मंगलवार, 25 जनवरी 2011

जन गण मन

जन गण मन अधिनायक जय हे
भारत भाग्य विधाता
पंजाब सिन्ध गुजरात मराठा
द्राविड़ उत्कल बंग
विन्ध्य हिमाचल यमुना गंगा
उच्छल जलधि तरंग
तव शुभ नामे जागे
तव शुभ आशिष मागे
गाहे तव जय गाथा
जन गण मंगल दायक जय हे
भारत भाग्य विधाता
जय हे जय हे जय हे
जय जय जय जय हे

राष्ट्रगान के बाद वाले पद

अहरह तव आव्हान प्रचारित,
सूनि तव उदार बाणी,
हिन्दू बौद्ध सिख जैन,
पारसिक मुसलमान ख्रिस्तानी,
पूरब- पश्चिम आशे,
तव सिंहासन पाशे,
प्रेमहार यश गाथा,
जन- गण-ऐक्य-विधायक,
जय हे भारत- भाग्य-विधाता,
जय हे, जय हे, जय हे,
जय जय जय जय हे
पतन-अभ्युदय-वन्धुर-पंथा,
युगयुग धावित यात्री,
हे चिर-सारथी,
तव रथ चक्रेमुखरित पथ दिन-रात्रि
दारुण विप्लव-माझे
तव शंखध्वनि बाजे,
संकट-दुख-श्राता,
जन-गण-पथ-परिचायक जय हे
भारत-भाग्य-विधाता,
जय हे, जय हे, जय हे,
जय जय जय जय हे

घोर-तिमिर-घन-निविङ-निशीथ
पीङित मुर्च्छित-देशे
जाग्रत दिल तव अविचल मंगल
नत नत-नयने अनिमेष
दुस्वप्ने आतंके
रक्षा करिजे अंके
स्नेहमयी तुमि माता,
जन-गण-दुखत्रायक जय हे
भारत-भाग्य-विधाता,
जय हे, जय हे, जय हे,
जय जय जय जय हे

रात्रि प्रभातिल उदिल रविच्छवि
पूरब-उदय-गिरि-भाले, साहे विहन्गम, पूएय समीरण
नव-जीवन-रस ढाले,
तव करुणारुण-रागे
निद्रित भारत जागे
तव चरणे नत माथा,
जय जय जय हे, जय राजेश्वर,
भारत-भाग्य-विधाता,
जय हे, जय हे, जय हे,
जय जय जय जय हे

गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर

चन्दन है इस देश की माटी

चन्दन है इस देश की माटी,
तपोभूमि हर ग्राम है ।
हर बाला देवी की प्रतिमा,
बच्चा-बच्चा राम है ॥

हर शरीर मन्दिर सा पावन,
हर मानव उपकारी है ।
जहाँ सिंह बन गये खिलौने,
गाय जहाँ मा प्यारी है ।
जहाँ सवेरा शंख बजाता,
लोरी गाती शाम है ।
हर बाला देवी की प्रतिमा,
बच्चा-बच्चा राम है ॥

जहाँ कर्म से भाग्य बदलते,
श्रम निष्ठा कल्याणी है ।
त्याग और तप की गाथाएँ,
गाती कवि की वाणी है ॥
ज्ञान जहाँ का गंगा जल सा,
निर्मल है अविराम है ।
हर बाला देवी की प्रतिमा,
बच्चा-बच्चा राम है ॥

इसके सैनिक समर भूमि में,
गाया करते गीता हैं ।
जहाँ खेत में हल के नीचे,
खेला करती सीता हैं ।
जीवन का आदर्श यहाँ पर,
परमेश्वर का धाम है ।
हर बाला देवी की प्रतिमा,
बच्चा-बच्चा राम है ॥

चन्दन है इस देश की माटी,
तपोभूमि हर ग्राम है ।
हर बाला देवी की प्रतिमा,
बच्चा-बच्चा राम है ॥

स्व. श्री चंद्रकांत भारद्वाज 'ध्रुव'

आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं

आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं झाँकी हिंदुस्तान की
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की
वंदे मातरम ...

