बुधवार, 15 जून 2011

अखण्ड ज्योति मई 1986

1. शान्ति और सौन्दर्य को अपने अन्दर खोजो

2. प्राणायाम और मनोनिग्रह

3. महानता के प्रति समर्पण

4. धर्म धारणा का शाश्वत अपरिवर्तनशील स्वरूप

5. अनुसरण महामानवों का करे

6. मनस्-एक कल्पवृक्ष

7. मनुष्यों की आकृति एक, प्रकृति चार

8. प्राणायाम की आरम्भिक विधि व्यवस्था

9. सत्संग किनका व कैसे ?

10. नाम जप की साधना

11. जन्मभूमि में रहे या अन्यत्र जा बसे

12. भविष्य गढ़ने में प्रसन्नता की भूमिका

13. अधिकार और अनुशासन

14. विदेशों में पुनर्जन्म मान्यता

15. संस्कार जन्म-जन्मान्तरों तक साथ चलते है

16. स्थूल शरीर की सीमित शक्ति

17. जादू चमत्कारों के प्रदर्शन की आवश्यकता क्यों ?

18. शुद्ध पंचाग और दृश्य गणित

19. संस्कृति और उसकी विवेचना

20. पृथ्वी फिर स्वर्गोपम बनेगी

21. मूर्ख निकले, जो समझदार बनते थे

22. कुछ विचित्र घटनाक्रम

23. क्या महाविनाश की पुनरावृति होगी ?

24. इक्कीसवी सदी-नारी शताब्दी

25. संगीत की भावधारा से युग चेतना जुड़े

26. पंचकोषों की सावित्री साधना

27. अपनो से अपनी बात

अखण्ड ज्योति अप्रेल 1986

1. बड़प्पन की सही कसौटी

2. गीता का विश्व दर्शन

3. अक्षय आनन्द के तीन उद्गम स्त्रोत

4. अन्तःकरण की उत्कृष्ट भाव संवेदना

5. प्रेम किससे ? भक्ति किसकी ?

