रविवार, 5 जून 2011

अखण्ड ज्योति मई 1972

1. सत्य, तप और वैराग्य का समन्वय

2. गुरूदेव का भावी क्रियाकलाप, जो उनने बताया

3. ‘उपासना’ की सफलता ‘साधना’ पर निर्भर हैं

4. प्रगति और सफलता के लिए समर्थ सहयोग की आवश्यकता

5. ‘प्रशिक्षण’ क्रम की समाप्ति-‘प्रत्यावर्तन’ का आरम्भ

6. बड़प्पन की नहीं, महानता की आकांक्षा करें

7. अपने को पहिचाने, आत्मबल सम्पादित करें

8. समाज एवं राष्ट्र का विकास, लोक मानस के परिष्कार पर अवलम्बित

9. नवयुग का अवतरण सुनिश्चित और सन्निकट

10. सूर्योदय हो चुका अब प्रकाश फैलना बाकी हैं

11. आत्मोत्कर्ष के लिए उपासना की अनिवार्य आवश्यकता

12. मनोभूमि के परिष्कृत करने के लिए यह साधन क्रम अपनाये

13. परिजनो से गुरूदेव की आशा और अपेक्षा

14. भावी लोकनायकों के लिए तीन मास का प्रशिक्षण

15. लोक शिक्षण का एक सरल किन्तु अति प्रभावी आधार

16. राजनीति से बढ़कर समाज सेवा की दिशा

17. शाखा संगठनों का उत्साह एवं प्रयत्न शिथिन न होने पायें

18. शान्तिकुंज अन्ततः शक्ति केन्द्र के रूप में परिणत होगा

19. परिजन अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करे

अखण्ड ज्योति अप्रेल 1972

1. सत्य रूपी नारायण की साधना और उपलब्धि

2. सेवा से ऊब क्यों ? उससे अरूचि किसलिए ?

3. परमेश्वर के अजस्र अनुदान को देखें और समझें

4. रहस्यमयी आत्मविद्या के अन्वेषण की आवश्यकता

5. अणुशक्ति से अधिक सामर्थ्यवान आत्मशक्ति

6. मरण सृजन का अभिनव पर्व

7. जीवन की रिक्तता प्रेम प्रवृत्ति से ही भरेगी

8. सूक्ष्य जगत् की प्रत्यक्षीकरण अतीन्द्रिय ज्ञान से

9. हमारा जीवन असीम पर निर्भर हैं

10. दिव्य दृष्टि का संचार स्रोत-तृतीय नेत्र आज्ञाचक्र

11. आत्म बोध-आन्तरिक कायाकल्प-प्रत्यक्ष स्पर्श

12. जीवन और मरणोत्तर जीवन का तारतम्य

13. जो जिएं, वह जीने की कला भी सीखें

14. भावना और शालीनता अन्य प्राणियों में भी हैं

15. आत्मा, महात्मा और परमात्मा का विकास क्रम

16. अन्य लोक वासियों का पृथ्वी से सम्पर्क

17. शक्ति की कमी सूर्य पूरी करेगा

18. कर्मफल और स्वर्ग नरक की स्वसंचालित प्रक्रिया

19. हृदय आरोपण या हृदय परिवर्तन

20. आकाश गमन और जल गमन की सिद्धियाँ

21. मन को रोकें नहीं-दिशा दें

22. प्रायश्चित द्वारा आन्तरिक मलीनता का परिशोध

23. कुण्डलिनी के दो आग्नेय शक्ति तत्व

24. देव, दानव या मानव कुछ भी बना जा सकता हैं

25. अपनों से अपनी बात

अखण्ड ज्योति मार्च 1972

1. संकीर्णता के सीमा बंधन से छुटकारा पाये

2. ललचा मत-आगे बढ़

3. क्या मैं शरीर ही हूँ-उससे भिन्न नहीं ?

