रविवार, 5 जून 2011

अखण्ड ज्योति फरवरी 1974

1. बुद्धिमता और मूर्खता की कसौटी

2. हमारा भविष्य अन्धकारमय नहीं हैं

3. आत्मा और शरीर की भिन्नता जाने ही नहीं माने भी

4. यर्थाथवादी बनें-संकल्प बल प्रखर करे

5. ब्रह्माण्डव्यापी तथ्य जिनका जीवन में भी स्थान है

6. नया स्वर्गलोक बनेगा और वहाँ जाने का रास्ता भी

7. परावलम्बन छोड़े, आत्मावलम्बन अपनायें

8. धर्म-आदर्शवादिता और एकता का प्रतीक बने !

9. सूखा आसमान भी बरस सकता हैं

10. जीवन सत्ता जड़ प्रकृति की प्रतिक्रिया नहीं हैं

11. मनुष्य पूर्वजों के ढाँचे में ढला खिलौना मात्र नहीं हैं

12. मांसाहार से लाभ कुछ नहीं, हानि बहुत हैं

13. न हर्षोन्मत्त हो न अधीर होकर रोये कलपें

14. निरंकुश बुद्धिवाद हमारा सर्वनाश करके ही छोड़ेगा

15. आकाश पर विजय किन्तु हृदयाकाश में पराजय

16. मनुष्य तो मकड़ी से भी पिछड़ा हुआ हैं

17. आवेशग्रस्त मनःस्थिति दुर्बलता की निशानी हैं

18. सम्पन्नता ही नहीं शालीनता भी बढ़ाई जाय

19. इन प्रयोजनो में तो चूहा भी मनुष्य से आगे है

20. ऊँचा उठे तो बहुत कुछ मिले

21. छोटे भी जीवित रहेंगे ही

22. शिवलिंग प्रतिमा की प्रबल प्रेरणा

23. ज्योर्तिविज्ञान का दुर्भाग्यपूर्ण दुरूपयोग

24. क्रूरता को सौजन्य जीत सकता हैं

25. ध्यानयोग-चरम आत्मोकर्ष की साधना

26. अपनो से अपनी बात

अखण्ड ज्योति जनवरी 1974

1. ईश्वर प्रदत्त उपहार, और प्यार अनुदान

2. बसन्त पर्व और पुण्य वेला में हमारा अगला कदम

3. प्राचीन भारत की महान् प्रगति का मूलभूत आधार

4. हम पतन के गर्त मैं कैसे गिरें

5. हमारी सबसे प्रमुख और सबसे प्रधान आवश्यकता

6. सर्वतोमुखी प्रगति का सबसे आधार

7. यह विडम्बना न सुधरेगी न बदलेगी

8. इस आपत्तिकाल में हम थोड़ा साहस तो करे ही

9. धर्म चक्र प्रवर्तन के लिए आशिंक समयदान

10. स्याम देश जिससे हम बहुत कुछ सीख सकते हैं

11. यह कदम हम नही तो और कौन उठायेगा

12. कनिष्ट वानप्रस्थों की स्वल्पकालीन शिक्षा-दीक्षा

13. महान् प्रयोजन के लिए महान् साहस भी चाहिए

14. हमें कहाँ, कैसे, कब और क्या करना होगा ?

15. वानप्रस्थों का तात्कालिक कार्यक्रम-शिविर संचालन

16. एक और महत्वपूर्ण चरण-तीर्थयात्रा संयोजन

17. एकाकी प्रयासों से भी बहुत कुछ हो सकता हैं

18. सद्भावनाओं का सत्प्रवृत्तियों में नियोजन

19. ‘‘हमारे भावी कार्यक्रम’’ जिन्हे सृजन सेना के सैनिक ही पूरा करेंगे

20. स्वार्थ और परमार्थ की समन्वित साधना

21. इतना तो व्यस्त और विवश होते हुए भी कर सकते हैं

22. आह्वान ! आमन्त्रण ओर अनुरोध

23. न हारें चेतना के कण ?

