेट न चीरे

9. पैरों को तोड़े नहीं, प्रगति की सहज यात्रा पर बढ़ने दे

10. धरती और सूरज मरने की तैयारी कर रहे है

11. मृत्यु से डरे नहीं, उसे सरल और सुखद बनाये

12. जीवन का सबसे बड़ा श्रेय साधन कर्म कौशल

13. असामान्य कहलाने की उद्धत ललक-लिप्सा

14. क्या खायें, क्या न खायें ?

15. प्रगतिशील जीवन अच्छी आदतों पर निर्भर हैं

16. गंगा माता की गोद में अमृतोपम पयःपान

17. बढ़ती हुई रूग्णता का मूल कारण चिन्तन की निकृष्टता

18. विचारों की शक्ति सर्वोपरि

19. संकट नहीं साहस बड़ा हैं

20. मुस्कान सुसंस्कृत व्यक्तित्व की निशानी है

21. अपनो से अपनी बात

22. मानव और धर्म-कविता

अखण्ड ज्योति अगस्त 1978

1. आस्था ही आस्तिकता

2. धर्म हमें अन्तिम सत्य तक ले पहुँचता हैं

3. चेतना का हाथी भौतिकों की सुतली से न बाँधे

4. आत्म निर्माण के अधिकारी

5. आत्म प्रगति के आधारभूत साधन योग और तप

6. मनुष्य क्षमता से नहीं शालीनता से बड़ा हैं

7. आत्म-निरीक्षण और आत्म-नियन्त्रण की आवश्यकता

8. व्यवहार से ही ज्ञान की सिद्धि

9. अतीन्द्रिय क्षमताओं में प्रमुख दिव्य दृष्टि

10. जीवन और मरण की रहस्यमयी पहेली

11. जीवन मानव जीवन की सर्वोपरि सम्पदा

12. व्यक्तित्व का स्तर गिरायें नहीं, ऊँचा रखें

13. जीवन काल मनःस्थिति मरने के उपरान्त भी

14. षट्चक्र प्रचण्ड प्रवाहों के उद्गम

15. अविज्ञान की अनुकम्पा से महान् रहस्यों का प्रकटीकरण

16. सिद्धपीठ चलें शक्ति लेकर आयें

17. लूट-खसोट के अवरोध में सूक्ष्म-शक्तियों की भूमिका

18. प्राचीनता की हठ-सत्य के प्रति अत्याचार

19. अग्निहोत्र में तप और ध्वनि शक्ति का सूक्ष्म प्रयोग

20. यज्ञ की महिमा धर्म शास्त्र की दृष्टि में

21. उच्च रक्तचाप की महाव्याधि का संकट

22. ध्यान धारणा का आत्म निर्माण में योगदान

23. प्रशिक्षण और मार्गदर्शन की स्वयंभू शक्ति

24. अपनो से अपनी बात

25. नास्ति जीवन्तो सनातनः

26. करनी कुछ दिखलाओ

अखण्ड ज्योति जुलाई 1978

1. पवित्रता, महानता और संयमशीलता

