सोमवार, 13 जून 2011

अखण्ड ज्योति दिसम्बर 1982

1. विराट् का वैभव अपने अन्तस में

2. युग मनीषा ही नहीं, युग साधना भी

3. चेतनात्मक अदृश्य का अनुसन्धान

4. मात्र सुविधा ही नहीं, प्रतिभा भी अर्जित करे

5. सामयिक समस्याओं का चिरस्थायी समाधान

6. युग साधना का अभिनव निर्धारण

7. सस्ते खोखले में भरा गया बहुमूल्य भाण्डागार

8. प्राण ऊर्जा बनाम अतीन्द्रिय क्षमता

9. मानवीय काया की दैत्योपम क्षमताएँ

10. साहस सबसे बड़ा साधन

11. अन्तराल की छिपी क्षमताओं का प्रयत्नपूर्वक उभार

12. स्वप्नों की निरर्थकता और सार्थकता

13. दुर्भाग्यग्रस्तों की दुनियां-2

14. ज्योतिर्विज्ञान का पुनर्जीवन दवे संस्कृति का पुनीत कर्तव्य

15. त्रिपदा गायत्री की त्रिविधि भाव साधना

16. यज्ञों के भेद-उपभेद और शाखा-उपशाखाएँ

17. अपनो से अपनी बात

18. अध्यात्म साधना और शिक्षा के महत्वपूर्ण सत्र

19. पूज्य गुरूदेव प्रणीत अध्यात्म विद्या के अमूल्य ग्रन्थ रत्न

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