अखण्ड ज्योति दिसम्बर 1973

1. गलोगे तो ही उगोगे

2. बलिदान से दुर्भिक्ष निवारण

3. समष्टिगत उत्कृष्टता ही धर्म का प्राण हैं

4. अध्यात्म का आधार और परिणाम

5. मरने के बाद भी आत्मा का अस्तित्व बना रहता हैं

6. अन्तःस्त्रावी ग्रन्थियों की अद्भुत और अतिमानवी क्षमता-2

7. स्वर्ग और मुक्ति का लाभ-समस्त मानव समाज को मिले

8. बुद्धि पर धर्म का अंकुश रखा जाय

9. मस्तिष्क की अद्भुत क्षमतायें जिन्हें जाने और बढ़ायें

10. गाने वाली बालू-एक रहस्य

11. विषाणुओं को मारने की ही बात न सोची जाय

12. हत्यारे की आत्म प्रताड़ना

13. प्रसन्न रहना एक अच्छी आदत

14. कृतज्ञता और प्रतिदान से रहित होकर न जिये

15. अगली शताब्दी का भविष्य कथन

16. अदृश्य शक्तियों का दृश्य जगत पर प्रभाव

17. विज्ञान की तरह दर्शन में भी उत्क्रान्ति होगी

18. धरती की हत्या करके बचेंगे हम भी नहीं

19. अचेतन मन को प्रशिक्षित करने की आवश्यकता

20. शब्द ब्रह्म की नाद साधना

21. गरीबी उदार दानवीरता में बाधक नहीं

22. असन्तुलन का तूफानी निराकरण

23. आग्नये उद्वेग का समाधान वरूण संस्कृति से

24. प्रकृति प्रवाह के साथ तालमेल बिठाना भी साधना का एक उद्देश्य

25. आत्मबोध और आत्मदेव की उपासना

26. उपवास स्वास्थ्य-रक्षा का महत्वपूर्ण आधार

27. शीतल आवरण से ही समस्वरता सम्भव हैं

28. अपनो से अपनी बात

अखण्ड ज्योति नवम्बर 1973

1. आध्यात्मिकता-निष्क्रियता नहीं सिखाती

2. निकट भविष्य में अध्यात्म युग आकर रहेगा

3. हम अन्तरिक्ष को ही नहीं, अन्तर को भी खोजें

4. शक्ति तो आत्मबल में सन्निहित हैं

5. अवरोधों से जूझने में, मनुष्य पूर्णतया समर्थ हैं

6. धर्मधारणा को आचरण में उतारा जाय

7. मनुष्य की अतीन्द्रिय और अद्भुत क्षमतायें

8. चींटियों की अनुकरणीय समाज व्यवस्था

9. दीर्घजीवन, प्रकृति का सहज सरल उपहार

10. क्या हम वस्तुतः अभावग्रस्त और दरिद्री हैं ?

11. मन्त्र साधना और उसकी रहस्यमीय शक्ति

12. आनन्दित रहने के पर्याप्त कारण हमारे सामने मौजूद हैं

13. सज्जनता और शालीनता की विजय यात्रा

14. आध्यात्मिकता का स्वरूप, प्रयोजन और फलितार्थ

15. मृत्यु से क्यों तो डरें ? और क्यों घबरायें ?