उत्तर में रखवाली करता पर्वतराज विराट है
दक्षिण में चरणों को धोता सागर का सम्राट है
जमुना जी के तट को देखो गंगा का ये घाट है
बाट-बाट पे हाट-हाट में यहाँ निराला ठाठ है
देखो ये तस्वीरें अपने गौरव की अभिमान की,
इस मिट्टी से ...

ये है अपना राजपूताना नाज़ इसे तलवारों पे
इसने सारा जीवन काटा बरछी तीर कटारों पे
ये प्रताप का वतन पला है आज़ादी के नारों पे
कूद पड़ी थी यहाँ हज़ारों पद्‍मिनियाँ अंगारों पे
बोल रही है कण कण से कुरबानी राजस्थान की
इस मिट्टी से ...

देखो मुल्क मराठों का ये यहाँ शिवाजी डोला था
मुग़लों की ताकत को जिसने तलवारों पे तोला था
हर पावत पे आग लगी थी हर पत्थर एक शोला था
बोली हर-हर महादेव की बच्चा-बच्चा बोला था
यहाँ शिवाजी ने रखी थी लाज हमारी शान की
इस मिट्टी से ...

जलियाँ वाला बाग ये देखो यहाँ चली थी गोलियाँ
ये मत पूछो किसने खेली यहाँ खून की होलियाँ
एक तरफ़ बंदूकें दन दन एक तरफ़ थी टोलियाँ
मरनेवाले बोल रहे थे इनक़लाब की बोलियाँ
यहाँ लगा दी बहनों ने भी बाजी अपनी जान की
इस मिट्टी से ...

ये देखो बंगाल यहाँ का हर चप्पा हरियाला है
यहाँ का बच्चा-बच्चा अपने देश पे मरनेवाला है
ढाला है इसको बिजली ने भूचालों ने पाला है
मुट्ठी में तूफ़ान बंधा है और प्राण में ज्वाला है
जन्मभूमि है यही हमारे वीर सुभाष महान की
इस मिट्टी से ..

छोड़ो कल की बातें

छोड़ो कल की बातें कल की बात पुरानी
नये दौर में लिखेंगे मिलकर नई कहानी
हम हिन्दुस्तानी, हम हिन्दुस्तानी ...

आज पुरानी ज़ंजीरों को तोड़ चुके हैं
क्या देखें उस मंजिल को जो छोड़ चुके हैं
चाँद के दर पे जा पहुंचा है आज ज़माना
नये जगत से हम भी नाता जोड़ चुके हैं
नया खून है, नयी उमंगें, अब है नयी जवानी
हम हिन्दुस्तानी, हम हिन्दुस्तानी ...

हमको कितने ताजमहल हैं और बनाने
कितने हैं अजंता हम को और सजाने
अभी पलटना है रुख कितने दरियाओं का
कितने पवर्त राहों से हैं आज हटाने
नया खून है, नयी उमंगें, अब है नयी जवानी
हम हिन्दुस्तानी, हम हिन्दुस्तानी ...

आओ मेहनत को अपना ईमान बनाएं
अपने हाथों को अपना भगवान बनाएं
राम की इस धरती को गौतम की भूमी को
सपनों से भी प्यारा हिंदुस्तान बनाएं
नया खून है, नयी उमंगें, अब है नयी जवानी
हम हिन्दुस्तानी, हम हिन्दुस्तानी ...

हर ज़र्रा है मोती आँख उठाकर देखो
माटी में सोना है हाथ बढ़ाकर देखो
सोने की ये गंगा है चांदी की यमुना
चाहो तो पत्थर पे धान उगाकर देखो
नया खून है, नयी उमंगें, अब है नयी जवानी
हम हिन्दुस्तानी, हम हिन्दुस्तानी ...
रचनाकार: प्रेम धवन 

अब तुम्हारे हवाले है वतन

कर चले हम फ़िदा, जान-ओ-तन साथीयों
अब तुम्हारे हवाले वतन साथीयों ...

सांस थमती गई, नब्ज जमती गई,
फिर भी बढ़ते कदम को ना रुकने दिया
कट गये सर हमारे तो कुछ ग़म नहीं
सर हिमालय का हमने न झुकने दिया
मरते मरते रहा बाँकपन साथीयों
अब तुम्हारे हवाले वतन साथीयों ...