2. प्रगति के लिए कल्मषों का निवारण आवश्यक

3. अभिवर्द्धन से पूर्व परिशोधन करना होगा

4. कर्मफल की सुनिश्चितता बनाम आस्तिकता

5. कर्मफल की अस्त-व्यस्तता एवं अपवाद श्रंखला

6. पापकर्मों का परिमार्जन मात्र प्रायश्चित से

7. प्रारब्ध न तो अन्धविश्वास हैं और न अकारण

8. तत्काल फल न मिले तो भ्रम में न पड़े

9. कुसंस्कारों का परिपाक कष्टों और संकटो के रूप में

10. कर्मफल भोगे बिना छुटकारा नहीं

11. आकस्मिक विपत्तियों और दुर्घटनाओं की परोक्ष पृष्ठभूमि

12. अनेक संकटों के कारण मनुष्य के संचित पापकर्म

13. व्यक्ति को प्रखर और भविष्य को उज्ज्वल बनाने की साधना

14. प्रौढ़ साधकों के उपयुक्त प्रखर साधना

15. सर्वतोमुखी प्रखरता उत्पन्न करने वाली तप-साधना

16. चन्द्रायण तप की शास्त्रीय परम्परा

17. चन्द्रायण तप और पंचकोषी योगाभ्यास

18. ब्रह्मवर्चस साधना में ज्ञानयोग, भक्तियोग एवं कर्मयोग का समन्वय

19. ब्रह्मवर्चस की योगाभ्यास साधना

20. साधना का पारस-कविता

अखण्ड ज्योति जून 1978

1. इसे खरीदेगा कौन ?

2. जीवन विराट् पार्थिव नहीं-विराट् तत्व

3. धर्म और विज्ञान का समन्वय ही एकमात्र चारा

4. एकांगी साधना-अधूरी साधना

5. सपनों में सन्निहित जीवन सत्य

6. भारतीय संस्कृति और उसकी विशेषताएं

7. आस्था, जिम्मेदारी और हिम्मत

8. मनुष्य जीवन भी एक प्रवास ही तो है

9. सौर ऊर्जा का अथाह सिन्धु काश उसे धारण कर पाये

10. नीति निष्ठा का निर्वाह इस तरह बन पड़ेगा

11. व्याधि निवारण के लिए धर्मानुष्ठानो का उपचार

12. मनःशक्ति की विकृति ओर विनाश एक ही है

13. मित्रता और उसका निर्वाह

14. विक्षिप्तता और उसका स्थायी समाधान

15. दारिद्रय की समस्या और एक विकल्प

16. तीर्थयात्रा का आधार, स्वरूप और प्रतिफल

17. ज्ञान प्रसाद-की दिशा में

18. चटोरापन स्वास्थ्य की बर्बादी का सबसे बड़ा कारण

19. सूर्य सेवन हमारे लिए परम उपयोगी

20. ध्यान योग का पूर्वाभ्यास शिथिलीकरण मुद्रा से

21. गढ़े खजाने ढूँढने पर भी मिलते क्यों नहीं ?

