शुक्रवार, 12 अगस्त 2011

अखण्ड ज्योति अगस्त 1988

































अखण्ड ज्योति जुलाई 1988

































अखण्ड ज्योति जून 1988

































अखण्ड ज्योति मई 1988





























गुरुवार, 11 अगस्त 2011

रक्षा बन्धन पर विनम्र अपील

अखण्ड ज्योति अप्रेल 1988
































शुक्रवार, 5 अगस्त 2011

Gaytri Pariwar Yuva Kranti Dal, Ahamdabad

वृक्ष गंगा अभियान

क्या खोया ? क्या खोया ?

आज की इस नई प्रगति के युग में हमने क्या क्या खोया क्या क्या पाया ?

ज्ञान खोया - विज्ञान पाया।

श्रद्धा खोई - अभिज्ञता पाई।

आचार खोया - विचार पाया।

विश्वास खोया -तर्क पाया।

स्वास्थ्य खोया - इलाज पाया।

नीति खोई - बुद्धि पाई।

ईमान खोया - अभिमान पाया।

प्रेम खोया - इल्म पाया।

दिल खोया - दिमाग पाया।

भूख खोई - भोजन पाया।

सच्चाई खोई - चतुराई पाई।

पुण्यशाली बनने के पाँच द्वार

त्यागो और अवश्य त्यागो

1. बुद्धि से संकोच।

2. मन से कुविचार।

3. हृदय से भय।

4. समाज से कुरीतियाँ।

5. देश से स्वार्थपरता।

6. धर्म से निरर्थक रूढि़याँ।

7. राजनीति से साम्प्रदायिकता।

8. अछूतों से अस्पृश्यता।

9. दीनो का तिरस्कार।

10. रोगी से घृणा।

11. शरीर से निर्बलता।

12. इन्द्रियों से अपवित्रता।

13. नेत्रों से कुदृष्टि।

14. मुख से अप्रिय वचन।

15. श्रवण से निन्दा अस्तुति की रूचि।

16. रसना से रसास्वादन की कामना।

17. हाथों से क्रूर कर्म।

18. पैरों से कुमार्ग गमन।

साभार-ज्वाला प्रसाद गुप्त, एम.ए., एल.टी.,फैजाबाद

sadguru...