16. बुढ़ापा प्रगति में बाधक नहीं होता

17. हिंसा के आतंक पर स्नेह सौजन्य की विजय

18. नेता नहीं, सृजेता चाहिए

19. हम बिच्छू की तरह अपनी मातृसत्ता को समाप्त न करें

20. हमारी प्रगति का अन्त महामरण में होगा

21. आकाश की तरह हमारी चेतना की उच्च परतें

22. मनुष्य शरीर की चमत्कारी विद्युत शक्ति

23. हलकापन ही ऊँचाई और गहराई तक ले पहुँचता हैं

24. अभ्यास किया जाय तो हवा में उड़ा जा सकता हैं

25. अपनो से अपनी बात

26. एलोपैथी के अदूरदर्शी आधार

अखण्ड ज्योति अक्टूबर 1973

1. सफलता के मणि-मुक्तकों की प्राप्ति

2. तुम पृथ्वी के सबसे आवश्यक मनुष्य हो

3. सुखाकांक्षा में भटकती अविकसित मनःस्थिति

4. सर्व ब्रह्ममयं जगत्

5. प्रतिमानव भी मिल जायगा पर हमें जीवित नहीं छोड़ेगा

6. अति सर्वत्र वर्जयेत्

7. अन्तःस्त्रावी ग्रन्थियों की अद्भुत और अतिमानवी क्षमता

8. खमीर आकार में छोटा उपयोग में बड़ा

9. अखण्ड आनन्द पा सकना अपने ही हाथ की बात हैं

10. सदाशयता के प्रति प्रगाढ़ श्रद्धा रखें

11. काल और दिशा सम्बन्धी प्रकृति प्रेरणा

12. अन्तःस्थिति का प्रकटीकरण तेजोवलय के रूप में

13. सम्प्रदाय और राजनीति का स्थान अध्यात्म और विज्ञान को मिलेगा

14. जिन्दगी मौत से ज्यादा मजबूत हैं

15. मृत्यु का दिन विवाह जैसा आनन्ददायक

16. मारना ही नही, मरना भी सीखें

17. पक्षी कई क्षेत्रों में हमसे आगे हैं

18. अद्भुत क्षमताओं से सम्पन्न चमगादड़

19. घ्राणशक्ति का जीवन विकास में महत्वपूर्ण स्थान हैं

20. प्रकृति की क्रूर कठोरता से सावधान

21. गौ की ब्राह्मण और देवता से तुलना का आधार

22. मस्तिष्क पर कुविचारों को हावी न होने दे

23. शब्दवेधी बाण आज भी चलते हैं

24. दुनिया छोटी हो रही हैं, मनुष्य घनिष्ट हो रहा हैं

25. चिन्तन पराधीनता की विभीषिका का रोमांचकारी संकट

26. आनन्द और स्वतन्त्रता की प्राप्ति

27. अपनो से अपनी बात

28. गायत्री विद्या के अमूल्य ग्रन्थ रत्न

29. चिर-आकांक्षा

अखण्ड ज्योति सितम्बर 1973

1. ईश्वर भक्त की कसौटी

2. समग्र सुख शान्ति की स्थापना धर्म धारणा से ही सम्भव होगी

3. पूर्वाग्रहों पर अड़कर न बैठे

4. जो ईश्वर से डरेगा उसे और किसी से नहीं डरना हैं

5. अचेतन मन की व्याधियाँ और उनका निराकरण

6. मनुष्य चाहे तो नर पिशाच भी बन सकता हैं

7. समुद्र की तरह हमारा अंतरंग भी महान् हैं

8. तथ्य का सत्य के प्रति समर्पण

9. मनुष्य का भौतिक मूल्यांकन न किया जाय

10. स्नेहशीलता और सहकारिता की सार्वभौम सत्प्रवृति

11. नर और नारी के बीच की खाई न्यायोचित नहीं

12. बुरे समय की दुष्प्रवृत्तियाँ

13. संगीत साधना में समर्पित दो महामानव

14. हम अपना गुरूत्वाकर्षण बनाये रखें

