विचार शक्ति इस विश्व कि सबसे बड़ी शक्ति है | उसी ने मनुष्य के द्वारा इस उबड़-खाबड़ दुनिया को चित्रशाला जैसी सुसज्जित और प्रयोगशाला जैसी सुनियोजित बनाया है | उत्थान-पतन की अधिष्ठात्री भी तो वही है | वस्तुस्तिथि को समझते हुऐ इन दिनों करने योग्य एक ही काम है " जन मानस का परिष्कार " | -युगऋषि वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पं. श्रीराम शर्मा आचार्य
बुधवार, 27 अप्रैल 2011
अखण्ड ज्योति मई 1945
अखण्ड ज्योति जुलाई 1944
1. व्यभिचार की ओर आकर्षित मत होना
2. मानव जीवन
3. अखण्ड ज्योति का ज्ञान यज्ञ
4. व्यक्तिगत सफलता के आध्यात्मिक सूत्र
5. दिलचस्पी से काम करिए
6. धर्म और चमत्कार
7. पाचन-क्रिया को ठीक रखिए
8. सदाचारी व्रत का अधिकारी हैं
9. व्याघ को शाप
10. धर्म, कलह की जड़ नहीं हैं
11. पुस्तकालय खोलिए
12. वर्षा-वर्णन
13. वृक्ष और पौधे लगाइये
14. कर्मयोग सतसंग
15. परमात्मा की श्रेष्ठ साधना
16. क्रोध से पागल मत हूजिए
17. मृत्यु की घड़ी
2. मानव जीवन
3. अखण्ड ज्योति का ज्ञान यज्ञ
4. व्यक्तिगत सफलता के आध्यात्मिक सूत्र
5. दिलचस्पी से काम करिए
6. धर्म और चमत्कार
7. पाचन-क्रिया को ठीक रखिए
8. सदाचारी व्रत का अधिकारी हैं
9. व्याघ को शाप
10. धर्म, कलह की जड़ नहीं हैं
11. पुस्तकालय खोलिए
12. वर्षा-वर्णन
13. वृक्ष और पौधे लगाइये
14. कर्मयोग सतसंग
15. परमात्मा की श्रेष्ठ साधना
16. क्रोध से पागल मत हूजिए
17. मृत्यु की घड़ी
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