4. प्रेम में न शिकायत की गुंजायश हैं, न असफलता की

5. मानवी काया काँच की नहीं, अष्ट धातु से बनी हैं

6. युग परिवर्तन को असंभव न माना जाय

7. पंचशील

8. अनास्था हमें प्रेत-पिशाच बना देगी

9. शारीरिक विद्युत और उसका अद्भुत उपयोग

10. हरितिमा और सूर्य किरणों में जीवन तत्व

11. भूतकालीन प्रतिपादनों के लिए दुराग्रह न करे

12. समाज का ऋ़ण चुकाना ही श्रेयस्कर

13. मृतात्माओं का सम्पर्क सान्निध्य-एक तथ्य

14. श्रवण शक्ति की दिव्य क्षमता और उसका विकास

15. अपने दोषों को स्वीकारें और सुधारे

16. चुम्बकत्व व्यक्ति और विश्व का आधार

17. हम अन्य प्राणियों को भी बौद्धिक उत्कर्ष में सहयोग प्रदान करे

18. श्री रामकृष्ण परमहंस की सारगर्भित शिक्षायें

19. शिक्षा ही नहीं ‘विद्या’ भी परिष्कृत की जाय

20. साधुवेश की मर्यादा

21. हवा में महल और आधी रात में सूर्य

22. तितीक्षा ही हमें सुदृढ़ बनाती हैं

23. कुण्डलिनी-दो शक्तिशाली धु्रव केन्द्रो की अधिष्ठात्री

24. अपनो से अपनी बात

25. अखण्ड जप और कन्यायें

अखण्ड ज्योति फरवरी 1972

1. कर्म साधना की अनिवार्यता

2. धर्म एव सनातनो

3. प्रेम का प्रयोग केवल उच्च स्तर पर

4. मनुष्य का सूत्र संचालन क्या अदृश्य से होता हैं ?

5. हम अपनी क्षुद्रता और मर्यादा भी समझे

6. सौर परिवार जैसी रीति नीति, मानव परिवार भी अपनाये

7. प्रार्थना का मतलब चाहे जो मांगना नहीं

8. ब्रह्माण्ड में कान लगाइये, मनोवांछित खबरे पाइये

9. शरीर एक विद्युत संस्थान

10. बिना आँखो के भी देखा जा सकता हैं

11. साहसी ही श्रेय, सम्मान के अधिकारी

12. अध्यात्म विज्ञान और उसका प्रयोजन

13. शारीरिक स्वास्थ्य मानसिक संतुलन पर निर्भर हैं

14. दयानिधान भगवान के महान् अनुदान

15. कवि भी राष्ट्र-प्रहरी

16. मांसाहार की बढ़ती हुई प्रवृत्ति हर दृष्टि से घातक

17. ‘कोलाहल’ एक भयावह जीवन संकट

18. शाश्वत सौन्दर्य की शोध

19. आत्मिक प्रगति का आधार-संवेदना, सहानुभूति

20. दुर्व्यवहार-दुरूपयोगकर्ता के ही प्राण लेता हैं

21. परिजनों ने गुरूदेव को जैसा देखा पाया

22. गुरूदेव और उनकी दिव्य अनुभूतियाँ

गुरुवार, 2 जून 2011

अखण्ड ज्योति जनवरी 1972

1. बनाने की सोचिए, बिगाड़ने की नहीं

2. प्रेम का अमरत्व और उसकी व्यापकता

3. दिव्य दृष्टि का बहुमूल्य संयत्र-आज्ञाचक्र

4. मन्त्र विद्या और उसकी सुनिश्चित सामर्थ्य

5. योग विद्या का वैज्ञानिक विश्लेषण

6. प्रार्थना का स्वरूप, स्तर और प्रभाव

7. आयु नहीं योग्यता

8. हमारे आदर्शवादी उपदेष्टा एवं सद्गुरू ऐंजाइम

9. छिपा हुआ धन-नया प्रमाण सनातन दर्शन

10. तीसरी आँख से लेकर परकाया प्रवेश तक

11. धर्मनिष्ठा आज की सर्वोपरि आवश्यकता

12. अन्धविश्वास-सृजेता को भी खाता हैं

13. शीत हमारा मित्र हैं-ताप शत्रु

14. मधु वर्षा किसने की ?