15. सौर परिवार के सदस्यों का पारस्परिक आदान-प्रदान

16. हँसने और रोने की अभिव्यक्ति दबायें नहीं

17. अपराधी प्रवृत्ति के स्रोतों को बन्द किया जाय

18. विचारों को सृजन की दिशा में नियोजित रखा जाय

19. कैन्सर-प्रकृति विरोधी आचरण का दुष्परिणाम

20. हम अंतःकरण की वाणी सुने और उसका अनुकरण करें

21. दान एहसान नहीं-परम पवित्र धर्म कर्तव्य हैं

22. उपार्जन का संग्रह नहीं वितरण किया जाय

23. अन्धा धुन्घ प्रजनन हर दृष्टि से अदूरदर्शितापूर्ण

24. प्रगति के पथ पर मर्यादित कदम ही बढ़ायें जाय

25. साधक को न अकेलापन खलता हैं न असफलता अखरती हैं

26. अपनो से अपनी बात

अखण्ड ज्योति अगस्त 1973

1. साधना की तन्मयता

2. ब्रह्माण्डव्यापी चेतना में घनिष्ठता होने की सुखद सम्भावना

3. हमारे जीवन का सूर्य अस्त तो होगा ही

4. आत्मा उभयलिंगी हैं-नर और नारी भी

5. अहं के चुंगल में जकड़ा संसार

6. दयालुता का दंभ

7. स्पष्ट नास्तिकवाद बनाम प्रच्छन्न नास्तिकवाद

8. डरपोक अपना स्वास्थ्य गँवाता हैं और मनोबल भी

9. अपने को जानो, आत्मनिर्भर बनो

10. प्राणियों की अतीन्द्रिय एवं विलक्षण शक्ति

11. दिन मे दिखने वाले तारे

12. विचार शक्ति की महिमा और गरिमा समझी जाय

13. पवित्र धन जो मिल ही न सका

14. संगीत की जीवनदात्री क्षमता

15. यज्ञ की उपयोगिता का वैज्ञानिक आधार

16. विभूतिवान व्यक्तियों का अभिवर्द्धन आवश्यक

17. हर किसी की दुनिया उसी की विनिर्मित हैं

18. गृहस्थ और स्वावलम्बी रहते हुए योगी यति बने

19. जलती आग के ईंधन

20. वनपरी की प्रतिध्वनि

21. सीधी सरल जिन्दगी जियें, दीर्घजीवी बने

22. सत्य हमारी मान्यताओं तक ही सीमित नहीं हैं

23. योग साधना के चमत्कारी परिणाम

24. सिंह भी पालतु कुत्ते जैसे सौम्य हो सकते हैं

25. नमक बिना आसानी से रहा जा सकता हैं

26. आलस और असावधानी से अस्तित्व को खतरा

27. सीमित साधनो से असीम की खोज का दुस्साहस

28. अपनो से अपनी बात

29. बनो पुनः मेघदूत नव !

अखण्ड ज्योति जुलाई 1973

1. मानवी मानवता को जीवित ही रहना चाहिए

2. प्रस्तुत विकृतियाँ और उनके निराकरण का एकमात्र आधार

3. अपनी महान् परम्पराओं को खोकर ही हम दीन-हीन बने हैं

4. वर्णाश्रम धर्म की महान् पृष्ठभूमि

5. वानप्रस्थ द्वारा व्यक्ति और समाज का अभिनव निर्माण

6. आत्म कल्याण की समग्र साधना और उसका स्वरूप

7. देव जीवन का अवसर और आयुष्य

8. उत्तम, मध्यम और कनिष्ट स्तर का वानप्रस्थ

9. परमार्थ जीवन की समग्र शिक्षा साधना

10. वानप्रस्थ सेवा साधना का स्वरूप और दर्शन

11. त्रिविधि साधना पद्धति का अधिक स्पष्टीकरण

12. युग-निर्माण परिवार के वानप्रस्थ क्या करेंगे ?