6. सात्विक आहार और आत्म साधना

7. सिद्ध पुरूषों के दर्शन और अनुदान

8. ईश्वर के अनुग्रह से वंचित न रहें

9. यद्ब्रह्म तज्ज्योतिः यज्ज्योतिः स आदित्यः

10. कुण्डलिनी जागरण की पूर्व तैयारी

11. ध्यान धारणा से दिव्य क्षमताओं का आकर्षण

12. नादयोग के ध्वनि संकेत

13. खरे व्यक्तित्व की कसौटी

14. विश्व ब्रह्माण्ड के साथ सम्पर्क साधना

15. सृष्टा का सुव्यवस्थित किन्तु अद्भुत संसार

16. अन्तर्जगत की दिव्य शक्तियाँ

17. सूक्ष्म शरीर की महती सामर्थ्य

18. अनोखी दुनिया अचम्भे की बातें

19. परोक्ष जगत की पाश्चात्य विवेचन

20. स्वप्न रात्रि का भटकाव नहीं हैं

21. मरणासन्न काल के अनुभव

22. कभी क्षीण न होने वाला यौवन

23. अन्तरिक्ष में समर्थ और बुद्धिमान प्राणि

24. संगीत का प्राणिवर्ग पर असाधारण प्रभाव

25. जड़ी-बूटी उपचार ही सर्वश्रेष्ठ

26. अग्निहोत्र और यज्ञाग्नि

27. श्राद्ध तर्पण का प्रयोजन

28. सावित्री साधना का स्वरूप एवं उससे जुड़ी मर्यादाऐं

29. स्मारक एवं देवालय

30. अपनो से अपनी बात

अखण्ड ज्योति मार्च 1986

1. जीवन कलाकार हाथों से सँजोया जाय

2. भय से बचें रहे

3. अध्यात्म का प्रथम चरण-परिमार्जन

4. मन को समुन्नत बनाने का एकमात्र राजमार्ग

5. तत्वज्ञान का तीसरा चरण

6. प्रतीक पूजा की पद्धति और प्रक्रिया

7. कृतज्ञ बनें, मानव कहायें

8. अध्यात्म साधना और आहार शुद्धि

9. प्राण शक्ति और वैज्ञानिक अभिमत

10. चिकित्सा क्षेत्र में ध्यान योग का प्रवेश

11. अजपा जप-सोऽहम् साधना

12. मनः क्षेत्र में चित्त की भूमिका

13. प्रगति में लगन का योगदान

14. कुण्डलिनी साधना की पृष्ठभूमि

15. आये दिन की समस्यायें और उनके समाधान

16. मनुष्य में संव्याप्त जैव विद्युत

17. मानवी काया का अदृश्य अस्तित्व

18. स्वेच्छा मरण एक उलझी गुत्थी

19. संकल्प शक्ति सर्वोपरि

20. रोग निवारण हेतु मनोबल का उपयोग

21. पूर्वार्त और पाश्चात्य लोगों का बुढ़ापा

22. यह सब कैसे सम्भव हुआ ?

23. धर्मतन्त्र के परिशोध-मार्टिन लूथर

24. चैथी क्रान्ति सर्वनाश नहीं ला रही

25. सावित्री-सविता की ऊर्जा एवं आत्मा

26. यज्ञ द्वारा-प्राण पर्जन्य की वर्षा

27. ब्राह्मणत्व का उद्देश्य एवं स्वरूप

28. अपनो से अपनी बात-सतयुग अवतरण की अभिनव तैयारियाँ

29. सब कुछ कहने के लिए विवश न करे

अखण्ड ज्योति फरवरी 1986

1. तत्वज्ञान और सेवा साधन

2. जो दीपक की तरह जलने को तैयार हो

3. मन को बाल क्रीडाओं में भटकने न दें

4. तत्वज्ञान का द्वितीय सूत्र

5. दार्शनिक भूल-भूलैया

6. वैराग्य और जीवन लक्ष्य

7. ध्यान योग के नूतन अभिनव आयाम

8. शरीरगत प्रचण्ड शक्ति स्त्रोत-कुण्डलिनी

9. साधक की तन्मयता

10. संसार में मात्र प्रतिकूलता ही नहीं है

11. प्राणशक्ति का आकर्षण-अवधारण

12. शक्तिपात आध्यात्मिक भी, सांसारिक भी

13. शाप और वरदान की शक्ति

14. आत्म-दर्शन का दर्पण प्रयोग

15. सीखने के लिए सामने ही सब कुछ है

16. हमारी अद्भुत काय संरचना

17. विज्ञान सम्मत विचार सम्प्रेषण विधा

18. पाल बन्टन का मृतात्माओं से सम्पर्क

19. मनुष्य अपने आप से इतना भयभीत क्यों ?