15. रोगी न मारा जाय, केवल रोग ही मरे

16. एक हाथ में माला, एक हाथ में भाला के मन्त्र दाता

17. श्रेष्ठता अपनाये, प्रशंसा के योग्य बने

18. सभ्यता और फैशन के नाम पर विषाक्त भोजन

19. रासायनिक खाद बनाम भूमि की बरबादी

20. भारतीय संस्कृति ही विश्व संस्कृति हैं

21. सनातन सभ्यता का अभ्युदय अत्यन्त सन्निकट

22. देशरक्षा के लिए कर्तव्य निष्ठा की आवश्यकता

23. कुण्डलिनी और गायत्री साधना परस्पर पूरक

24. गुरूदेव और उनकी दिव्य विभूतियाँ

अखण्ड ज्योति दिसम्बर 1971

1. व्यर्थ का उलाहना

2. सत्य में ही सर्वस्व सन्निहित

3. मनुष्य महान् हैं और उससे भी महान् उसका भगवान्

4. कर्ता बिना कर्म कैसे हो सकता हैं ?

5. मन एक सूक्ष्म प्राकृतिक शक्ति

6. पुनर्जन्म की मान्यता-प्रामाणिकता की कसौटी पर

7. सच्ची साधना

8. प्रेम की सृजनात्मक शक्ति

9. जलवायु के आधार पर भी जीवित रहा जा सकता हैं

10. जीव जन्तुओं से भी कुछ सीखें

11. मात्र संयोग ही नहीं-अदृश्य सहयोग भी

12. स्थूल शरीर की तरह ही सूक्ष्म शरीर का भी ध्यान रखे

13. मुट्ठी में मौत और जेब में जीवन

14. कौन है वह प्रेरक शक्ति ?

15. प्रेम तत्व-वैज्ञानिक विश्लेषण और उसका महान् महत्व

16. अवान्छनीय बन्धनो से मुक्त होने की आवश्यकता

17. क्षात्र बल की पराजय

18. सत्तर लाख मौतें बच सकती हैं

19. औषधियों का अन्धाधुन्ध प्रयोग और उसका दुष्परिणाम

20. हिमालय के अमर आदम

21. सिद्धे बिन्दु महायत्ने, किं न सिद्धयति भूतले

22. युग परिवर्तनकारी सत्ता का प्राकट्य

23. चेतना की प्रचण्ड ज्योति ज्वाला-कुण्डलिनी

24. अपनो से अपनी बात

25. आत्म-भाव की शक्ति

26. मत रचो गीत दरबारों के

अखण्ड ज्योति नवम्बर 1971

1. महाशून्य की यात्रा

2. काक-वृत्ति बनाम हंस वृत्ति

3. अपने को जाने भव बन्धनों से छूटे

4. आश्चर्यो से भरी ईश्वरीय सत्ता

5. बौद्धिक क्षमता का भाण्डागार ऋतम्भरा का क्रिया व्यापार

6. सच्ची सेवकाई

7. प्रेम का आरम्भ होता हैं अन्त नहीं

8. जीव ब्रह्म कैसे बनता हैं ?