जिन्दा रहने के मौसम बहुत हैं मगर
जान देने की रुत रोज आती नहीं
हुस्न और इश्क दोनो को रुसवा करे
वो जवानी जो खूँ में नहाती नहीं
बाँध लो अपने सर पर कफ़न साथीयों
अब तुम्हारे हवाले वतन साथीयों ...

राह कुर्बानियों की ना वीरान हो
तुम सजाते ही रहना नये काफ़िले
फ़तह का जश्न इस जश्न के बाद है
जिन्दगी मौत से मिल रही है गले
आज धरती बनी है दुल्हन साथीयों
अब तुम्हारे हवाले वतन साथीयों ...

खेंच दो अपने खूँ से जमीं पर लकीर
इस तरफ आने पाये ना रावण कोई
तोड़ दो हाथ अगर हाथ उठने लगे
छूने पाये ना सीता का दामन कोई
राम भी तुम तुम्हीं लक्ष्मण साथीयों
अब तुम्हारे हवाले वतन साथीयों ...
रचनाकार: कैफी आज़मी 

जहाँ डाल डाल पर सोने

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु
गुरुदेव महेश्वरा
गुरु साक्षात परब्रह्म
तत्समये श्री गुरुवे नम:

जहाँ डाल डाल पर सोने की चिड़ियाँ करती है बसेरा
वो भारत देश है मेरा।

जहाँ सत्य अहिंसा और धर्म का पग-पग लगता डेरा
वो भारत देश है मेरा।

ये धरती वो जहाँ ॠषि मुनि जपते प्रभु नाम की माला
जहाँ हर बालक एक मोहन है और राधा हर एक बाला
जहाँ सूरज सबसे पहले आ कर डाले अपना फेरा
वो भारत देश है मेरा।

अलबेलों की इस धरती के त्योहार भी हैं अलबेले
कहीं दीवाली की जगमग है कहीं हैं होली के मेले
जहाँ राग रंग और हँसी खुशी का चारों ओर है घेरा
वो भारत देश है मेरा।

जहाँ आसमान से बातें करते मंदिर और शिवाले
जहाँ किसी नगर में किसी द्वार पर कोई न ताला डाले
प्रेम की बंसी जहाँ बजाता है ये शाम सवेरा
वो भारत देश है मेरा।
रचनाकार: राजिन्दर कृष्ण

सरफरोशी की तमन्ना

सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,
देखना है जोर कितना बाजू-ए-कातिल में है ।

करता नहीं क्यों दूसरा कुछ बातचीत,
देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफिल मैं है ।

यों खड़ा मक़्तल में कातिल कह रहा है बार-बार
क्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसी के दिल में है ।

ऐ शहीदे-मुल्को-मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार
अब तेरी हिम्मत का चर्चा ग़ैर की महफिल में है ।

वक्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आसमां,
हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है ।

खींच कर लाई है सब को कत्ल होने की उम्मीद,
आशिकों का आज जमघट कूचा-ऐ-कातिल में है ।

सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,
देखना है जोर कितना बाजू-ए-कातिल में है ।
रचनाकार: बिस्मिल अज़ीमाबादी 

नन्हा मुन्ना राही हूँ


नन्हा मुन्ना राही हूँ, देश का सिपाही हूँ
बोलो मेरे संग, जय हिन्द, जय हिन्द, जय हिन्द

रस्ते पे चलूंगा न डर-डर के
चाहे मुझे जीना पड़े मर-मर के
मंज़िल से पहले ना लूंगा कहीं दम
आगे ही आगे बढाऊँगा कदम
दाहिने बाएं दाहिने बाएं, थम!
नन्हा मुन्ना राही हूँ...

धूप में पसीना बहाऊँगा जहाँ
हरे-भरे खेत लहराएगें वहाँ
धरती पे फाके न पाएगें जन्म
आगे ही आगे ...

नया है ज़माना मेरी नई है डगर
देश को बनाऊँगा मशीनों का नगर
भारत किसी से न रहेगा कम
आगे ही आगे ...