20. कप्तान हिक्लिक की प्रेतात्मा

21. अर्धनारी नटेश्वर का तत्वज्ञान

22. भविष्यवाणियाँ सच भी होती है

23. प्रतिकूलताओं के रहते हुए भी प्रगति सम्भव

24. जिनका यह समाधान रहा

25. ज्ञान विज्ञान पर विनाश-दैत्य का आधिपत्य


अखण्ड ज्योति जनवरी 1986

1. विचारणा की पारसमणि

2. धर्मोपदेश ही नहीं अधर्म से संघर्ष भी

3. तत्वज्ञान का प्रथम सूत्र

4. त्रिविधि बन्धन और उनसे मुक्ति

5. मन को कुसंस्कारी न रहने दिया जाय

6. वातावरण बनाम वरिष्ठता

7. अध्यात्मवाद के फलितार्थ

8. ध्यानयोग पर वैज्ञानिक अन्वेषण

9. जीभ एक वाणियाँ चार

10. अलौकिक सिद्धियाँ

11. चैरासी लाख योनियों का परिभ्रमण

12. किशोर भी प्रौढ होते हैं

13. तन्मयता बनाम प्रतिभा

14. जीवन को वातानुकुलित रखा जाय

15. मूल बंध, उड्डियान बंध और जालन्धर बंध

16. तेजोवलय अथवा बायोप्लाजमा

17. हारमोन्स जीवनक्रम के रहस्य भरे स्त्राव

18. मस्तिष्कीय संरचना किसी की भी कम विलक्षण नहीं

19. सदुपयोग और दुरूपयोग प्राणाग्नि का भी समझे

20. आत्म सत्ता का अस्तित्व

21. क्या पृथ्वी भी प्लूटो बनने जा रही है ?

22. पूर्वाभास अन्धविश्वास नहीं है

23. मरण, सृजन का उल्लास भरा पर्व

24. बिना सम्पन्नता के भी सन्तोष का अनुभव

25. उदारता के साथ सतर्कता भी बनाये रहें

26. पत्नीव्रती पशु-पक्षी

27. नारी नर बनने जा रही हैं

28. हर परिस्थिति के लिए तैयार रहे

29. अचानक लुप्त होने वाली वस्तुएँ

30. भावनाओं को तरंगित करने में संगीत का उपयोग

31. योगासनो से विभिन्न व्याधियों का उपचार

32. गायत्री और सावित्री की एकता और पृथकता

33. त्राताओं की भूमिका दाताओं से ऊँची

34. अपनो से अपनी बात-हीरक जयन्ती और दो अभूतर्पूव कदम

अखण्ड ज्योति दिसम्बर 1985

1. आँगन में विद्यमान कल्पवृक्ष

2. महान् कार्यो के लिए महान् व्यक्तित्वों की आवश्यकता

3. भक्ति में देना ही पड़ता हैं

4. अन्तरंग योग की पृष्ठभूमि

5. क्रिया योग के चार विधान

6. व्यक्तित्व का अधःपतन और उसकी परिणति

7. बड़प्पन का मापदण्ड

8. आत्मा और शरीर का वास्तविक हित साधन

9. मनुष्य की सशक्त प्राण-ऊर्जा

10. धर्म अपने स्वस्थ स्वरूप में ही वरणीय हैं

11. संयम से रहें-दीर्घजीवी बने

12. आवश्यकताओं ओर इच्छाओं का अन्तर

13. मानवी सत्ता-जादू की पिटारी

14. संगीत और आत्मोत्कर्ष

15. भूत, भविष्य की नहीं मात्र वर्तमान की सोचें

16. साहस और सूझबूझ के धनी

17. आखिर में आवाजें किसकी थी ?