22. गायत्री जयन्ती पर सभी परिजन अपनी भावभरी श्रद्धा का परिचय दे

23. गायत्री महाविद्या के अमूल्य ग्रन्थ रत्न

24. प्राणों की तरूणाई-कविता

अखण्ड ज्योति मई 1978

1. देवता

2. संगति का प्रभाव, परिणाम

3. इंसान-सर्व-शक्तिमान माता-पिता की सन्तान

4. भवित भिक्षां देहि

5. मनोनिग्रह के लिए उपासना की आवश्यकता

6. समर्पण योग की आत्मसाधना

7. इन्द्रिय बोध अप्रमाणिक

8. महत्व प्रवृत्तियों का नहीं उनके उपयोग का हैं

9. देवत्व दुर्बल न पड़े, असुरता पर हावी रहे

10. वृक्ष वनस्पतियों के प्रति श्रद्धा अक्षुण्ण रहें

11. जीवन साधना के 14 स्वर्णिम सूत्र

12. विज्ञान का अधूरापन दूर किया जाय

13. जितने सितारे उतने रहस्य

14. अतीत के समृद्ध ज्ञान की उपेक्षा न करे

15. आस्थाएँ विकृत होने से रोग-शोक बढ़ते हैं

16. विवेक रहित बुद्धि से काम नहीं चलेगा

17. पराज्ञान का कुछ अर्थ भी निकालें

18. अपने पैरों आप कुल्हाड़ी न मारे

19. सिर दर्द का सिर दर्द

20. एकाग्रता के सम्पादन के लिए त्रिविध योग साधन

21. रोग निवारण में अग्निहोत्र का उपयोग

22. सनातन धर्म और उसका आधार

अखण्ड ज्योति अप्रेल 1978

1. वरदानी शक्ति का देवता-सुदृढ़ संकल्प

2. मानव जीवन की नौ क्षुद्रताएँ

3. धर्म की सत्ता और उसकी महान् महत्ता

4. उपलब्धियाँ नहीं आधार आवश्यक

5. धर्म की स्थापना ही नहीं, अधर्म की अवहेलना भी

6. प्रत्यक्ष से भी अति समर्थ अप्रत्यक्ष

7. समर्थ सत्ता को खोजें, पत्तों में न भटकें

8. कर्म और अकर्म का रहस्य

9. आत्मिक प्रगति के लिए तप-तितिक्षा की आवश्यकता

10. आत्मचेतना विराट् की प्रतिनिधि

11. हृदय किसी ओर के लिए नहीं

12. उत्कृष्टता सम्पन्न दिव्य जीवन जियें

13. सफलता बनाम आत्मविश्वास

14. मन्त्र शक्ति के चमत्कारी सत्परिणाम

15. हम सच्चे अर्थों में सुसंस्कृत बने

16. सम्वेदना शून्य न हो जाये

17. खबरदार सागर को छेड़ने की भूल न करे

18. ये पदचिन्ह हमने बनाये है

19. विषाद मनोरोग और उससे छुटकारा

20. पेट के साथ तो अत्याचार न करें

21. पैदल चलने का इलाज

22. समता के सिद्धान्त का प्रतिपालन

23. अपनो से अपनी बात

24. त्रिविध निर्माण के संकल्प उभरें

25. युग गायकों की अभिनव शिक्षण व्यवस्था

26. कुछ आवश्यक ज्ञातव्य

27. बाधाओं का अनुदान-कविता


अखण्ड ज्योति मार्च 1978

1. तेरा विश्वास शक्ति बने, याचना नहीं

2. दिवमारूहत तपसा तपस्वी

3. समर्थ सत्ता को देंखे, सुने, प्राप्त करें

4. विनम्रता की विजय

5. ईश्वर दर्शन इस प्रकार होता है

6. आत्मा पथिक-शरीर सरायें

7. जीवन संग्राम विशुद्ध धर्मयुद्ध है

8. हमारा मस्तिष्क भानुमति का पिटारा

9. व्यक्ति की उत्कृष्टता ही सर्वोपरि

10. पाप न करें, पौधे बात खोल देंगे

11. महाभिक्षु पराभूतो

12. वृक्षारोपण का पुण्य फल

13. दूरदर्शिता अपनाने में ही कल्याण

14. अथ भारण्ड वार्ता

15. ज्ञान किसका सार्थक आज का या पूर्वजों का

