शनिवार, 14 मई 2011

अखण्ड ज्योति अक्टूबर 1957

1. प्रलय-वीण के तार-तार

2. पूंजीवाद और साम्यवाद का भयंकर संघर्ष

3. बाइबिल और कुरान की प्राचीन भविष्यवाणिया

4. तीसरा महासमर कब तक ?

5. अणुबम की प्रलय का दोषी कौन ?

6. नेहरू जी भी संसार के नाश की संभावना प्रकट करते हैं

7. अणुबम का अविष्कार और उसकी शक्ति का रहस्य

8. सन् 1960 से 1963 तक का भयानक समय

9. दिव्यदृष्टि वाले महात्माओं की भविष्य वाणिया

10. भारत भी अणु बम तैयार कर सकता हैं

11. नई दुनिया का निर्माण कैसे हुआ ?

12. दैवज्ञ की दृष्टि में संसार चक्र

13. आगामी वर्षों की चेतावनी

14. आगामी वर्षों में भारत में होने वाले परिवर्तन

15. कठिन भविष्य की महान् चुनौति

अखण्ड ज्योति सितम्बर 1957

1. संघर्षों में जब मुख मोड़ा

2. धर्म का प्राचीन और नवीन रूप

3. सच्ची आध्यात्मिकता का मार्ग

4. राज-धर्म-शास्त्र का अंतिम रहस्य

5. योगाभ्यास द्वारा अशुभ कर्मों का नाश

6. बेईमानी एक मूर्खता हैं

7. विचारों द्वारा भी संसार का कल्याण किया जा सकता हैं

8. परमात्मा ही प्रकाश हैं

9. शुद्ध साधनो से ही श्रेष्ठ कार्य किये जा सकते हैं

10. विश्व कल्याण का प्रतीक-स्वास्तिक

11. निष्काम सेवा ही सच्चा यज्ञ है

12. नवीन सामाजिक रचना कैसे हो ?

13. उच्च पदवी पाकर आप नम्र और सत्यप्रेमी बनिये

14. सिनेमा और चरित्र हीनता

15. भयंकर भविष्य में सावधान

16. गायत्री उपासना के अनुभव

17. चमत्कार को नमस्कार

अखण्ड ज्योति अगस्त 1957

1. वन्दन हैं उसे सौ बार

2. हमारे धर्म का आदि स्त्रोत वेद ही हैं

3. हिन्दू धर्म लौकिक और पारलौकिक उन्नति का मूल हैं

4. परमेश्वर को पाने के लिए प्रतीकोपासना आवश्यक हैं

5. ज्ञान के नेत्र

6. जाति-भेद हिन्दू समाज का घुन हैं

7. सच्चरित्रता का मूल आधार ईश्वर भक्ति ही हैं

8. भोजन की शुद्धता का हमारे चरित्र पर प्रभाव

9. अभ्यास और साधना ही सफलता की कुंजी हैं

10. प्रकृति की ओर लौटो

11. जन-संख्या की समस्या

12. संस्कृत भाषा का महत्व

13. युग परिवर्तन में नारी का सहयोग

14. परिव्राजक चाहिए ! परिव्राजक चाहिए !!

15. पाप की कमाई से सच्चा सुख नहीं मिलता

16. भय और व्यक्तित्व का विकास

17. गायत्री उपासना के अनुभव

18. चमत्कार को नमस्कार

अखण्ड ज्योति जुलाई 1957

1. अहम् ब्रह्मास्मि

2. धर्म का सच्चा स्वरूप

3. तत्व ज्ञान का मानव जीवन में उपयोग

4. राम-चरित्र की महानता और उसकी शिक्षाऐं

5. अपने आप का स्वामी बन कर रहिए

6. नारियां ही हमारे समाज को उच्च पद पर आसीन करायेगी

7. व्यक्तित्व और स्वास्थ्य

8. समाज के उत्थान और पतन का उत्तरदायित्व ब्राह्मणों पर हैं

9. विचारों की अमोघ शक्ति और उसका सदुपयोग

10. जनसंख्या की समस्या और वैदिक समाज

11. सिनेमा नैतिक पतन का प्रचारक हैं

12. मनुष्य अपने भाग्य का आप ही मालिक हैं

13. जीवन का उद्देश्य कैसे सफल हो ?