13. कतिपय अति उपयोगी कार्य जो जन सम्पर्क से ही सम्भव होंगे

14. यह पुण्य परम्परा अग्रगामी बनाई जाय

15. नारी उत्कर्ष के लिए महिला वानप्रस्थों की आवश्यकता

16. वानप्रस्थ एक शास्त्र मर्यादा-धर्म मर्यादा

17. अपनो से अपनी बात

18. वानप्रस्थ एक शास्त्र मर्यादा-धर्म मर्यादा

19. अपनो से अपनी बात

20. वानप्रस्थ प्रशिक्षण के लिए पत्र व्यवहार का आधार

अखण्ड ज्योति जून 1973

1. और कोई रास्ता नहीं

2. प्रत्यावर्तन का दार्शनिक पक्ष

3. अनन्त आनन्द और उसकी प्राप्ति

4. प्रत्यावर्तन का साधना पक्ष

5. प्रत्यावर्तन सत्र की दस सूत्री साधन प्रक्रिया

6. खेचरी मुद्रा का तारतम्य और साधना विज्ञान

7. सोमरस पान की दिव्य अनुभूति

8. परम प्रेरणाप्रद गायत्री उपासना

9. सोऽम् साधना से भावोत्कर्ष एवं शक्ति अवतरण

10. ज्योति अवतरण की बिन्दुयोग साधना

11. नादयोग-दिव्य सत्ता के साथ आदान-प्रदान

12. साधना के उपयुक्त सतोगुणी आहार

13. आत्मबोध का दिव्य वरदान

14. आत्मा की सुनो-आत्मा का मनन करो

15. तत्वबोध के प्रकाश में भव बन्धनों से मुक्ति

16. पंचकोषों की साधना पंच देवों की सिद्धि

17. प्रत्यावर्तन साधना सम्बन्धी कुछ विशेष स्पष्टीकरण

18. सदा के लिए अपनाया जाने वाला सतत् साधना क्रम

19. आत्मशोधन की प्रायश्चित प्रक्रिया

20. अपनो से अपनी बात

अखण्ड ज्योति मई 1973

1. कौन बड़ा कौन छोटा

2. करूणा ही सबसे बड़ी शक्ति

3. आत्मा के अस्तित्व को स्वीकार करना ही पड़ेगा

4. मनुष्य शरीर की बिजली और उसके चमत्कार

5. रक्त परिवर्तन ही नहीं-भाव परिवर्तन भी

6. वेदान्त-संसार का सर्वश्रेष्ठ दर्शन

7. मुक्ति, जीवन का परिष्कार भर हैं-अन्त नहीं

8. उच्छ्रंखल उल्का स्वयं नष्ट होती हैं और दूसरों को दुःख देती हैं

9. क्या इसी शरीर का पुर्नजन्म सम्भव हो जायगा ?

10. असत्य सदा अकल्याणकारी होता हैं

11. अशुभ आकांक्षाओं का अभिशाप

12. दबे हुए स्वर्ण भण्डार, जो अभी किसी के हाथ नहीं लगे

13. रक्त का स्तर और सदुपयोग

14. अन्तर्ग्रही जीवधारियों में स्नेह, सहयोग भी बढ़ेगा

15. बुद्धं शरणं गच्छामि

16. समय का मूल्य समझिये

17. लेने वालों की नहीं-देने वालों की पंक्ति में खड़े हो

18. दुनिया की आश्चर्यजनक इमारतें-आश्चर्यजनक दृष्टिकोण

19. अगले दिनों हमें घास खाकर ही जीना पड़ेगा

20. असामयिक बुढ़ापा और उसका निवारण

21. मानसिक असंतुलन, शारीरिक रूग्णता का प्रमुख कारण

22. सन्यास वे ही लें, जो उसकी मर्यादायें निभा सकें

23. जीवन का मूल्य समझें और उसे सार्थक बनाये

24. अन्न का स्तर और उसका शरीर एवं मन पर प्रभाव

25. अपनो से अपनी बात

अखण्ड ज्योति अप्रेल 1973

1. प्रगति के पाँच आधार

2. विवेकपूर्ण प्रतिशोध

3. नास्तिकवाद का अन्त अब निकट आ गया

4. सत्य शब्दों में आबद्ध नहीं, भावना में सन्निहित हैं

5. हम माया के बन्धनों में कब तक जकड़े रहेंगे

6. मृग मरीचिका में भटकती हमारी भ्रान्त मनःस्थिति

7. नैतिकता से ही विश्व शान्ति सम्भव

8. हराम की कमाई से पछतावा ही हाथ लगता हैं

9. दूसरों का सहारा न ताकें, आत्मनिर्भर बने

10. बीमारियाँ शरीर की नहीं, मन की

11. परिष्कृत का दृष्टिकोण का नाम ही स्वर्ग हैं

12. नैतिकता ही जीवन की आधारशिला

13. विश्व के हर घटक को प्रकृति ने प्रचूर सामर्थ्य दी हैं

14. सर्पो से भी हम बहुत कुछ सीख सकते हैं

15. प्रवासी भारतीयों के साथ घनिष्ठता सुदृढ़ की जाय

16. काय कलेवर में विद्यमान-ऋषि-तपस्वी और ब्राह्मण

17. प्रतिकूलता देखकर संतुलन न खोयें

18. शक्तियों का अनावश्यक अपव्यय न किया जाय

19. हिप्पीवाद एक विद्रोह विस्फोट

20. उत्कृष्टता की जननी-उदारता

21. हमारी अन्तःऊर्जा ज्योर्तिमय कैसे बने

22. दुःखों की आग में न जलने का मार्ग

23. यौन स्वेच्छाचार का समर्थक फ्रायडी मनोविज्ञान

24. अपनो से अपनी बात

25. गीत-असतो माँ सद्गमय


अखण्ड ज्योति मार्च 1973

1. कच्ची आस्तिकता से नास्तिक होना अच्छा

2. पेड़ के सहारे बेल भी ऊपर चढ़ती हैं

3. विश्व ब्रह्माण्ड में ओत-प्रोत ब्रह्मसत्ता

4. गेंहू के सदुपयोग-रोग और दुर्बलता विनाशक

5. मनुष्य का प्रचण्ड चुम्बकत्व और तेजावलय

6. हीरा बने या कोयला यह अपनी मर्जी की बात हैं

7. दिव्य अनुभूतियाँ श्रद्धालु को ही प्राप्त होती हैं

8. दिव्य लोकों से बरसने वाला शक्ति प्रवाह

9. समय की सम्पदा प्रमाद के श्मशान मे न जलायें

10. कर्मयोग, ज्ञानयोग और भक्तियोग की साधना

11. स्वर्ग और नरक में से हम जिसे चाहें चुनें

12. देवमानव का सृजन निकट भविष्य में ही होगा

13. जीवन को प्यार करो वह तुम्हे प्यार करेगा

14. जड़ और चेतन सूर्य की समानान्तर गतिविधियाँ

15. घुटन एक प्रकार की आत्महत्या हैं

16. स्वप्न आखिर हैं क्या बला ?