18. पालब्रिन्टन द्वारा आधुनिक भारत की खोज

19. पुरातन गरिमा को भुलायें नहीं

20. समय के साथ बदलिये

21. योग की साधना की जाय, विडम्बना नहीं

22. प्रेतों  का अस्तित्व और स्वभाव

23. किसी अन्य लोक में जा बसने की तैयारी

24. ऐसे होते हैं दैत्य

25. चेतना का रहस्यवाद

26. बाहर और भीतर की समृद्धियाँ

27. न आत्म-विश्वास खोयें, न भयाक्रान्त रहें

28. बढ़ते हुए मनोरोग-कारण और निवारण

29. सावित्री साधना और पंचकोष

30. स्थिति के अनुरूप साधनों की भिन्नता

31. ‘यज्ञ’ ज्ञान और विज्ञान का भाण्डागार

32. ब्राह्मणत्व गिरेगा तो समाज की बर्बादी होगी

33. अपनो से अपनी बात

34. तप की सामर्थ्य-कविता

अखण्ड ज्योति नवम्बर 1985

1. सुनिश्चित वरदायी-आत्मदेव

2. शाश्वत आनन्द का अनुसन्धान

3. सृष्टा की अगम्य संरचना

4. मानवी तेजोवलय

5. साधना बनाम मनोकामना

6. बहिरंग योग की सरल साधनाएँ

7. पूर्वाग्रहों से उबरिए

8. उपासना का उद्देश्य समझें

9. प्रतिपादन और उसका प्रभाव

10. थियोसोफी का तत्व दर्शन

11. प्रकृति के रहस्य अपने अन्तराल में खोजें

12. जीवन जीने की कुशलता

13. मनोबल का अभिवर्धन और सदुपयोग

14. मनुष्य की विलक्षण अतीन्द्रिय क्षमताएँ

15. जीवन सम्पदा की फुलझड़ी न जलाएँ

16. दृश्य के साथ जुड़ा हुआ अदृश्य

17. आसुरी शक्तियों का कुप्रभाव

18. यह संसार सहअस्तित्व सिद्धान्त पर टिका हैं

19. क्या मनुष्य स्वभावतः आक्रामक है

20. सन्तति की उत्कृष्टता के लिए जन्मदाता उत्तरदायी

21. अजब तेरी कुदरत, अजब तेरा खेल

22. मरने के बाद भी आत्माएँ धरतीवासियों से सम्बन्ध रखे रहती है

23. स्वप्न बहुधा सार्थक भी होते हैं

24. भौतिक विज्ञान के अभिशाप और वरदान

25. बलिवैश्व हमारा दैनिक धर्म कर्तव्य

26. संगीत का प्राणियों और वनस्पतियों पर प्रभाव

27. कुण्डलिनी महाशक्ति-एक परिचय

28. अपनो से अपनी बात-साधु ब्राह्मण परम्परा का पुनर्जीवन

29. गायत्री चालीसा पाठ अनुष्ठान


अखण्ड ज्योति अक्टूबर 1985

1. सच्ची और झूठी प्रार्थना

2. अर्जुन का असमंजस

3. आत्मिक प्रगति का राजमार्ग

4. अपने को परिष्कृत करें और सिद्धियों के भण्डार बने

5. प्रतिभा-जागरूकता और तत्परता की परिणति

6. स्वर्ग या नरक में से किसी एक का चुनाव

7. निष्काम कर्मयोग एंव मुक्ति

8. सशक्तता शक्तियों के सदुपयोग पर अवलम्बित

9. व्रतशीलता बनाम हठवादिता

10. मानवी सत्ता हर दृष्टि से अनुपम, अद्भुत और आश्चर्यजनक

11. तर्क एवं श्रद्धा का समन्वित रूप-धर्म

12. प्रेम ही परमेश्वर है

13. कर्मफल का सुनियोजित व्यवस्था क्रम

14. मनोनिग्रह और आत्मिक उत्कर्ष

15. मनुष्य की विलक्षण सत्ता

16. चेतना ने पदार्थ बनाया

17. ब्रह्माण्ड के हृदय की धड़कन

18. विज्ञान के लिए भारी शोध कार्य करने को पड़ा है

19. यौन परिवर्तन की विचित्र घटनाएँ

20. प्रतिभा का उपयोग शालीनता के लिए

21. शक्तियों के दो ध्रुव केन्द्र

22. जाको राखे साइयाँ मार सके ना कोय

23. मानवी सत्ता चिर पुरातन हैं

24. भारतीय परम्परा और संगीत उपचार

25. प्रथम सन्तान

26. शिखा सूत्र-हिन्दू संस्कृति के प्रतीक चिन्ह

27. महायुद्ध की तैयारियाँ समय रहते रूक जाय

28. अपनो से अपनी बात-‘‘गुरूदेव का श्रावणी सन्देश’’

अखण्ड ज्योति सितम्बर 1985

1. वैभव की कमी नहीं पर आवश्यकता जितनी ही समेटें

2. मौन साधना की महिमा

3. तर्क पर भावना का अंकुश अनिवार्य

4. भवानी शंकरौ वन्दे श्रद्धा विश्वास रूपिणौ

5. मनस्विता के विकास की आवश्यकता

6. कर्मफल और उसके परित्याग सिद्धान्त

7. आत्मबोध का प्रथम सोपान ‘सोहम्’ साधना

8. योग साधना का मजाक न बने

9. क्या हम बन्दर की औलाद हैं ?