14. ढोंगी ‘महापुरूषों’ की काली करतूतों से बचिए

15. यज्ञ का मुख्य उद्देश्य लोक कल्याण ही हैं

16. हमारा लोक राज कैसे सफल हो सकता हैं ?

17. विज्ञान की वर्तमान गति और उसका भविष्य

18. अ.भा.गायत्री परिवार सम्मेलन

19. धर्म-प्रेमियों के सराहनीय प्रयत्न

20. गायत्री-उपासना के अनुभव

अखण्ड ज्योति जून 1957

1. मानव से कुछ प्रश्न

2. हमारा आध्यात्मिक धर्म-स्वामी विवेकानन्द

3. ईश्वर अनुभव का ही विषय हैं

4. भारतीय संस्कृति ही मानवता का उद्धार कर सकती हैं

5. हमारे पाँच आध्यात्मिक शत्रु

6. सब धर्मों का समान रूप से आदर कीजिए

7. आचरण और व्यवहार में सत्य का प्रयोग

8. त्यागी और तपस्ती ही धर्म का निर्णय कर सकते हैं

9. अपने पसीने की रोटी खाइये

10. उत्सव व तीर्थों को धर्म-प्रचार के साधन बनाइये

11. आध्यात्मिक उन्नति में गुरू की आवश्यकता

12. उत्पादन बढ़े पर स्तर न गिरे

13. अब श्रद्धा की परीक्षा का समय आ गया

14. गायत्री उपासना के व्यक्तिगत अनुभव

15. चमत्कार को नमस्कार

अखण्ड ज्योति मई 1957

1. गायत्री महिमा

2. धर्म तंत्र का मूल तत्व

3. हिन्दू धर्म का वास्तविक स्वरूप

4. भगवान की लीला और हमारी लीलाएँ

5. विलासी मनुष्य धर्मात्मा नहीं हो सकता

6. महापुरूषों के जीवन हमारे पथ प्रदर्शक हैं

7. मृत्यु से डरे क्यों ?

8. समाज के पुनर्निमाण का आधार

9. राम-राज्य कैसे स्थापित हो

10. वर्ण व्यवस्था का आदर्श

11. विश्वव्यापी अशान्ति और उसका प्रतिकार

12. धर्म परिवर्तनशील हैं या अपरिवर्तनशील ?

13. चमत्कार को नमस्कार

अखण्ड ज्योति अप्रेल 1957

1. ज्योति-याचना

2. धर्म की मूलभूत एकता

3. अद्वेतवाद या सर्वेश्वरवाद

4. नित्य प्रति के व्यवहार में असत्य का प्रयोग

5. सुखी होने का राजमार्ग

6. गीता और भावी वर्ण व्यवस्था

7. वेद ही भारतीय संस्कृति का मूल हैं

8. जीवन को सुखी बनाने का सहज मार्ग-अपरिग्रह

9. प्रार्थना द्वारा अपनी अभीष्ट सिद्ध कीजिए

10. चिर यौवन का स्त्रोत

11. मनुष्य मात्र की समानता

12. सौन्दर्य बनाम कुरूपता

13. आलस्य तो-छोडि़ए ही

14. पेट को कब्र मत बनाइए

15. गायत्री महामंत्र की मूलभूत प्रेरणा

16. गायत्री उपासना के अनुभव

अखण्ड ज्योति मार्च 1957

1. आत्म विस्मृति

2. धर्म-मय जीवन का तत्व ज्ञान

3. कर्मयोग की उपासना

4. वेदों के मूलभूत तथ्य

5. दुःख मिलना भी आवश्यक हैं

6. महामानवों की महानता

7. नारी की महानता का पहचानिए

8. ‘‘पंगु’’ धर्म को सहारा दीजिए

9. माला में 108 दाने क्यों ?