9. स्वप्न दपर्ण अतीन्द्रीय जगत् के प्रतिबिम्ब

10. विचार शक्ति (मन्त्र शक्ति) द्वारा पदार्थ का हस्तान्तरण

11. पाण्डित्य से बड़ा चरित्र

12. सदाचरण ही कल्याण का एकमात्र मार्ग

13. 300 वर्ष आयु के श्री तैलंग स्वामी

14. चींटियों की चतुराई आत्म तत्व की गहराई

15. उपभोगार्थी-उपयोगार्थी

16. नारी को स्वतन्त्रता मिले, साथ ही दिशा भी

17. ब्रह्माण्ड में हम अकेले नहीं

18. सिडनी केस-फेंरक से कुक तक

19. पेट या मालगाड़ी का इंजन

20. श्री आद्य शंकराचार्य के कुण्डलिनी अनुभव

21. संघर्ष प्रलय महासंघर्ष और फिर एक नया युग

22. अपनो से अपनी बात

23. सुख के छलावे-लक्ष दुःख में याद आवे

अखण्ड ज्योति अक्टूबर 1971

1. स्थायी मिलन का रहस्य

2. ज्ञान की सार्थकता

3. आत्म-परिष्कार से परब्रह्म की प्राप्ति

4. महत् प्रकाश पुंज के हम एक स्फुलिंग हैं

5. आश्चर्य जगत् के अधिष्ठाता की खोज

6. मृत्यु जीवन की अविच्छिन्न सहचरी

7. स्वप्नों में अन्तर्निहीत जीवन सत्य

8. अग्निहोत्र का स्वास्थ्य पर प्रभाव

9. बुराई का बुरा अन्त

10. मालिकों को जगाओ-प्रजातन्त्र को बचाओ

11. बीमारियाँ शरीर की नहीं-मन की

12. नारी के गले में पराधीनता की नई फांसी

13. लाख छिपायें छिप न सकेगी, गहरे मन की बातें

14. सफलता का श्रेय संकल्पवानों को

15. ब्रह्म एक समष्टि चेतना और जीव व्यष्टि

16. श्री आद्य शंकराचार्य के कुण्डलिनी अनुभव

17. अपनो से अपनी बात

18. नश्वर संसार

अखण्ड ज्योति सितम्बर 1971

1. परमात्मा को भूलो मत

2. कर्तव्य धर्म की भाव भरी प्रेरणा

3. प्रेम रूप अमृत और उसका रसास्वादन

4. मुक्तोऽहमद्भूतात्माऽहम्

5. काल से अतीत, अतीत ब्रह्माण्ड विज्ञानात्मा-की अनुभूति

6. आत्म-चेतना का विकास वृक्ष वनस्पतियों में

7. सत्य का निवास सुविस्तृत ज्ञान में

8. श्रद्धा और विश्वास भरा सरस एवं सफल जीवन

9. परम कल्याणी-मंगलमयी वाणी

10. स्वर्ग का अधिकार

11. अनाचार पर सदाचार की विजय

12. स्वप्नों में छिपे जीवन सत्य

13. बिनु पग चलइ, सुनइ बिनु काना

14. औषधियों का अत्याचार

15. विनाश से बचने के लिए-धर्म चेतना जगाये

16. परम शक्ति शाली तत्व-प्रकाश

17. भाई रे भक्ति की शक्ति अपार

18. साढे़ दस गुनी बड़ी-शाकाहार शक्ति

19. यज्ञ-पूर्ण हो गया

20. मालिकों को जगाओ-प्रजातन्त्र बचाओ ?