बड़ा हो के देश का सितारा बनूंगा
दुनिया की आँखो का तारा बनूंगा
रखूँगा ऊँचा तिरंगा हरदम
आगे ही आगे ...

शांति की नगरी है मेरा ये वतन
सबको सिखाऊँगा प्यार का चलन
दुनिया मे गिरने न दूँगा कहीं बम
आगे ही आगे ...
रचनाकार: शकील बदायूनी 

ऐ वतन ऐ वतन

तू ना रोना, कि तू है भगत सिंह की माँ
मर के भी लाल तेरा मरेगा नहीं
डोली चढ़के तो लाते है दुल्हन सभी
हँसके हर कोई फाँसी चढ़ेगा नहीं

जलते भी गये कहते भी गये
आज़ादी के परवाने
जीना तो उसी का जीना है
जो मरना देश पर जाने

जब शहीदों की डोली उठे धूम से
देशवालों तुम आँसू बहाना नहीं
पर मनाओ जब आज़ाद भारत का दिन
उस घड़ी तुम हमें भूल जाना नहीं

ऐ वतन ऐ वतन हमको तेरी क़सम
तेरी राहों में जां तक लुटा जायेंगे
फूल क्या चीज़ है तेरे कदमों पे हम
भेंट अपने सरों की चढ़ा जायेंगे
ऐ वतन ऐ वतन

कोई पंजाब से, कोई महाराष्ट्र से
कोई यूपी से है, कोई बंगाल से
तेरी पूजा की थाली में लाये हैं हम
फूल हर रंग के, आज हर डाल से
नाम कुछ भी सही पर लगन एक है
जोत से जोत दिल की जगा जायेंगे
ऐ वतन ऐ वतन ...

तेरी जानिब उठी जो कहर की नज़र
उस नज़र को झुका के ही दम लेंगे हम
तेरी धरती पे है जो कदम ग़ैर का
उस कदम का निशां तक मिटा देंगे हम
जो भी दीवार आयेगी अब सामने
ठोकरों से उसे हम गिरा जायेंगे
रचनाकार: प्रेम धवन 

अपनी आज़ादी को हम

अपनी आज़ादी को हम हरगिज़ मिटा सकते नहीं
सर कटा सकते हैं लेकिन सर झुका सकते नहीं

हमने सदियों में ये आज़ादी की नेमत पाई है
सैंकड़ों कुर्बानियाँ देकर ये दौलत पाई है
मुस्कुरा कर खाई हैं सीनों पे अपने गोलियां
कितने वीरानो से गुज़रे हैं तो जन्नत पाई है
ख़ाक में हम अपनी इज्ज़त को मिला सकते नहीं
अपनी आज़ादी को हम हरगिज़ मिटा सकते नहीं...

क्या चलेगी ज़ुल्म की अहले-वफ़ा के सामने
आ नहीं सकता कोई शोला हवा के सामने
लाख फ़ौजें ले के आए अमन का दुश्मन कोई
रुक नहीं सकता हमारी एकता के सामने
हम वो पत्थर हैं जिसे दुश्मन हिला सकते नहीं
अपनी आज़ादी को हम हरगिज़ मिटा सकते नहीं...

वक़्त की आवाज़ के हम साथ चलते जाएंगे
हर क़दम पर ज़िन्दगी का रुख बदलते जाएंगे
’गर वतन में भी मिलेगा कोई गद्दारे वतन
अपनी ताकत से हम उसका सर कुचलते जाएंगे
एक धोखा खा चुके हैं और खा सकते नहीं
अपनी आज़ादी को हम हरगिज़ मिटा सकते नहीं...

हम वतन के नौजवाँ है हम से जो टकरायेगा
वो हमारी ठोकरों से ख़ाक में मिल जायेगा
वक़्त के तूफ़ान में बह जाएंगे ज़ुल्मो-सितम
आसमां पर ये तिरंगा उम्र भर लहरायेगा
जो सबक बापू ने सिखलाया भुला सकते नहीं
सर कटा सकते है लेकिन सर झुका सकते नहीं...
रचनाकार: शकील बदायूनी

नन्हे मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है

नन्हे मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है 
मुट्ठी में है तकदीर हमारी 
मुट्ठी में है तकदीर हमारी 
हमने किस्मत को बस में किया है 