बुधवार, 3 अगस्त 2011

श्रेष्ठ कार्यो के प्रति लगाव ही श्रद्धा है।

1) राज तन्त्र ही नहीं प्रधान, धर्म तन्त्र पर भी दो ध्यान।
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2) राजा ययाति सशरीर स्वर्ग गये थे पर जब उन्होन वहा अपने पुण्यों की बहुत प्रशंसा करनी आरम्भ की, तो उनके पुण्य क्षीण हो गये और उन्हे स्वर्ग से नीचे ढकेल दिया गया।
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3) राग-द्वेष को अपने में न मानना अर्थात् आने-जाने वाला मानना हैं।
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4) राग-द्वेष उत्पन्न होने पर भी उनके वश में होकर कार्य न करना बल्कि शास्त्र, भगवान तथा सन्तो के आज्ञानुसार ही कार्य करना चाहिये।
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5) राग-द्वेष अज्ञानियों की पूँजी हैं, ज्ञानवान इस पूँजी का संचय करने में अपना मूल्यवान समय नष्ट नहीं करते।
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6) श्रवण और कथन से दिशा तो मिलती हैं, पर आत्मकल्याण के मार्ग पर पर्वतो जैसी चढाई चढनी पडती है।
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7) श्रेष्ठ कार्यो के प्रति लगाव ही श्रद्धा है।
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8) श्रेष्ठ विचारों के चिन्तन-मनन की साधना वस्तुतः मस्तिष्कीय क्षैत्र में घुसे मनोविकारों को, दुष्प्रर्वतियों को निरस्त करने के लिये लड़ा जाने वाला महाभारत हैं।जो इसमें सफल होते हैं,वे ही सच्चे अर्थो में जीवन का आनन्द उठाते हुए आत्मोत्कर्ष का परम लाभ प्राप्त करते हैं।
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9) श्रेष्ठ चिन्तन की सार्थकता तभी हैं, जब उससे श्रेष्ठ चरित्र बने और श्रेष्ठ चरित्र तभी सार्थक हैं, जब हव श्रेष्ठ व्यवहार बन कर प्रकट हो।
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10) श्रेष्ठ चिन्तन का अभाव एवं उत्कृष्टता के प्रति अनास्था अंततः उदण्डता को जन्म देते है।
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11) श्रेष्ठ साधक ही श्रेष्ठ कार्यकर्ता होता हैं। प.पू.गुरुदेव।
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12) श्रेष्ठ आदतो में सर्वसुलभ है-नियमितता की आदत।
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13) श्रेष्ठता धन से नही, श्रेष्ठ कार्यो से मिलती है।
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14) श्रेष्ठता का समुच्चय ही देवता है।
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15) श्रेय और प्रेय दोनो दिशायें एक दूसरे के प्रतिकूल जाती है। संसार में दोनो में से एक ही अपनायी जा सकती है। संसार प्रसन्न होगा तो आत्मा रुठेगी। आत्मा को सन्तुष्ठ किया जायेगा तो संसार के निकटस्थों की नाराजगी सहन करनी पडेगी। आमतोर से यही होता रहेगा। कदाचित ही कभी कहीं ऐसे सौभाग्य बने हैं जब सम्बन्धियों ने आदर्शवादिता अपनाने का अनुमोदन दिया हो।
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16) श्रेष्ठ स्मृतियों का बटन आपके हाथ में हो, तो जीवन आनन्दमय बन जाएगा।
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17) शत्रु पण्डित, मुर्ख हितैषी से अच्छा है।
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18) शब्द से निःशब्द में छलांग लगाने का साहस ही साधना है।
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19) शब्द व्यक्ति की दरिद्रता को दर्शाते हैं, जबकि निःशब्द अवस्था उसके अन्तःकरण की महानता का द्योतक है।
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20) शक्ति आनन्द के साथ रहती हैं, यह विश्व शक्तिशाली का ही है।
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21) शरीर की समीपता की सान्निध्य का आधार नहीं होती। ईश्वर भक्ति का आनन्द उसके अदृश्य रहने से सम्भव होता हैं, यदि वह अपने साथ भाई-भतीजे की तरह रहने लगे तो शायद उसकी उपेक्षा-अवज्ञा होने लगे।
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22) शरीर को भगवान का मन्दिर समझ कर आत्म-संयम और नियमितता द्वारा आरोग्य की रक्षा करनी चाहिये।
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23) शरीर भूखा मरे तो भी आत्मा के स्तर को आँच नहीं आती। किन्तु यदि सद्ज्ञान की वर्षा बन्द हो जाये तो मनुष्य की आत्मा ही मरती है। अतः सद्ज्ञान प्राप्ति के प्रयास जारी रहने चाहिए।
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24) शरीर रोगी और दुर्बल रखने के समान दूसरा कोई पाप नही।
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मंगलवार, 2 अगस्त 2011

Take things differently...

1- Dushmano se pyaar hota chala jayega Bas Dosto ko Aazmatey Jaiye. 
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2- DREAM & AIM r both Sensational Words. make a Dream as Aim, but don't make Aim as a Dream. 