21. कुण्डलिनी योग का स्वरूप और प्रयोग

22. दूसरे लोकों से भी लोग आते हैं

23. अपनो से अपनी बात

24. न करिये कबिरा गरब

25. यह सोने को पिंजड़ा है

अखण्ड ज्योति अगस्त 1971

1. उत्तम ज्ञान जाग्रत देवता

2. सुख की साधना

3. भक्त का मार्ग परमात्मा प्रकाशित करता हैं

4. भूल-भटककर भेंट हुई भगवान से

5. प्रकाश प्रवेश की भूमिका और परमात्मा के दर्शन

6. न विकासवाद, न अनुवांशिकतावाद-अपवाद

7. दुःखों का कारण और निवारण

8. कर्मणा गहनो गतिः

9. ध्रुव-प्रभा द्वारा देवयान मार्ग और स्वर्गारोहण की पुष्टि

10. मनुष्य से कुछ कम नहीं मनुष्येत्तर प्राणी

11. अहंकारौ सिद्धि बाधकः

12. ‘‘सत्येन उत्भिता भूमि’’ धरती सत्य पर टिकी हैं

13. जप और ध्यान सूक्ष्म ही नहीं स्थूल परिणाम भी

14. पुनर्जन्म की प्रतिपाद्य एक अद्भुत घटना

15. जीवनी शक्ति की विद्युत चुम्बक मयता

16. कर्तव्य पालन से बड़ी साधना नहीं

17. जीवनोपयोगी आवश्यक जानकारी तो प्राप्त कर ही लीजिए

18. पुरोहित की पात्रता

19. शब्द तो ब्रह्म हैं, मन्त्र उसकी पराशक्ति

20. चमत्कारों की जननी-संकल्प शक्ति

21. जन्म-जन्मान्तरों तक पीछा न छोड़ने वाली शत्रु-शराब

22. दूध पियें-सौ से भी अधिक वर्ष जिये

23. मृत्यु जिनका कुछ नहीं बिगाड़ सकती

24. अपने को तुच्छ एव नगण्य न समझे

25. भीरू बनकर नहीं निर्भय बनकर जियें

26. अपनो से अपनी बात

27. भारतीय संस्कृति के दीपक

अखण्ड ज्योति जुलाईं 1971

1. सच्चे सौन्दर्य की शोध और साक्षात्कार

2. अहंकार की असुरता पर देवत्व की विजय

3. सर्व शक्तिमान परमेश्वर और उसका सान्निध्य

4. तन्मे मनः शिव संकल्पमस्तु

5. सृष्टि के अन्दर सृष्टि और अनन्त सृष्टि श्रंखला

6. दिमागी जादूगर अथवा जादूगर दिमाग

7. सः आत्मज्ञानी सः ब्रह्मवेत्ता

8. जीवन का कुछ उद्देश्य भी तो हो

9. सूक्ष्म शरीर की सत्ता और उसकी महान् महत्ता

10. पत्थर बोलते हैं, टीले गुर्राते हैं

11. मृत्यु जीवन का अन्त नहीं

12. शरीर की प्यास-आत्मा का अभ्यास

13. मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता आप हैं

14. चेतना उर्ध्वगामी बने, जड़ नहीं

15. भावनाओं में अभिव्यक्त विश्वात्मा

16. 71 वर्ष तक सोया नहीं

17. धुआँ क्या धरती को नष्ट करके छोड़ेगा

18. प्रगति के लिए अदम्य आकांक्षा आवश्यक

19. विद्यावान जयते कामः

20. शरीर सात लोको की शोभा नगरी

21. जीवन के रहस्य-जीवन की विचित्रताये

22. एक और विकासवाद-सत्य पर अदृश्य

23. स्वार्थ और परमार्थ का अन्तर

24. जीत वहीं हैं जहाँ धर्म हैं

25. अन्ध-विश्वास जो विज्ञान बन रहा हैं और विज्ञान अन्ध-विश्वास

26. शाकाहार बनाम मांसाहार

27. डाकिया आया और एक पत्र क्रेव निहारिका से लाया

28. पहाड़ से सोना बरसता हैं और सोने से शैतान

29. अपनो से अपनी बात


30. भगवान बुद्ध भारत में क्यों जन्में

अखण्ड ज्योति जून 1971

1. सेवा से सत्य-प्राप्ति

2. बैडूर्य कभी काँच नहीं हो सकता

3. कला और संस्कृति की मूल प्रेरणा-प्रेम

4. अद्भुतः अश्रुतोऽहम्-मैं अद्भुत हूँ, अश्रुत हूँ

5. पदार्थ और चेतना-दो भिन्न अस्तित्व

6. उपासना में संयम के चमत्कार

7. निन्दक नियरे राखिये

8. वैराग्य से सत्य सिद्धि

9. स्वप्न द्वारा मन का आत्मा से मेल मिलाप

10. बाल्यावस्था की नींद वृद्धावस्था में टूटी

11. नाभि में बैठा हुआ सूर्य

12. आत्म एव सनातगो

13. हम निकृष्ट स्तर का जीवन न जिये