भोली भाली मतवाली आँखों में क्या है 
आँखों में झूमे उम्मीदों की दिवाली 
आँखों में झूमे उम्मीदों की दिवाली 
आने वाली दुनिया का सपना सजा है 

नन्हे मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है 

भीख में जो मोती मिलेगा लोगे या न लोगे 
ज़िन्दगी के आंसुओं का बोलो क्या करोगे 

भीख में जो मोती मिले तो भी हम न लेंगे 
ज़िन्दगी के आंसुओं की माला पहनेंगे 
मुश्किलों से लड़ते फिरते जीने में मज़ा है 

नन्हे मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है ..

हमसे न छुपाओ बच्चो हमें तो बताओ 
आने वाली दुनिया कैसी होगी समझाओ 

आने वाली दुनिया में सब के सर पे ताज हो 
न भूखों की भीड़ होगी 
न दुखों का राज हो 
बदलेगा ज़माना यह सितारों पे लिखा है 

नन्हे मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है ...

ये देश है वीर जवानों का

ये देश है वीर जवानों का, अलबेलों का मस्तानों का
इस देश का यारों क्या कहना, ये देश है दुनिया का गहना

यहाँ चौड़ी छाती वीरों की, यहाँ भोली शक्लें हीरों की
यहाँ गाते हैं राँझे मस्ती में, मचती में धूमें बस्ती में

पेड़ों में बहारें झूलों की, राहों में कतारें फूलों की
यहाँ हँसता है सावन बालों में, खिलती हैं कलियाँ गालों में

कहीं दंगल शोख जवानों के, कहीं करतब तीर कमानों के
यहाँ नित नित मेले सजते हैं, नित ढोल और ताशे बजते हैं

दिलबर के लिये दिलदार हैं हम, दुश्मन के लिये तलवार हैं हम
मैदां में अगर हम डट जाएं, मुश्किल है कि पीछे हट जाएं

रचनाकार: साहिर लुधियानवी 

हम लाये हैं तूफ़ान से किश्ती निकाल के

पासे सभी उलट गए दुश्मन की चाल के
अक्षर सभी पलट गए भारत के भाल के
मंजिल पे आया मुल्क हर बला को टाल के
सदियों के बाद फिर उड़े बादल गुलाल के

हम लाये हैं तूफ़ान से किश्ती निकाल के
इस देश को रखना मेरे बच्चो संभाल के
तुम ही भविष्य हो मेरे भारत विशाल के
इस देश को रखना मेरे बच्चो संभाल के ...

देखो कहीं बरबाद न होवे ये बगीचा
इसको हृदय के खून से बापू ने है सींचा
रक्खा है ये चिराग शहीदों ने बाल के
इस देश को रखना मेरे बच्चो संभाल के
हम लाये हैं तूफ़ान से किश्ती निकाल के...

दुनिया के दांव पेंच से रखना न वास्ता
मंजिल तुम्हारी दूर है लंबा है रास्ता
भटका न दे कोई तुम्हें धोके मे डाल के
इस देश को रखना मेरे बच्चो संभाल के
हम लाये हैं तूफ़ान से किश्ती निकाल के...

एटम बमों के जोर पे ऐंठी है ये दुनिया
बारूद के इक ढेर पे बैठी है ये दुनिया
तुम हर कदम उठाना जरा देखभाल के
इस देश को रखना मेरे बच्चो संभाल के
हम लाये हैं तूफ़ान से किश्ती निकाल के...

आराम की तुम भूल भुलय्या में न भूलो
सपनों के हिंडोलों मे मगन हो के न झुलो
अब वक़्त आ गया मेरे हंसते हुए फूलो
उठो छलांग मार के आकाश को छू लो
तुम गाड़ दो गगन में तिरंगा उछाल के
इस देश को रखना मेरे बच्चो संभाल के
हम लाये हैं तूफ़ान से किश्ती निकाल के...
रचनाकार: प्रदीप 
संगीतकार : हेमंत
गायक : रफी 

इन्साफ की डगर पे

इन्साफ की डगर पे, बच्चों दिखाओ चल के
ये देश है तुम्हारा, नेता तुम्ही हो कल के

दुनिया के रंज सहना और, कुछ ना मुँह से कहना
सच्चाईयों के बल पे, आगे को बढ़ते रहना
रख दोगे एक दिन तुम, संसार को बदल के
इन्साफ की डगर पे...