10. निस्वार्थ समाजसेवी श्री अन्ना जी

11. हिन्दू समाज का घुन-दहेज

12. सत्संग द्वारा आत्मोन्नति कीजिए

13. हमारी आन्तरिक भावनाए

14. यज्ञ का वास्तविक स्वरूप

15. मनुष्य जीवन के चार पुरूषार्थ

16. भौग और त्याग का समन्वय

17. सेवा-धर्म से ईश्वर प्राप्ति

18. राम-नाम का अक्षय कोष

19. गायत्री उपासना के अनुभव

20. ब्रह्मास्त्र अनुष्ठान अपूर्ण न रहने पाये

21. धर्मात्माओं के सराहनीय सत्प्रयत्न

अखण्ड ज्योति फरवरी 1957

1. आत्मा की अमर ज्योति

2. धर्म नकद हैं उधार नही

3. जीवन का सर्वस्व-शील

4. जीवन के मूल्यवान क्षणों का सद्व्यय

5. भारतीय संस्कृति अमर हैं

6. पंच ऋण और पंच महायज्ञ

7. हमारा सच्चा सम्बन्धी कौन ?

8. श्री विष्णु और वाहन गरूड़

9. हिन्दू धर्म महान् हैं

10. महिलाओं की सांस्कृतिक शिक्षा

11. चरित्र उत्थान के बिना राष्ट्रोन्नति असम्भव

12. इन्द्रिय संयम द्वारा सद्बुद्धि

13. संयम श्रम स्वावलम्बन और स्नेह

14. ब्रह्मचर्य की महान् शक्ति

15. वेदों में सूर्य किरण चिकित्सा

16. अब हमें ऐसे नेता चाहिए

17. हमारी शिक्षा पद्धति कैसी हो ?

18. गायत्री उपासना के अनुभव

अखण्ड ज्योति जनवरी 1957

1. गायत्री वन्दना

2. मौन की अन्तर ज्योति

3. शक्ति का दुर्दमनीय केन्द्र

4. पतन का यह प्रवाह रोका जाय

5. धन एक विपत्ति भी हैं

6. पंचदेवों का आध्यात्मिक रहस्य

7. बुद्धि की स्फुरणा का गीत

8. दुर्बलता एक पाप हैं

9. बौद्ध तपस्वियों की कुछ उच्च भावनाए

10. अपने ज्ञान का विकसित कीजिए

11. ‘‘सा विद्या या विमुक्तये’’

12. आग से खेलना बन्द कीजिए

13. गौ रक्षा आवश्यक हैं-सन्त विनोबा भावे

14. ईर्ष्या मत कर

15. गायत्री उपासना के अनुभव

अखण्ड ज्योति दिसम्बर 1956

1. कामना करो न, किन्तु साधना करो

2. आध्यात्मिक जीवन के अनुभव

3. आप असीम शक्ति के भण्डार हैं

4. धर्म और विवेक का समन्वय

5. पड़ौसी से प्यार करो

6. दोष नहीं गुण ग्रहण कीजिए

7. सदुपदेशों को ध्यान पूर्वक सुनिये

8. सामूहिकता की भावना

9. कर्म और उसके बन्धन

10. अनीश्वरवाद विश्व के लिए खतरा

11. कर्तव्य पथ पर आरूढ हूजिए

12. मनुष्य धर्म का वास्तविक स्वरूप

13. तृष्णा नहीं भक्ति कीजिए

14. पौराणिक कथाओं के रूपकालंकार

15. निमाड़ प्रान्त में गायत्री प्रचार

16. आज की सर्वोपरि आवश्यकता-जिसे पूरा करने के लिए आपको कटिबद्ध होना हैं

17. गायत्री परिवार समाचार

18. विजय गीत

अखण्ड ज्योति नवम्बर 1956

1. थके पथिक से

2. धर्म तत्व में समन्वय की आवश्यकता

3. चिन्ता और भय की क्या जरूरत ?

4. आप श्रद्धालु बनिए

5. भौतिक वाद एवं आध्यात्मिक वाद

6. अपने चित्त को प्रसन्न रखिए

7. सच्चा धन कहाँ हैं ?

8. आलस्य न करना ही अमृत पद हैं

9. ब्रह्मचर्य और उसके उपाय

10. उपवास आवश्यक हैं

11. बच्चों को भी विकसित होने दीजिए

12. संस्था के कार्यकर्ता की जिम्मेदारी

13. क्या धर्म और विज्ञान में विरोध हैं ?

14. जीवन का आदर्श क्या हैं ?

15. दीपावली की पृष्ठभूमि

16. तपोभूमि समाचार

17. शाखायें क्या करे ?

अखण्ड ज्योति अक्टूबर 1956

1. चेतावनी

2. एकाग्रता और संकल्प की शक्ति

3. आत्म तत्व की उपासना रहस्य !