14. शराब जितना आप जानते हैं उससे भी खराब

15. भूत की मान्यता निराधार भी साधार भी

16. तुलसी भुर्महादेवी-अमृतत्वप्रदायिनी

17. पुरूषार्थ और परिश्रम ही सजीवता का चिन्ह हैं

18. छूत अछूत का भेद

19. जल में उठ रही आग की लपट

20. भवानी शंकरो वन्दे श्रद्धा विश्वास रूपिणो

21. क्रान्ति विश्वव्यापी होगी-होगी किन्तु बौद्धिक

22. फिर न भटकना पड़े इतर मानव योनियों में

23. धन नहीं धन का संग्रह पाप

24. सुख शान्ति के स्वर्ण सूत्र

25. जब कामना करे तभी वर्षा हो

26. कुछ नोट कर लेने योग्य सूचनाये

27. अपनो से अपनी बात

28. भगीरथ सुरसरि लाने चले

अखण्ड ज्योति मई 1971

1. भगवान् को बार बार याद करो

2. पराजित मृत्यु-अपराजित आकाशज

3. ईश्वर का प्रतिबिम्ब प्रेम हैं, प्रेम हृदय आलोक

4. मनुष्य देह में भरा विलक्षण-विराट्

5. अन्तरिक्ष से लेकर वृक्ष वनस्पति तक फैली आत्मा

6. दृश्य और अदृश्य का संधिद्वार-स्वप्न

7. आत्म-जयी विजयी भव

8. बुद्धि के सुन्दरतम उपयोग ही-धर्म

9. आजूर्ये दीदे जानां बज्म में लाई मुझे

10. त्राटक द्वारा मनःशक्तियों का केन्द्रीकरण और सम्मोहन

11. प्राण-परिवर्तन की अद्भुत घटना

12. धर्मो रक्षति रक्षताः

13. प्रगति पथ पर निरन्तर अग्रसर रहे

14. पश्चाताप प्रक्रिया बन्द न की जाय

15. समर्थता से भी बढ़कर सामूहिकता

16. कैन्सर चाहिये तो सिगरेट पिये

17. शास्त्रादपि-शरादपि

18. प्राणिमात्र से यथायोग्य व्यवहार करे

19. जीव-जन्तुओं की विलक्षणताये-आत्मचेतना की माया

20. आध्यात्मिक काम विज्ञान-6

21. सतयुग की लाली-सम्वत् 1981 में आली

22. अपनो से अपनी बात

23. तुमने क्रान्ति मशाल जलाई

अखण्ड ज्योति अप्रेल 1971

1. पूर्णता-प्राप्ति

2. गर न हुई दिल में मए इश्क की मस्ती

3. पदार्थ से शक्ति की ओर, अणु से विराट् की ओर

4. जीवन प्रवाह-अनादि से अनन्त तक

5. अद्वैत आत्मा की अद्वैत अनुभूतियाँ

6. छुरे की धार पर नचिकेता चलेगा

7. कर्मयोग सम्बन्धी भ्रान्तिया और उनका निराकरण

8. शाक भाजी खाइये-अपनी उमर बढ़ाइये

9. शरीर मे एक और शरीर-प्राण शरीर

10. शक्ति, प्रकाश और ब्रह्म ज्ञानदाता-अग्निर्देवता

11. कर्मणाः गहनोगतिः

12. भावातिरेकता बढ़ने न दे

13. धरती माता को पागलों से केवल यज्ञ बचायेंगे

14. मन्त्र विद्या का वैज्ञानिक आधार

15. मृत्यु के बाद भी मनुष्य जीवित रहता हैं

16. बन्धन मुक्ति

17. सत्य बनाम तथ्य

18. ऊपर जाने की जल्दी हो तो सिगरेट पियें

19. काश हम सहयोग और सहकारिता का महत्व समझते

20. अविवेक के कारण दुर्गति

21. आध्यात्मिक काम विज्ञान-5

22. विज्ञान और धर्म में समन्वय अनिवार्य

23. अपनो से अपनी बात

24. परिजन इन सात प्रयत्नो में आज से ही जुट जाये

25. दायें बाये हाथ

26. विदाई की घड़ी

27. इस हीरक जयन्ती वर्ष में यह करे

अखण्ड ज्योति मार्च 1971

1. मानव जीवन की सार्थकता

2. आत्मवत् सर्व भूतेषु

3. प्रेम साधना द्वारा विश्वात्मा की अनुभूति

4. लघुत्तम में महत्तम

5. विराट् को पढ़े ही नहीं कुछ अर्थ भी निकालें

6. शिव और शक्ति की एक रूपता

7. कर्मयोग का मर्म

8. धर्म आवश्यक की नहीं अनिवार्य भी

9. कौतुकमय संसार के कलाकार की खोज

10. प्रायश्चित प्रक्रिया से भागिए मत

11. व्हाइट हाउस में मरणोत्तर जीवन

12. सब खोकर भी मर्यादा बचा ली

13. मनुष्य की सर्वश्रेष्ठता का मिथ्या अहंकार

14. मनुष्य जीवन का अन्त कितना निकट

15. सर्व समर्थ आध्यात्मिकता, उसके प्रमाण