अपने हों या पराए, सब के लिए हो न्याय
देखो कदम तुम्हारा, हरगिज़ ना डगमगाए
रस्ते बड़े कठिन हैं, चलना संभल-संभल के
इन्साफ की डगर पे...

इन्सानियत के सर पे, इज़्ज़त का ताज रखना
तन मन की भेंट देकर, भारत की लाज रखना
जीवन नया मिलेगा, अंतिम चिता में जल के
इन्साफ की डगर पे...
रचनाकार: शकील बदायूनी 

ऐ मेरे प्यारे वतन

ऐ मेरे प्यारे वतन, ऐ मेरे बिछड़े चमन
तुझपे दिल कुर्बान, तू ही मेरी आरज़ू
तू ही मेरी आबरू, तू ही मेरी जान

माँ का दिल बन के कभी सीने से लग जाता है तू
और कभी नन्हीं सी बेटी बन के याद आता है तू
जितना याद आता है मुझको, उतना तड़पाता है तू
तुझपे दिल कुर्बान...

तेरे दामन से जो आए उन हवाओं को सलाम
चूम लूँ मैं उस ज़ुबां को जिसपे आए तेरा नाम
सबसे प्यारी सुबह तेरी, सबसे रंगीं तेरी शाम
तुझपे दिल कुर्बान...

छोड़ कर तेरी गली को दूर आ पहुंचे हैं हम
है मगर ये ही तमन्ना तेरे ज़र्रों की कसम
जिस जगह पैदा हुए थे, उस जगह ही निकले दम
तुझपे दिल कुर्बान...

मेरे देश की धरती

मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे मोती
मेरे देश की धरती

बैलों के गले में जब घुँघरू जीवन का राग सुनाते हैं
ग़म कोस दूर हो जाता है खुशियों के कंवल मुस्काते हैं
सुन के रहट की आवाज़ें यूँ लगे कहीं शहनाई बजे
आते ही मस्त बहारों के दुल्हन की तरह हर खेत सजे

मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोती
मेरे देश की धरती

जब चलते हैं इस धरती पे हल ममता अँगड़ाइयाँ लेती है
क्यों ना पूजें इस माटी को जो जीवन का सुख देती है
इस धरती पे जिसने जन्म लिया उसने ही पाया प्यार तेरा
यहाँ अपना पराया कोई नही हैं सब पे है माँ उपकार तेरा

मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोती
मेरे देश की धरती

ये बाग़ हैं गौतम नानक का खिलते हैं अमन के फूल यहाँ
गांधी, सुभाष, टैगोर, तिलक ऐसे हैं चमन के फूल यहाँ
रंग हरा हरिसिंह नलवे से रंग लाल है लाल बहादुर से
रंग बना बसंती भगतसिंह से रंग अमन का वीर जवाहर से

मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोती
मेरे देश की धरती

नफ़रत की लाठी तोड़ो, लालच का खंजर फेंको


नफ़रत की लाठी तोड़ो, लालच का खंजर फेंको
ज़िद के पीछे मत दौड़ो,  तुम प्रेम के पंछी हो
देश प्रेमियों, आपस में प्रेम करो देश प्रेमियों ...

देखो, ये धरती, हम सब की माता है
सोचो, आपस में, क्या अपना नाता है
हम आपस में लड़ बैठे,
हम आपस में लड़ बैठे तो देश को कौन सम्भालेगा
कोई बाहर वाला अपने घर से हमें निकालेगा
दीवानों होश करो, मेरे देश प्रेमियों ...

मीठे, पानी में, ये ज़हर न तुम घोलो
जब भी, कुछ बोलो, ये सोच के तुम बोलो
भर जाता है गहरा घाव जो बनता है गोली से
पर वो घाव नहीं भरता जो बना हो कड़वी बोली से
तो मीठे बोल कहो, मेरे देश प्रेमियों ...