17. अपने लिए दण्ड पुरस्कारों का विधान हम स्वयं ही करते हैं

18. पात्रता प्रमाणित करें और विभूतियों का वरदान पायें

19. संगीत के दुरूपयोग की निन्दा भर्त्सना

20. विवेकयुक्त दूरदर्शी बुद्धिमता ही श्रेयस्कर हैं

21. हम हीलियम जितने हल्के बनें

22. अणु बमों से बड़ा संकट-बढ़ता प्रजनन

23. न तो हिम्मत हारे और न हार स्वीकार करें

24. ध्यान योग की सफलता शान्त मनःस्थिति पर निर्भर हैं

25. जीवन यज्ञ की रीति-नीति

26. भगवती गंगा का दिव्य प्रवाह

27. कुण्डलिनी शक्ति जागरण का तात्विक आधार

28. बाहरी सम्पदा आन्तरिक समृद्धि की छाया मात्र हैं

29. अपनो से अपनी बात

30. गीत-वह किरण व्यर्थ हैं

अखण्ड ज्योति फरवरी 1973

1. हम पवित्र, श्रद्धालु और धार्मिक बनें

2. प्रेम से ईश्वर की प्रत्यक्ष अनुभूति

3. आत्म विभूतियों की उपलब्धि का आधार

4. एक पैसे का दान

5. सृष्टि के कण कण में जगमगाती दिव्य ज्योति

6. शक्ति श्रंखला की एक ओर कड़ी लेजर किरणें

7. हम हाइड्रोजन गैस जैसे हल्के रहें

8. सत्ता एवं सम्पदा का सदुपयोग

9. मानवी मस्तिष्क पर नियन्त्रण-एक वरदान भी, एक अभिषाप भी

10. मनुष्य शरीर की बिजली और उसके चमत्कार

11. उपगुप्त का आत्मदान

12. हम सज्जनता अपनायें-सहृदय बनें

13. अपना और संसार का सम्बन्ध इस तरह समझे

14. व्यक्तित्व के विकास में आनुवांशिकी स्तर स्पर्श करना होगा

15. अर्थशास्त्र और अध्यात्मशास्त्र का लक्ष्य एक हैं

16. सरस्वती साधना का एक प्रकार-सार्थक सम्भाषण

17. सृजनात्मक चिन्तन-सुख सन्तोंष का आधार

18. विश्व ज्योतिविदों का संयुक्त प्रतिवेदन

19. संगीत का शारीरिक मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव

20. तपश्चर्या समृद्धियों और विभूतियों की जननी

21. तनाव का परिणाम विस्फोट ही होता हैं

22. आशा, आस्था और आत्मीयता के तीन महासत्य

23. नियत समय पर कार्य करना-सफलता का अमोघ सोपान

24. क्या हमारे अनुभव निष्कर्ष सही हैं ?

25. मन्त्र विद्या ध्वनि विज्ञान पर आधारित हैं

26. अपनों से अपनी बात

27. गायत्री विद्या के अमूल्य ग्रन्थ रत्न

28. यह बलिदानों की बेला


अखण्ड ज्योति जनवरी 1973

1. अनुशासन सीखिए

2. भावनाएँ भक्तिमार्ग में नियोजित की जाये

3. उच्च स्तरीय अध्यात्म साधना के तीन चरण

4. अपनी आत्मा सर्वत्र बिखरी पड़ी हैं

5. मनुष्य की तेजस्विता का अन्र्तनिहित स्रोत भण्डार

6. मूर्ति पूजा का औचित्य

7. मनुष्य में अलौकिक क्षमतायें भरी पड़ी हैं

8. समाज सेवा मे परमार्थ ही नहीं, स्वार्थ भी सन्निहित हैं

9. आनुवांशिकी प्रगति में आत्मबल का प्रयोग करना होगा

10. भीड़ का नहीं, न्याय का राज्य चले

11. संगठन और सहयोग पर सृष्टि-व्यवस्था टिकी हैं

12. हम आत्म गरिमा का अनुभव और किसी से न डरें

13. क्या हम जीवित हैं ? क्या हम जीवितों जैसे काम करते हैं ?

