रविवार, 5 जून 2011

अखण्ड ज्योति फरवरी 1972

1. कर्म साधना की अनिवार्यता

2. धर्म एव सनातनो

3. प्रेम का प्रयोग केवल उच्च स्तर पर

4. मनुष्य का सूत्र संचालन क्या अदृश्य से होता हैं ?

5. हम अपनी क्षुद्रता और मर्यादा भी समझे

6. सौर परिवार जैसी रीति नीति, मानव परिवार भी अपनाये

7. प्रार्थना का मतलब चाहे जो मांगना नहीं

8. ब्रह्माण्ड में कान लगाइये, मनोवांछित खबरे पाइये

9. शरीर एक विद्युत संस्थान

10. बिना आँखो के भी देखा जा सकता हैं

11. साहसी ही श्रेय, सम्मान के अधिकारी

12. अध्यात्म विज्ञान और उसका प्रयोजन

13. शारीरिक स्वास्थ्य मानसिक संतुलन पर निर्भर हैं

14. दयानिधान भगवान के महान् अनुदान

15. कवि भी राष्ट्र-प्रहरी

16. मांसाहार की बढ़ती हुई प्रवृत्ति हर दृष्टि से घातक

17. ‘कोलाहल’ एक भयावह जीवन संकट

18. शाश्वत सौन्दर्य की शोध

19. आत्मिक प्रगति का आधार-संवेदना, सहानुभूति

20. दुर्व्यवहार-दुरूपयोगकर्ता के ही प्राण लेता हैं

21. परिजनों ने गुरूदेव को जैसा देखा पाया

22. गुरूदेव और उनकी दिव्य अनुभूतियाँ

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