तोड़ो, दीवारें, ये चार दिशाओं की
रोको, मत राहें इन, मस्त हवाओं की
पूरब पश्चिम उत्तर दक्खिन वालों मेरा मतलब है
इस माटी से पूछो क्या भाषा क्या इसका मज़हब है
फिर मुझसे बात करो, मेरे देश प्रेमियों ...
आप भी हमारे सहयोगी बने।

होंठों पे सच्चाई रहती है


(होठों पे सच्चाई रहती है 
जहाँ दिल में सफ़ाई रहती है
हम उस देश के वासी हैं, हम उस देश के वासी हैं
जिस देश में गंगा बहती है ) \- २

(मेहमां जो हमारा होता है
वो जान से प्यारा होता है ) \- २
ज़्यादा की नहीं लालच हमको 
थोड़े मे गुज़ारा होता है \- २
बच्चों के लिये जो धरती माँ 
सदियों से सभी कुछ सहती है
हम उस देश के वासी हैं, हम उस देश के वासी हैं
जिस देश में गंगा बहती है

(कुछ लोग जो ज़्यादा जानते हैं 
इन्सान को कम पहचानते हैं ) \- २
ये पूरब है पूरबवाले 
हर जान की कीमत जानते हैं \- २
मिल जुल के रहो और प्यार करो 
एक चीज़ यही जो रहती है
हम उस देश के वासी हैं, हम उस देश के वासी हैं
जिस देश में गंगा बहती है

(जो जिससे मिला सिखा हमने 
गैरों को भी अपनाया हमने ) \- २
मतलब के लिये अन्धे होकर 
रोटी को नही पूजा हमने \- २
अब हम तो क्या सारी दुनिया 
सारी दुनिया से कहती है
हम उस देश के वासी हैं, हम उस देश के वासी हैं
जिस देश में गंगा बहती है

होठों पे सच्चाई रहती है 
जहां दिल में सफ़ाई रहती है
हम उस देश के वासी हैं, हम उस देश के वासी हैं
जिस देश में गंगा बहती है

सोमवार, 24 जनवरी 2011

अपनों से अपनी बात

मेरे प्रिय साथियों,
वन्दे वेदमातरम्।

आपको यह जानकर प्रसन्नता होगी कि "जनमानस परिष्कार मंच" द्वारा एक ऐसा राष्ट्रव्यापी स्वयं सेवकों का मंच तैयार किया जा रहा हैं जो जरूरतमन्द नागरिकों तक जरूरत के समय सहायता पहुँचाने के लिए यथा सम्भव प्रयास करने के इच्छुक हो।

हम सब मिलकर जनकल्याण में कैसे सहयोगी बनें। 
1. मदद देने तथा लेने वालों को मिलाने का मंच।
2. 24/365 निःशुल्क सहायता प्राप्त करने का मंच।
3. सकारात्मक सोच को विकसित करने का मंच।
4. विभिन्न समाज सेवी संस्थाओं को जुड़ने-जोड़ने का मंच।
5. दान नहीं, केवल आइडिया। 


विपत्ति और आपत्ति में सहयोग करने वाला यह मानव सेवा मंच है।

यह एक राष्ट्रव्यापी योजना हैं। इस योजना के सफल क्रियान्वयन से पूरे देश में ऐसे स्वयं सेवकों का नेटवर्क तैयार हो जाएगा जिससे देश के किसी भी स्थान पर उस क्षेत्र के स्वयंसेवकों द्वारा आपात कालीन सहायता व सहयोग  सम्पादित किया जा सकेगा। सही अर्थों में यह मानव सेवा का पुनीत मार्ग हैं

आप जिस किसी भी क्षेत्र में अपनी सेवा देने के इच्छुक हो, तो कृपया अपना पंजीकरण  कराएँ। 

1. नाम
2. पता
3. दूरभाष नम्बर
4. आप किस स्थान पर सेवा दे सकेंगे
5. आप किस क्षेत्र में सेवा दे सकेंगे
6. अन्य विवरण

इस योजना से आप स्वयं तथा आपके परिजन इस सेवा का लाभ देश के किसी भी क्षेत्र में प्राप्त कर सकेंगे