16. स्वाध्याय-महापुरूष ढालने का स्टील प्लान्ट

17. ऐसी धरती की कल्पना कीजिए

18. प्रकृति पाठशाला में कला संकाय

19. आदर्शवादिता साहसिकता का उपयुक्त अवसर

20. प्रगति की दिशा में बढ़ते हुए हमारे नये चरण

21. व्यक्तित्व को परिष्कृत कर सकने वाला वातावरण

22. दस दिवसीय साधना सत्र तीर्थ निवास

23. नारी-जागरण की भाव भरी शिक्षण प्रक्रिया

24. ब्रह्मवर्चस और वानप्रस्थ

25. साधना की सफलता का उपयुक्त आश्रय

26. जाग्रत आत्माओं का युग सृजन के लिए आह्वान

27. आदर्शवाद अपना कर हम घाटे में नहीं रहते

28. रे ! जीवन तत्व लुटाता चल-कविता

अखण्ड ज्योति फरवरी 1978

1. अध्यात्म का एकांगी पक्ष अहितकर

2. आत्म-निर्माण से ही आत्म-कल्याण सम्भव

3. क्या ईश्वर सचमुच ही मर गया

4. दिव्य शक्तियाँ भी मनुष्य के हस्तगत होगी

5. मानवी आस्था आस्तिकता पर निर्भर हैं

6. ज्ञान की सार्थकता श्रद्धा में है

7. अन्तःकरण में प्रेम सम्वेदना उभरें

8. संगठन तो बने पर सज्जनो के ही

9. विश्व ज्ञान कोष मस्तिष्क

10. व्यक्तित्व की प्रोढ़ता और प्रखरता

11. मन्त्र विद्या की अकूत शक्ति

12. दृष्टिकोण और जीवनक्रम में सन्तुलन का समन्वय

13. नियामक सत्ता से सम्बद्ध न रहे तो ?

14. समता और एकता अपनायें

15. जीवन का माधुर्य सहकारिता में है

16. अपनी उपयोगिता बढ़ाने में संलग्न रहे

17. हम ब्रह्माण्ड में अकेले हैं क्या ?

18. शरीर के साथ मित्रवत् व्यवहार करें

19. बुढ़ापे का भी अपना आनन्द है

20. मानसिक तनाव से बचा जा सकता है

21. बसन्त पर्व पर नये गायत्री नगर का शिलान्यास

22. अपनो से अपनी बात

23. मानस मंथन करो

अखण्ड ज्योति जनवरी 1978

1. जीवन, ईश्वर का स्वरूप एवं वरदान

2. भक्ति का मार्ग और प्रेमयोग

3. बन्धन मुक्ति-ईश्वर प्राप्ति

4. मानवी विद्युत इस जगत की प्रचण्डतम ऊर्जा

5. बीस अरब पृष्ठों की पुस्तक

6. अन्तःकरण चतुष्टय और साधना विज्ञान

7. ध्यान साधना की प्रचण्ड सामर्थ्य

8. ज्ञान ही नहीं मनुष्य को धर्म भी चाहिए

9. हँसती-हँसाती हल्की फुल्की जिन्दगी जियें

10. ऊँट के नीचे पहाड़

11. उधर जाइये मत, खतरा है

12. धर्म अफीम की गोली नहीं है

13. पारिवारिक जीवन में निष्ठा और भावनाएँ जमी रहें

14. हम विराट विश्वात्मा के एक घटक मात्र हैं

15. सादगी अपनायें, शालीनता बरतें

16. एकांगी प्रगति-कानी, कुबड़ी, लंगड़ी, लूली

17. हमारी कमाई में पिछड़ों का भी हिस्सा है !

18. प्रगति का एकमेव आधार-प्रतिभा, सहकार

19. जैसा खाये अन्न-वैसा बने मन

20. भविष्यवाणियों में सार्थक दिशाबोध

21. संकटो से छुटकारा विवेक ही दिला सकेगा

22. ।।अथ श्री माल्थस सिद्धान्त प्रारभ्यते।।

23. मानसिक रोगों का प्रेमोपचार

24. महामानव के पक्षधर बने या अतिमानव के

25. अपनो से अपनी बात

अखण्ड ज्योति दिसम्बर 1977

1. बुद्धिमान किन्तु अनाड़ी चैकीदार

2. आनन्द अपनी ही मुट्ठी में भरा पड़ा हैं

3. ईश्वर है या नहीं, यदि है तो कैसा ?