10. समग्र अध्यात्म के त्रिविध आहार

11. अन्तः का परिमार्जन परिष्कार

12. कामुकता प्रधानतया मानसिक है

13. संगीत सृष्टि का भावभरा उल्लास

14. आइन्स्टीन जो समय से पहले ही चले गये

15. काम क्षरण को रोकें, उसे सही दिशा दें

16. जैसा अन्न जल खाइये, वैसा ही मन होय

17. ज्योतिर्विद्या  की समुचित जानकारी जन-जन तक पहुँचे

18. प्रसन्नता आज के कामों के साथ जोड़ दे

19. स्वास्थ्य सुधार के लिए रंगो की उपयोगिता

20. आत्मीयता के आधार पर पनपती घनिष्ठता

21. मरने के बाद भी प्राणी सत्ता का अस्तित्व

22. प्रेत ऐसे भी होते है

23. प्रसन्नता साधनों पर नहीं, संकल्पों पर निर्भर

24. स्वप्न सर्वथा निरर्थक ही नहीं होते

25. देवात्मा हिमालय की खोज अभी बाकी है

26. देव सत्ताओं का धरा द्वार पर आवागमन

27. तन कर खड़े रहो जीत तुम्हारी है - मनोवैज्ञानिक डा. नारमन विन्सेण्ट पीले

28. अत्यधिक गम्भीर न रहे

29. प्राणाग्नि के जब तब फूटने वाले शोले

30. गायत्री सर्वतोमुखी समर्थता की अधिष्ठात्री

31. प्रज्ञा पुराण के चार खण्ड प्रकाशित

32. तीर्थयात्रा पर निकलिए

अखण्ड ज्योति अगस्त 1985

1. नींव मजबूत बनाओ

2. उपासना में आत्मशोधन की अनिवार्यता

3. निराकार और साकार का स्पष्टीकरण

4. सृष्टा का उत्तराधिकारी महान बनकर रहे

5. परमात्म सत्ता के विराट् रूप का दर्शन

6. ‘‘योगा’’ और ‘‘मेडिटेशन’’ को कौतुक

7. अहन्ता के नागपाश से जीवन मुक्ति

8. कबीर दास जी का रहस्यवाद

9. काश ! हम दिशा बदल सके

10. आत्मदेव परामर्श नहीं मानता

11. संकल्प बल और स्वस्थता

12. इनका कारण ढूँढना अभी शेष हैं

13. प्रतिभावन क्या सचमुच पागल होते हैं ?

14. सनकियों की कमी नहीं ?

15. पृथ्वी पर होते रहे परिवर्तन

16. पुरातन चिकित्सा पद्धतियों को नये सिरे से खोजा जाय

17. दैनिक जीवन में क्रियाशील ‘‘टैलीपैथी’’

18. उद्धत योनाचार के भयावह दुष्परिणाम

19. नोस्ट्राड्रेमस की भविष्यवाणियाँ

20. छाया पुरूष हमारा सूक्ष्म शरीर

21. ‘‘यत्र तं बुद्धि संयोगं लभते पोर्वदेहिकम’