इस कार्य योजना को सम्पादित करने के लिए एक वेबसाइट http://www.dobeforedie.org  का निर्माण किया जा रहा हैं। सभी सम्पर्क सूत्रों को को इस साइट पर सबके लिए प्रदर्शित किया जाएगा।

आप सभी से विनम्र आग्रह हैं कि इस अभिनव योजना से जुड़कर मानवता की सेवा में अपना अमूल्य योगदान दें।

आपके अनमोल सुझाव आमंत्रित है |

अधिक जानकारी के लिए सम्पर्क करें। 

राजेश माहेश्वरी, सूरत (गुजरात)
rajesh@dobeforedie.org
http://www.dobeforedie.org 
09377966600



राजेन्द्र माहेश्वरी, आगूँचा (राजस्थान) 
vedmatram@gmail.com
09929827894

रविवार, 23 जनवरी 2011

Think GREEN

1- "2 GET" & "2 GIVE" Creates 2 Many PROBLEMS But Just DOUBLE IT "4 GET & 4 GIVE" Solves all d PROBLEMS. Live wid a Simple Attitude.
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2- When It Rains AlL Birds Fly 4 Shelter. But EAGLE Avoids D Rain By Flying Above D Clouds. Problem Is Common to AlL But Attitude Makes D Difference.
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3- Some 1 is sitting in d shade today bcoz some 1 planted a tree long time ago. 
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4- Rakt-Dan kare, Gujarish h Hamari.
Khush rahe aap, Ye Dua h hamari. 
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5- Solve ur simple mistakes Early Before it leads to Big problems..
Bcoz V always Slip from Small Stones & not from Mountain
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6- Smile is the lighting system of face, cooling system of head, beating system of heart.! So keep smiling. 
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7- Sometime v fail to undrstand d feelings of very close people in our life Bcoz a book held very nearer to eyes is very difficult to Read! 
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8- "Pyaar DiL Me Hona Chahiye Lafzo Me Nhi Or Narazgi Lafzo Me Honi Chahiye DiL Me Nhi" 
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9- Sab Kehte He ki OPEN Or CLOSE Oposite words He Infact Ap Sbse Zyada Usi Person K Samne OPEN Rahoge jiske Ap sbse zyada CLOSE ho, That's True. 
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10- We live in unexplainable world.. Where Poor People walk Miles & Miles to Earn Food. Rich People walk Miles & Miles to Digest Food." 
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11- "The poorest man on earth is not the one without money, But is the one without a dream.
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12- "D most active person in d world one who invented alarm." "D most lazy person in d world one who invented snooze in alarm." 
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13- "REALITY OF LIFE" 
Everything is valuable only before getting it.. and after loosing it.. 
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14- "Bhgwan"se kabhi kuch mat mango. 
"Bhgwan"wo nahi deta jo Aapko acha lagta hai. balki "Bhgwan"wo deta hai jo Aapke liye acha hai
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15- Seediyan unke liye bani hain jinhe chatt per jana hai..Aasman par ho jinki nazar unhe to rasta khud bnana hai
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16- " Everyday Starts With Some Expectation..."
But, " Everyday Ends With Some Experience"
This is life so live it as u like! 
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17- Every birth tells us that GOD loves the world. But every death reminds us that GOD still rules the world...!! 
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18- Man in God's shop-
Lord what do u sell ?
GOD- whatever ur heart desires.
Man- I want money, fame, n power"
God smiled "sorry I sell seeds not fruits
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19- Jo hatho se kam kare - majdur, jo hatho aur dimag se kam kare - Karigar, aur jo hath dimag aur dil se kam kare – kalakar
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20- 2 tarah se cheeje choti nazar aati h-
Ek DUR se or dusre GURUR se. Soch ko badko, Think GREEN
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21- Suvidhao me sukh kaha ? Shanti me he sukh h
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22- Yadi aap jiwan me khushiya prapt karna chahte ho to -
jiwan ko sadgi purwak jeene ki koshish kare. aapne suna he h- sada jiwan-ucch vichar
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23- "Worying doesn't reduce yestrday's sorows, Bt It empties 2day's strength."So don't evr wory. AlwayZ B Hapy N Kep Smiling 
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24- "Try to learn something abt everything and everything abt something".
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