4. सार्वभौम सेवा के पथ में !

5. भगवान का अनन्त भण्डार

6. शिक्षा एवं संस्कृति का उद्देश्य

7. दया, क्षमा और दण्ड का यर्थाथ उपयोग

8. परिस्थितियों की प्रतिकूलता

9. आत्म निरीक्षण आवश्यक हैं

10. क्या संसार का त्याग संभव हैं ?

11. संकीर्णता को त्याग दीजिए

12. मलेरिया से कैसे बचें ?

13. भारतीय संस्कृति में त्याग की परम्परा

14. मनुष्य के चार महान् गुण

15. बाबा मूलक दास

16. कल्याण का सर्वोत्तम साधन

17. तपोभूमि समाचार

18. आश्विन की नवरात्रि साधना

19. संगठनात्मक सहस्त्र चण्डी पुरूश्चरण

20. उपासनात्मक प्रचंड चण्डी महा पुरूश्चरण

21. गायत्री परिवार के प्रशंसनीय सत्प्रयत्न

अखण्ड ज्योति सितम्बर 1956



2. परमात्मा का सच्चा साक्षात्कार

3. आचार्य का विद्यार्थी को उपदेश

4. मनःशक्तियों की चमत्कारी गतिविधि

5. मन की दुर्बलता के कारण

6. प्रार्थना किस लिए करें ?

7. ब्रह्मचर्य एक तप हैं

8. आप प्रसन्न रहा कीजिए

9. बालकों के साथ बड़े कैसा व्यवहार करे ?

10. आपद् धर्म और उसकी मर्यादा

11. ब्राह्मणत्व की ओर

12. उन्नति पुरूषार्थ पर अवलम्बित हैं।

13. आध्यात्मिकता का तत्वज्ञान

14. बौद्ध धर्म और जाति भेद

15. कर्मयोगी भगवान

16. तीर्थ यात्रा का महत्व

17. छः विशेष तीर्थ

18. आप भी दीर्घजीवी हो सकते हैं !

19. यज्ञ महाभियान की संभावित कठिनाइया

20. अखिल भारतीय गायत्री परिवार, मथुरा-सदस्यता का प्रतिज्ञा पत्र

21. गायत्री परिवार का संगठन-सूत्रपात

सोमवार, 9 मई 2011

अखण्ड ज्योति जुलाई 1956

1. मांग रही हैं आप मनुजता रहो और रहने दो !