22. संगीत का विज्ञान क्षेत्र में उपयोग

23. विशिष्टताओं से सम्पन्न ये तुच्छ जीव-जन्तु

24. श्रेष्ठतम का वरण

25. गायत्री मन्त्र में हजार अणु बमों से अधिक शक्ति

26. अणु विकिरण और यज्ञ विज्ञान

27. क्या पृथ्वी का नक्शा बदलने जा रहा है

28. महाविनाश रूक सकता हैं

29. स्नेह दुलार-सुधार का कारगर प्रदर्शन

30. अपनो से अपनी बात

अखण्ड ज्योति जुलाई 1985

1. आत्मा की आवाज

2. ईश्वर की प्राप्ति प्रेम से

3. निखिल ब्रह्माण्ड में संव्याप्त एकात्मता

4. साधना तपश्चर्या का स्वरूप एवं प्रतिफल

5. आत्मिकी की प्रगति एवं सुनियोजन की आवश्यकता

6. तृष्णा घटाये बिना न शान्ति न सन्तोष

7. समर्पण का सुख

8. आरोग्य रक्षा की तीन दीवारें

9. भौतिक प्रगति के सुनिश्चित आधार

10. जो शरीर के खोखले में प्रखर मस्तिष्क है

11. पशु-पक्षियों में पारिवारिक भावनाएँ

12. आकांक्षा एवं सामूहिकता की धुरी पर टिका जीवन शकट

13. देव पूजा का स्वरूप एवं प्रतिफल

14. दृश्य एवं अदृश्य शरीर

15. हमारी प्रसुप्त एवं जाग्रत अतीन्द्रिय क्षमताएँ

16. उठती आयु के आवेशों का शमन

17. जीवन सम्पदा का सदुपयोग

18. विवेक युक्त दान

19. सत्यं ज्ञानमनन्तं ब्रह्म

20. श्राद्ध का माहात्म्य एवं मुक्ति का दर्शन

21. मरणोत्तर जीवन को नकारा नहीं जा सकता

22. परम सत्ता के सन्देशवाहक, देवदूतों के दिव्य दर्शन

23. अन्तर्ग्रही सुविज्ञों का पृथ्वी पर आवागमन

24. जलयानों की प्रेतात्माएँ

25. आस्था की परीक्षा

26. महर्षि अरविन्द का पूर्ण योग

27. ईसा के उपदेश जो भलाई का द्वार खोलते हैं

28. शक्तिपात और उसका आधार

29. हैली धूमकेतु से जुड़ी हुई आशंकाएँ

30. विघातक इरादे बदल भी सकते हैं

31. यदि अणु युद्ध हुआ तो

32. अपनो से अपनी बात

अखण्ड ज्योति जून 1985

1. विधाता के बहुमूल्य उपहार

2. कलाकार का प्रतिशोध

3. साकार और निराकार उपासना की पृष्ठभूमि

4. चरित्रनिष्ठा की परख

5. बुद्धिमान ही नहीं, प्रज्ञावान भी बने

6. योगः कर्मसु कौशलम्

7. सात्रर् की जीवन दर्शन पाठशाला

8. परमेश्वर एक हैं-अनेक नहीं

9. मनोनिग्रह और कामुकता का निराकरण

10. मुसकान-एक जादू भरा कला कौशल

11. सोहम् जप-हंस योग

12. आन्तरिक गरिमा की अभिवृद्धि

13. अदृश्य परम सत्ता के अजस्र अनुदान

14. प्रगति एक पक्षीय न हो

15. प्रतिकूलताओं का एक उपचार उपेक्षा भी

16. अध्यात्म दर्शन की दिशा और एकता

17. तस्मिन ह तस्थुर्भुवनानि विश्वा

18. पशु-पक्षियों में भी बुद्धि होती हैं

19. साधना की सफलता का सही मापदण्ड

20. मानवी क्षमता का कोई पारावार नहीं

21. जड़ में भी चेतन होता हैं

22. काया के घट-घट में छिपी विलक्षण सामर्थ्य

23. विचित्र एवं अद्भुत वनस्पति जगत

24. समूचा ब्रह्माण्ड एक चैतन्य शरीर

25. सार्थक भविष्यवाणियों की उपयोगिता

26. मरणोत्तर जीवन में सूक्ष्म शरीर की गतिविधियाँ

27. ध्यान धारणा का आधार और प्रतिफल

28. हैली धूमकेतु-पुच्छल तारे का उदय