14. जिन्दगी जीनी हो तो इस तरह जियें

15. संगीत शब्द ब्रह्म की स्वर साधना

16. दीर्घायु और सरस जीवन की पगडंडी

17. वाणी सोच समझ कर और विचार पूर्वक बोलें

18. स्वाध्याय और मनन मानसिक परिष्कार के दो साधन

19. कानून न्याय की आत्मा का हनन न कर पाये

20. प्रत्यक्षवादी मान्यतायें भी सर्वथा सत्य कहाँ हैं ?

21. धर्म को दिमागी बीमारी बताने वाली भ्रान्त मनोवृति

22. मन्त्रों की सफलता वाक् पर निर्भर हैं

23. अपनो से अपनी बात

अखण्ड ज्योति दिसम्बर 1972

1. दुर्बुद्धि और दुष्प्रवृत्तियों से छूटना ही ‘मुक्ति’ हैं

2. मनुष्य में अन्तर्निहित अलौकिक दिव्य शक्ति

3. मानवी काया एक सशक्त सौर मण्डल

4. माया मुक्त होने का मार्ग और उपाय

5. धर्म और विज्ञान को मिलकर चलना होगा

6. खूंखार ह्वेल जिसे स्नेह, सद्भाव ने पालतु बिल्ली बनाया

7. दर्शन की उपयोगिता विज्ञान से भी अधिक

8. हम समुद्र जैसे महान् और गम्भीर बने

9. प्रार्थना और मनोकामनाओं की पूर्ति

10. जीवन जीना एक श्रेष्ठ कला

11. मन्त्र शक्ति ही देवमाता-कामधेनु हैं

12. उपलब्धियों का सदुपयोग किया जाय

13. अन्तर्ग्रहीय आदान-प्रदान के दिन दूर नहीं

14. असुरता अपनाने वाले नृशंस नर कीटक

15. प्रकाश की एक किरण का प्रभाव

16. गरिमा सत्य वचन की नहीं-सत्य निष्ठा की हैं

17. शरीर क्षेत्र में कनिष्ठ होते हुए भी, नारी भाव क्षेत्र में वरिष्ठ हैं

18. स्थूल से अधिक शक्ति ‘सूक्ष्म’ में भरी पड़ी हैं

19. हम सब यह साहित्य अपने घर रखें ही

20. अपनो से अपनी बात

अखण्ड ज्योति नवम्बर 1972

1. आत्म-देव की उपासना

2. जीवन का अर्थ

3. विज्ञान से सिद्ध न होने पर भी ईश्वर हैं ही

4. देवसत्ता और असुरसत्ता का अस्तित्व

5. भगवान की सर्वोत्कृष्ट रचना-मनुष्य कलेवर

6. ज्ञान और कर्म ही नहीं, भक्ति भी अपेक्षित हैं

7. जीवन का महत्व समझे और उसका सदुपयोग करें

8. मन को शासक नहीं, सेवक बनाया जाय

9. जीव जगत और विधाता की विनोद प्रियता

10. कुसंस्कारी मन की दुःखदायी प्रतिक्रिया

11. बुढ़ापा आपके मन का भ्रम मात्र हैं

12. मनःस्थिति का शरीर पर प्रभाव

13. चन्द्रमा के संदेश संकेत जो हमारे लिये आते हैं

14. प्रचण्ड वाक्शक्ति का चमत्कारी उपयोग

15. सच्चे शौर्य और सत्साहस की कसौटी

16. सुविधा सम्पन्न होने पर भी थकानग्रस्त क्यों ?