2. महात्मा गांधी की दैनिक प्रार्थना

3. भारतीय संस्कृति की अन्तरात्मा

4. सुख-दुःख में समभाव

5. सत्संग की महिमा

6. उदारता एक महान् गुण

7. वैदिक युगीन एक धर्म प्रचारिका

8. भगवान का अनुग्रह

9. महात्मा बुद्ध के व्यावहारिक उपदेश

10. देवताओं के वाहनों का रहस्य

11. सांस्कृतिक पुनरूत्थान और नारी

12. गुरू मंत्र-गायत्री

13. श्री रामकृष्ण परमहंस के उपदेश

14. वेदों में यज्ञ की महिमा

15. यज्ञ से देवतत्वों की परिपुष्टि

16. भारतीय आहार-विज्ञान

17. गौ-वंश की रक्षा होनी ही चाहिए

18. दहेज का असुर तो ऐसे मरेगा

19. गायत्री परिवार के समाचार

20. सकाम यज्ञों के कुछ विधि-संकेत

अखण्ड ज्योति जून 1956

1. वृत की शपथ

2. वर्तमान समय में ब्राह्मणों का कर्तव्य

3. भारत की सांस्कृतिक समस्या

4. आप हर समय प्रसन्न रहा कीजिए

5. राष्ट्र एवं सांस्कृतिक उत्थान का उपाय

6. भारतीय संस्कृति में गुण कर्म की प्रधानता

7. एकता का आदर्श

8. भारतीय संस्कृति की कसौटी

9. श्रद्धा का मर्म

10. भाग्य भी कोई चीज हैं

11. वैयक्तिक सेवा

12. आज की एक महान् आवश्यकता

13. इन महान् कार्यो में भाग लीजिए

14. नरमेध यज्ञ-एक संस्मरण

15. मनुष्य की अद्भुत स्मरण शक्ति

16. आत्म-ज्ञान की आवश्यकता

17. बौद्ध धर्म और वैदिक धर्म की एकता

18. राजस्थान प्रान्तीय गायत्री सम्मेलन

अखण्ड ज्योति मई 1956

1. करो नित गायत्री का जाप

2. गायत्री महायज्ञ की पूर्णाहुति

3. समारोह का उद्घाटन

4. पूर्णाहुति से प्रेरणा

5. जब स्वर्ग उतर आया-पृथ्वी पर

6. गायत्री तपोभूमि की मधुर स्मृति

7. एक नारी की दृष्टि में महायज्ञ की पूर्णाहुति

8. गायत्री उपासना से ही वास्तविक कल्याण

9. सांस्कृतिक सेवा श्रंखला की प्रतिज्ञाएं

अखण्ड ज्योति अप्रेल 1956

1. धर्म और सदाचार

2. विडम्बना

3. प्रभु-भक्ति का वैदिक स्वरूप

4. कर्मयोग ही जीवन विद्या हैं

5. मानव-जीवन का आदर्श-संयम

6. हिन्दू संस्कृति का लक्ष्य

7. यज्ञों का आध्यात्मिक स्वरूप

8. बुद्ध भगवान की महानता

9. भारतीय संस्कृति में गुण-कर्म की प्रधानता

10. स्वभाव को कैसे सुधारा जाय ?

11. असफलता के तालिका कारण

12. यज्ञ की वैज्ञानिकता

13. इन चार बातों का ध्यान रखिए

14. योगेश्वर भगवान कृष्ण

15. सकाम यज्ञों की परम्परा

16. परिजनों को कुछ आवश्यक सूचनाए

17. श्री रामकृष्ण परमहंस के उपदेश

18. नवरात्रि की साधना

अखण्ड ज्योति मार्च 1956

1. संस्कृति सौष्ठव

2. वेदों मे यज्ञाग्नि की प्रार्थना

3. सच्चा मार्ग तो कर्मयोग ही हैं

4. क्रोध को शत्रु से कम मत समझिए

5. भारतीय संस्कृति की उपयोगिता

6. बुरे विचारों से सावधान !!

7. हमें स्वतन्त्र चिन्तन करना चाहिए

8. बातें नहीं काम कीजिए

9. भारतीय एकता के सूत्र उसकी संस्कृति में

10. सच्ची स्वतन्त्रता

11. आत्मिक-शान्ति कैसे मिले ?

12. वर्तमान समस्याओं का हल-चरित्र निर्माण

13. अभिमान हटाइये

14. तीर्थ यात्रा और धार्मिक मेलों का उद्देश्य

15. सांस्कृतिक पुनरूत्थान के लिए आप यह कीजिए

16. रूपये की शक्ति

17. सांस्कृतिक सेवा के लिए तपोभूमि यह करेगी

18. संतोषामृत पिया करे

19. हमारे जीवन में वनों का महत्व

20. अमृत वचन

21. अधिक बच्चे पैदा मत कीजिए

22. तपोभूमि समाचार

अखण्ड ज्योति फरवरी 1956

1. भारतीय संस्कृति की जय हो

2. गीता की वास्तविक शिक्षा

3. वासनाओं की जीतिए

4. अन्तर की अखण्ड ज्योति

5. विचार शक्ति का महात्म्य

6. ईर्ष्या नहीं स्पर्धा करो

7. कठिनाइयों का अन्त कैसे हो ?

8. आपके वश की बात

9. जीवन और मृत्यु की समस्या

10. सद्भावना ही श्रेष्ठ हैं

11. दुर्गुण ही वास्तविक शत्रु हैं

12. संस्कृति की रक्षा के लिए संस्कृत पढ़ना आवश्यक हैं

13. मानसिक शक्ति बढ़ाने के कुछ उपाय

14. अपनी कमजोरियों को दूर कीजिए

15. स्नान कैसे करना चाहिए

16. सन्त रैदास

17. यज्ञ से आत्म शान्ति

18. सुखी वैवाहिक जीवन

19. मालिश से स्वास्थ्य लाभ

20. वशीकरण के छः उपाय

21. यज्ञ विज्ञान में नये अनुसंधान की आवश्यकता

22. आत्म-दान की याचना

23. पूर्णाहुति की तैयारियाँ

24. यह काम आपको सौंपते है।

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