4. आध्यात्मिक जीवन के पाँच पक्ष

5. विज्ञान और वेदान्त एक ही निष्कर्ष पर पहुँच रहे है

6. परिस्थितियाँ हम स्वयं ही बनाते है

7. अन्तरिक्ष की अनन्त गहराइयों में झाँकता मानवीय प्रतिबिम्ब

8. जीवन श्रद्धा और शालीनता से युक्त जियें

9. स्वर्गीय वातावरण सृजनात्मक प्रयत्नों से बनेगा

10. मरणोत्तर जीवन एक सचाई

11. हमारी मृत्यु कभी हो ही नहीं सकती

12. मनुष्य की क्या प्रकृति की प्रत्येक रचना परिपूर्ण है

13. आदमी को आदमी बनना होगा

14. स्मरण शक्ति की कमी कारण और निवारण

15. युग की समस्यायें और उनका समाधान

16. दवा से रोग दबते भर हैं जाते नहीं

17. जो वर्तमान में जीता हैं वही जीवित हैं

18. स्वर्णिम युग का सूत्रपात भविष्यवक्ताओं के उदोहात

19. सन्तोष की सांस लें, आशावान रहें

20. सात शक्ति धाराओं का प्रज्वलन-सप्तचक्र साधन

21. प्रेमी पाठकों को एक अभिनव हर्ष समाचार

22. अपनो से अपनी बात

23. सन् 87 में शान्तिकुंज के सत्र प्रशिक्षण

24. अखण्ड ज्योति सदस्यों को अति आवश्यक सूचनायें

25. मानव और देवता-कविता

अखण्ड ज्योति नवम्बर 1977

1. अभीष्ट को अन्तरंग में खोजें

2. चरित्र निष्ठा सर्वोपरि संजीवनी

3. भगवान् मनुष्य की अन्तरात्मा में ओत-प्रोत हैं

4. अन्तर्जगत के सन्देशवाहक-पूर्वाभास

5. प्रतिकूलताओं और अभावों की उपयोगिता हैं

6. भाग रे भाग, शरीर में आग

7. आत्म-समर्पण की साधना और उसका प्रतिफल

8. हार आखिर आदमी की हुई

9. श्रद्धा व्यक्तित्व के परिष्कार का एकमात्र अवलम्बन

10. विज्ञान और अध्यात्म का समन्वय निश्चित

11. शील और शालीनता का महत्व घटने न दे

12. साधना से सिद्धि का कारण और दर्शन !

13. शब्द ब्रह्म की साधना वाक् शक्ति से

14. विकृत चिन्तन का दुर्भाग्यपूर्ण अभिशाप

15. दिव्य केन्द्र-सहस्त्रार एवं ब्रह्मरंध्र

16. प्राणाग्नि का उद्धीपन कुण्डलिनी जागरण के लिए

17. तीर्थ यात्रा हमारी महान् धर्म परम्परा

18. साहस करें, आगे बढ़ें

19. हम प्रकाश के पुत्र-कविता

अखण्ड ज्योति अक्टूबर 1977

1. उपार्जन का सदुपयोग भी

2. सुखी जीवन का एकमात्र आधार धर्म

3. पूर्ण से पूर्ण ही उत्पन्न हुआ

4. अतीन्द्रिय शक्ति और उसकी पृष्ठभूमि

5. स्थूल शरीर की सूक्ष्म साधना

6. आत्मिक प्रगति के लिए कल्मषों का परिशोधन

7. प्रेतात्माओं का अस्तित्व विज्ञान की कसौटी पर

8. आत्मिक प्रगति के तीन अवरोध

9. शक्तियों का दुरूपयोग रोका जाय

10. साधु ब्राह्मण की परम्परा पुनर्जीवित की जाय

11. यश और धन तब भयंकर दैत्य बन जाते है

12. शब्द ब्रह्म की साधना के दो चरण

13. जीवन का लक्ष्य, स्वरूप और उद्देश्य

14. ध्यान-योग द्वारा आत्म-बल का सम्वर्द्धन

15. हम अपना देवत्व विकसित कर सकते हैं

16. विकृत चिन्तन से शरीर और मन की अपार क्षति

17. तीर्थ यात्रा उच्च स्तरीय पुण्य परमार्थ

18. मुस्कान, वैज्ञानिक क्या कहते हैं ?

19. कन्द कुण्ड की ज्योति-ज्वाला कुण्डलिनी

20. अपनो से अपनी बात

21. सच्ची उपासना-कविता

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