"Write ur Sad Time On Water,While.Gud time on stone". 
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3- Defination of "TODAY"
T-This is an
O-Opportunity to 
D-Do
A-A work, better than 
Y-Yesterday.
So enjoy today...... 
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4- Dark is not D Opposite of Light.
Its just D Absence of Light.
Similarly,
A Problem is D Absence of an Idea,
Not d Absence of a Solution. 
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5- Company of good people is like walking in a shop of perfume. Whether U buy the perfume or not, U R bound to receive the Fragrance. 
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6- Navyug ka arunoday nikat h. 2020 tk navyug apna swroop prastut kr dega. is important time me sanskarwan jan purn tatparta prastut karenge. 
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7- Har "INSAN" Ko
"GULAB" Ke Us "PHOOL" Ki Tarah Hona Chahiy
Jo Un Haatho Me Bhi "KHUSHBU" Deta Hai, Jo Use "MASAL Kar
Fenk deta h. 
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8- Hamesha apni choti choti galtiyon se bachne ki koshish karo, Q ki Insaan pahado se nahi chhote chhote pathron se thokar khata h. 
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9- JALTA HUA EK DIPAK HAZAARO BUJHE DIPAK JALA DEGA, PAR BUJHE HUE HAZAARO DIPAK MILKAR BHI EK DIPAK NA JALA SAKENGE ! 
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10- Life is the art of drawing without an eraser. So be careful while taking any small decisions about the valuable pages of life. 
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11- If U Salute ur Duty, u Need Not Salute anyone. But If U Do Not Salute ur Duty, U Need to Salute Everyone... 
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12- Some one love u so u alive. Such person u'll find a light. That light r called Mother, Father & Frnds. 
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13- God upsets our plans only to setup his plan for us.
Bcoz, v c our present & plan our future. But He sees our future & plans our present. 
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14- Ghar k Bahar SUBH-LABH likhte h.
Iska matlab kya h ? pehle SUBH kaam karo fir LABH hoga.
Radhe-Radhe. 
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15- Flowers r very soft, do not Touch them with hard hands Similarly Feelings r like soft flowers, do not Touch them with hard words. 
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16- Jin logo ki aap "Tarif" karte ho unk "Guno" ko apnao tum khud "Tarif" k yogy ho jaoge. 
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17- Information-
Check ur PNR railway Status by msg.
Type ur 10 digit pnr no. and send it to
9793300000
enjoy journey 
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18- Jeevan ka Sabse bada Rog..
'' KYA KAHENGE LOG.." 
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19- Jab Jindgi Hasaye Tab Samjna K Achhe Karmo Ka Fal Hai Aur Jab Jindgi Rulaye Tab Samjna K Acche Karm Kar Ne Ka Time Aa Gaya. 
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20- is Duniya Me Achchhe Insan Ki Talas Na Karo Balki Swam Ek Achchhe Insan Ban Jao Kya Pata Hamare Is Prayas Se Kisi Dusre Ki Talash Puri Ho 
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21- INSE SIKHO-
Seva-Shravan
Love-Krishna
Maryada-Ram
Tyag-Buddha
Daan-Karna
Lakshya-Eklavya
Ahinsa-Mahavir
Bhakti-hanuman 
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22- If you try to impress, you'll be changed, But if you try to express, others will change. Always try to express, not to impress. 
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23- Whenever u feel heat. Think of our BSF Jawans Patrolling our Borders in THAR Desert. Struggling from 60 Degree Temp. 
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24- If someone pointout ur mistake...
Be happy that at least someone is interested in what you have done..
Take things differently...

गुरुवार, 28 जुलाई 2011

सूर्यकिरण चिकित्सा

वेदों में सूर्यकिरण चिकित्सा का विवरण बड़े विस्तार से आता है। मत्स्यपुराण कहता हैं कि नीरोगिता की इच्छा हैं तो सूर्य की शरण में जाओ। वेदों में उदित होते सूर्य की किरणों का बड़ा महत्व बताया गया है। अथर्ववेद 17/1/30 में वर्णन आया हैं कि उदित होता सूर्य मृत्यु के सभी कारणों, सभी रोगों को नष्ट कर देता है। इस समय की इन्फ्रारेड किरणों में प्रचुर जीवनीशक्ति होती है। ऋग्वेद 1/50/11 में उल्लेख हैं कि रक्ताल्पता की सर्वश्रेष्ठ औषधि हैं उदित होते सूर्य के दर्शन, ध्यान। हृदय की सभी बीमारियाँ नित्य उगते सूर्य के दर्शन, ध्यान एवं अर्घ से दूर हो सकती है। (अथर्व.1/22/1)

सच्चा तीर्थ कौनसा हैं ?

सच्चा तीर्थ कौनसा हैं ? तीर्थसेवन से आशय क्या है, यह स्कंदपुराण से समझें-

‘‘सत्य तीर्थ हैं, क्षमा, इंद्रिय नियंत्रण भी तीर्थ हैं। सरलता भरा स्वभाव एवं जीव दया भी तीर्थ है। दान, मन का संयम, संतोष, ब्रह्मचर्य, प्रियवचन बोलना भी तीर्थ है। ज्ञान, धैर्य, तप को भी तीर्थ कहा गया है। तीर्थों में सबसे श्रेष्ठ तीर्थ हैं-अंतःकरण की पवित्रता।’’

अंत में स्कंदपुराण इस विषय में कहता हैं-‘‘जल में शरीर को डुबो लेना ही स्नान नहीं कहलाता। जिसने दमरूपी तीर्थ में स्नान कर मन के मैल को धो डाला, वही शुद्ध है, सच्चा तीर्थ सेवन करने वाला है।’’ चार धाम की यात्रा पर इन दिनों बेतहाशा भीड़ स्नान-दर्शन यात्रा पर निकली हैं। क्या वे इस मर्म से परिचित हैं ?

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