16. नीति और अनीति की कमाई का अन्तर

17. प्रगति के पथ पर अग्रसर हूजिए

18. ज्ञान-विज्ञान की मूल देश-भारतवर्ष

19. हवा में ही न उड़े थोड़ा पैदल चले

20. शब्द ब्रह्म की साधना और उसका प्रशिक्षण

21. आध्यात्मिक काम विज्ञान-4

22. अपनो से अपनी बात

23. आह्वान

अखण्ड ज्योति फरवरी 1971

1. जमाने के साथ बदलिए

2. समृद्धि सूत्र

3. प्राणि जगत् की अतृप्त प्यास-प्रेम

4. देव-मन्दिर के देवता और परमात्मा के दर्शन

5. संसार नाचता हैं एक उंगली के इशारे पर

6. यतोधर्मस्ततो जयः

7. अध्यात्म की उपेक्षा नहीं की जा सकती

8. विकासवाद अथवा जीवात्मा का पतनवाद

9. काल-ब्रह्माण्ड और कारण का प्रदेश-स्वप्न

10. सारा जीवन ही साधना बने

11. मृत्यु जीवन का अंत नहीं

12. प्रकृति के कलाकारों से सुरक्षा विधि सीखना

13. प्रत्येक परिस्थिति में प्रसन्नता का राजमार्ग

14. भक्षक अणु-विकिरण-रक्षक गौ माता

15. श्रेष्ठता का मापदण्ड

16. प्रगति (?) के चरण आदिवासी जीवन की ओर

17. मृत्यु से डरने का कोई कारण नहीं

18. चरित्र रक्षा के लिए बलिदान

19. आध्यात्मिक काम विज्ञान-2

20. पूज्य आचार्य जी के कार्यक्रम

21. दृश्य और अदृश्य दुनिया सन् 2000 की

22. अनासक्ति की आत्म शांति का हेतु

23. अपनो से अपनी बात

अखण्ड ज्योति जनवरी 1971

1. ‘बलमुपास्व’ बल की उपासना करो

2. तीन तथ्य-तीन सत्य

3. प्रेम एवं परमात्मा

4. पत्थर की मूर्ति में भगवान के दर्शन

5. विद्या का मर्म इस तरह समझे

6. मरणोत्तर जीवन जो देखा, सुना, समझा जा सकता हैं

7. मन से मन का योग

8. क्षुद्र हृदय दौर्बल्यं त्यक्तोतिष्ठ परंतप

9. शतमन्यु का बलिदान

10. इन्द्र का बज्र था या कोई ब्रह्मास्त्र

11. असह्य भार-लम्बा परिवार, सीमित सन्तान-सदा बलवान्

12. शरीर एक बिजलीघर

13. स्वर्ग से भी महान्-तपलोक

14. सुशिक्षित कहलाने का अधिकार

15. जीव-जन्तुओं की मूक भाषा

16. चमत्कार कोई अवैज्ञानिक तथ्य नहीं

17. धरती माता को बाँझ न बनाया जाय

18. क्रोध ऐसे संकट उत्पन्न करता हैं

19. सुरूचि का विकास इतना आवश्यक

20. तृतीय विश्वयुद्ध होगा तो-पर 1995 के बाद

21. आध्यात्मिक काम विज्ञान-2

22. तेजौ वे गायत्री, ज्योतिर्वे गायत्री, गायत्र्यैव भर्ग

23. निर्दोष पर दया

24. अपनो से अपनी बात

25. अन्य भाषाओ में मिशन का विस्तार इस प्रकार

26. भगवान धरा पर आते है

अखण्ड ज्योति दिसम्बर 1970

1. नाव न खेई जाय बिना मल्लाह के

2. इस अस्थिर संसार में सुख ढूँढे दुःख होय

3. तुलसी प्रेम पयोधि की ताते माप न जोख

4. बड़े भाग्य मानुष तन पावा

5. काल की इकाई से महाकाल तक

6. गुरू दक्षिणा जो चुकाई न जा सकी

7. मनुष्य की विलक्षण दिव्य शक्तियाँ

8. परमार्थ की उपेक्षा न करे

9. मन्त्र परम लघु जासु वश विधि हरि हर सुर सर्व

10. प्रकृति जब महाकाल बन गई

11. हिमालय में अमर आत्माओं का रहस्य

12. स्वर्ग प्रवेश की योग्यता

13. दिव्य शक्ति संवेदना और तेज की संग्राहक शिक्षा

14. धर्म प्रथाओं में नहीं, सदाचरण में हैं

15. स्वप्नों में छिपी जीवन की गहराइयाँ

16. मनुष्य और कीट-पतंगो में कितना अन्तर

17. आध्यात्मिक काम विज्ञान-एक महान् तथ्य-1

18. युग परिवर्तन अत्यन्त सन्निकट

19. अपनो से अपनी बात

20. दस आवश्यक सूचनायें-जो नोट कर ली जाय

21. शरीर नहीं आदर्श की रक्षा आवश्यक

22. जिसने मन को जीत लिया

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