शुक्रवार, 20 मई 2011

अखण्ड ज्योति मार्च 1962

1. दृढ़ विश्वास

2. प्रगति का मूल मन्त्र-आत्मोकर्ष

3. स्वार्थ को नहीं, परमार्थ को साधा जाये

4. अध्यात्म लक्ष्य की सर्वांगपूर्णता

5. आस्तिकता से विश्व शक्ति का अवतरण

6. उपासना को भी दैनिक जीवन में स्थान मिले

7. देवासुर संग्राम में हम निरपेक्ष न रहे

8. सुख-शान्ति का एक मात्र उपाय

9. ज्ञान यज्ञ का महान् अभियान

10. अष्टग्रही और उसके बाद

11. युग परिवर्तन और उसकी सम्भावनाये

12. सामूहिक सत्प्रयत्नों की प्रगति

13. महिलायें और बच्चे भी पीछे नहीं

14. नवीन पर्व का सृजन हुआ हैं

कोई टिप्पणी नहीं:

LinkWithin

Blog Widget by LinkWithin