29. मन्त्र शक्ति का उद्गम स्त्रोत

30. गुरू मन्त्र-गायत्री मन्त्र

31. सन्त कबीर के जीवन की प्रख्यात घटनाएँ

32. प्रखर चेतना के प्रतीक प्रतिनिधि समर्थ गुरू रामदास

33. भक्ति भावना से ओत प्रोत-श्री रामकृष्ण परमहंस

अखण्ड ज्योति मई 1985

1. सत्य का अवलम्बन

2. जीवन ओर उसकी सार्थकता

3. अपना स्वरूप और दायित्व समझें

4. अनुशासन का वरदान

5. कुशल माँझी भवसागर को सहज पार करते हैं

6. दूरदर्शिता एक बहुत बड़ा सौभाग्य

7. स्वाद विजय की प्रथम साधना

8. सफलता के लिए समग्रता की आवश्यकता

9. कस्मै देवाय हविषा विधेम्

10. महानता की कसौटी

11. धनवान और बलवान से बड़ा आत्मवान

12. श्रद्धा-ध्यान से रोग निवारण

13. ध्यान साधना की वैज्ञानिक विवेचना

14. न मनुष्य बन्दर की औलाद हैं न बन्दर मनुष्य की

15. धर्म का तत्वदर्शन हर दृष्टि से श्रेयस्कर

16. पुरातन भारत ज्ञान और विज्ञान का धनी था

17. भय जन्य संकट प्रायः काल्पनिक होते हैं

18. सूक्ष्म शरीर का प्रतीक-तेजोवलय

19. मृतात्माओं का जीवित मनुष्य से सम्पर्क

20. शरीर से बाहर भी आत्माएँ

21. स्वप्नों की पीछे सन्निहित तथ्य

22. मृत्यु कष्ट में भी स्वर्ग सुख की कल्पना

23. सद्बुद्धि की अधिष्ठात्री-गायत्री

24. शब्द ब्रह्म और नाद ब्रह्म

25. विशेष लेखमाला-हमारी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष गतिविधियाँ

26. अपनो से अपनी बात

अखण्ड ज्योति अप्रेल 1985

1. आत्मा और परमात्मा की एकता

2. सौभाग्य सुयोग का आरम्भ

3. तीन जन्मों का सम्बन्ध-इस जन्म का समर्पण

4. मार्गदर्शक द्वारा चार हिमालय यात्राओं का निर्देश

5. तीनों कार्यक्रमों का प्राणप्रण से निर्वाह

6. सफलताओं के कुछ रहस्य सूत्र

7. प्रथम बुलावा-पग-पग पर खतरे

8. हिमालय की कन्दराओं में ऋषि सत्ता से साक्षात्कार

9. आमन्त्रण का प्रयोजन एवं भावी रूपरेखा का स्पष्टीकरण

10. दो मनों के मल्लयुद्ध में उत्कृष्ट की विजय

11. अध्यात्म का ध्रुव केन्द्र-देवात्मा हिमालय

12. द्वितीय हिमालय यात्रा एवं मथुरा के लिए प्रयाण

13. मथुरा के कुछ रहस्यमय प्रसंग

14. मथुरा का विचार क्रान्ति अभियान एवं प्रयाण की तैयारी

15. तीसरी हिमालय यात्रा-ऋषि परम्परा का बीजारोपण

16. शान्ति-कुंज-गायत्री तीर्थ

17. ऋषियों की पुरातन योजनाओं का शुभारम्भ एवं क्रियान्वयन

18. हमने जीवन भर बोया एवं काटा

19. चैथा एवं अन्तिम निर्देशन

20. वीरभद्र यह करने में जुटेंगे

21. यह भयावह घटाटोप तिरोहित होगा

22. नवयुग का आगमन अति निकट हैं

अखण्ड ज्योति मार्च 1985

1. याचना नहीं प्रार्थना

2. सत्य को विवेक की कसोटी पर कसा जाय

3. भगवान की समीपता और अनुकम्पा

4. ईश्वर का अनुग्रह तपस्वी के लिए

5. धर्म और तत्वदर्शन की पृष्ठभूमि

6. आत्मिक ऊर्जा उत्पादन के लिए अनवरत संघर्ष

7. खाली हूजिये, आप लबालब भर जायेंगे

8. दर्शन को भ्रष्ट न किया जाय

9. आध्यात्मिकता बनाम यथार्थता

10. धर्म की उपेक्षा अवमानना क्यों ?