17. तनाव दूर करने के लिए शिथिलीकरण साधिए

18. प्रेमास्पद के चुनाव में सतर्कता बरतें

19. यज्ञ का स्वास्थ्य पर प्रभाव

20. दुष्कर्मों का कलुष प्रायश्चित से ही मिटेगा

21. स्वप्नो से सन्निहित महत्वपूर्ण संकेत

22. कुण्डलिनी जागरण से अनेक देवताओं का उद्भव

23. आजादी सत्प्रवत्तियों को मिले-दुष्प्रवृत्तियों को नहीं

24. दुःख और दुष्टता की जननी-दुर्बलता

25. अपनो से अपनी बात

अखण्ड ज्योति अक्टूबर 1972

1. ईश्वर के अनुग्रह का सदुपयोग किया जाय

2. जीवन के अपव्यय का पश्चाताप

3. ईश्वर-भक्ति और प्रेम-साधना का तत्वज्ञान

4. स्थूल को ही न देखते रहें-सूक्ष्म को भी समझे

5. पूर्वाग्रह पर अड़े रहना, बुद्धिमता नहीं

6. कलुषित अन्तःकरण स्वयं दण्ड भोगता हैं

7. बाहूबलि की दूरदर्शिता

8. त्वचा की सामर्थ्य सब इन्द्रियों से बढ़कर

9. महानता की दृष्टि से मनुष्य घास से भी छोटा हैं

10. आत्म-चेतना की सांकेतिक भाषा-स्वप्न

11. हारमोन नियन्त्रित और परिष्कृत किये जा सकते हैं

12. तप साधना ही शक्ति और सिद्धि का स्रोत हैं

13. अपने आप को पहिचानिये

14. गहन अन्तःचेतना को प्रभावित करने की आवश्यकता

15. अन्य प्राणधारी भी विभूतियों से रहित नहीं

16. सामूहिकता से सुसम्बद्ध आत्म चेतना

17. मनोबल-संकटो को पार करता हैं

18. विचार शक्ति का महत्व समझिये

19. समस्त रोगों का एकमात्र कारण-असंयम

20. मांसाहार नहीं, दुग्धाहार अपनाइये

21. अनुदान ले तो-पर उसे वापिस भी करें

22. निराशाग्रस्त-निर्जीव और निरर्थक जीवन

23. प्राणायाम द्वारा सूर्य-शक्ति का आकर्षण

24. जीवन का स्वरूप और उपयोग सिखा सकने वाली शिक्षा चाहिये

25. चरित्र, सौन्दर्य से भी श्रेष्ठ

26. अपनो से अपनी बात

अखण्ड ज्योति सितम्बर 1972

1. अन्तःकरण में ईश्वर का दर्शन

2. समुद्री लहरों की तरह हमारा जीवन उछले, गरजे और आगे बढ़े

3. मृदुलता और कठोरता से ओत-प्रोत मानवी काया

4. शान्ति बाहर नहीं-भीतर खोजनी पड़ेगी

5. पृथ्वी का ओर छोर-बनाम जीवन का आदि अन्त

6. दर्शन पर्याप्त नहीं, भगवान को साथी और सेवक बनायें

7. चुम्बक और मानवीय प्रकृति का सादृश्य

8. सुख भगवान की दया, दुःख उनकी कृपा

9. मरने के बाद भी आत्मा का अस्तित्व रहता हैं

10. आलोचना से डरे नहीं, उसके लिए तैयार रहें

11. हारमोन स्त्रावों का उद्गम अन्तःचेतना से

12. शरीरगत विद्युत शक्ति को सुरक्षित रखें-बढ़ायें

13. हम ईश्वर के होकर रहें-उसी के लिए जियें

14. मस्तिष्कीय स्तर मोड़ा और मरोड़ा जा सकता हैं

15. प्रतिविश्व-प्रतिपदार्थ-शक्ति का अजस्र स्रोत

16. तीन महीने के प्रशिक्षण का संक्षिप्त सत्र

17. परमेश्वर का निराकार और साकार स्वरूप

18. ‘‘सांस मत लो-इस हवा में जहर हैं’’

19. दिव्य अग्नि का अभिवर्धन उन्नयन

20. परमार्थ के लिए अपने को खतरे में डालने वाले

21. हम सोमरस पियें-अजर अमर बनें

22. संसार में त्रिविध कष्ट और उनका निवारण

23. साहसी पक्षी-जिन्हें पुरूषार्थ के बिना चैन नहीं

24. अस्वस्थता की टहनी नहीं, जड़ उखाड़ें

25. जीवन तत्व की गंगोत्री-प्राणशक्ति

26. अन्तःकरण को पवित्र बनाने की प्रभु प्रार्थना

27. अपनो से अपनी बात

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