11. आत्मबोध का अभाव ही खिन्नता

12. जीवन दर्शन की विविध धारायें

13. मानव के परिष्कार एवं उत्कर्ष की भावी सम्भावनाएँ

14. ‘‘तन्त्र विज्ञान’’ अलौकिक क्षमताओं से भरी-पूरी विधा

15. नियामक सत्ता के सुनियोजित क्रिया-कलाप

16. समष्टि एवं व्यष्टि में संव्यापत एकरूपता

17. मनुष्य हर परिस्थिति में ढल सकता हैं

18. विलक्षण विभूतियों से सम्पन्न यह जीव जगत

19. तृतीय नेत्र की दिव्य क्षमता

20. अभिशप्त यान, वाहन एवं भवन

21. भीतर वाले को सही करे

22. अन्तरिक्षीय आवागमन की सम्भावनाएँ

23. नादयोग की साधना और सिद्धि

24. बीसवी सदी के समाज की एक विडम्बना भरी कहानी

25. क्या तीसरा युद्ध सन् 1985 में होगा ?

26. भगवद् भक्ति में दुराग्रह कैसा ?

27. विधेयात्मक चिन्तन और स्वास्थ्य सुधार

28. चमत्कारों से युक्त यह जीवन क्रम एवं उसका मर्म

29. विभीषिकाओं की काली घटाएं बरसने न पायेंगी


30. अन्तः में प्रतिष्ठित आनन्द की गंगोत्री

अखण्ड ज्योति फरवरी 1985

1. धर्म न तो अवैज्ञानिक हैं और न अनुपयोगी

2. तप का अवलम्बन एवं साधना की सार्थकता

3. आत्मिकी परिष्कार एवं उसकी चमत्कारी परिणतियाँ

4. मानवी काया की चेतन सत्ता का वैज्ञानिक विवेचन

5. ध्यान योग का उद्देश्य और स्वरूप

6. मनोनिग्रह-ऋद्धि-सिद्धियों का भाण्डागार

7. बीज जैसी जीवन की तीन गतियाँ

8. गुह्य योग साधनाओं का पात्रता सम्बन्धी अनुशासन

9. भक्त का स्तर एवं भगवान की मनुहार

10. प्रकृति का अनुसरण कीडे मकोड़े जैसा आचरण नहीं

11. दुनिया के दर्पण में अपना ही चेहरा दीख पड़ता हैं

12. काम विज्ञान का आध्यात्मिक स्वरूप

13. ज्ञान और विज्ञान एक दूसरे का अवलम्बन अपनाये

14. भीतर की दुनिया हर हालत में सही रहे

15. धर्म का व्यावहारिक स्वरूप

16. समष्टि की हलचलों का व्यष्टि चेतना पर प्रभाव

17. जो मान लिया गया हैं वह अन्तिम नहीं

18. समरसता एवं सहानुभूति पर आधारित ज्योतिर्विज्ञान

19. सतत् गतिशील उस विराट् की एक झाँकी

20. सम्भव हैं मनुष्य देवताओं का वंशज रहा हो

21. स्वप्नों के माध्यम से शरीर और मन की विवेचना

22. साधना से सिद्धि

23. सम्भावित घटनाक्रमों के पूर्वाभास

24. क्या यह भवितव्यता टाली नहीं जा सकती

25. तनावजन्य व्यथा से कैसे छूटें

26. प्रज्ञा परिजनों के लिए कुछ विशेष ज्ञातव्य

27. जिज्ञासा ‘सन्देह’ और उसका समाधान

LinkWithin

Blog Widget by LinkWithin