मंगलवार, 17 मई 2011

अखण्ड ज्योति जून 1958

1. मानवता का आदर्श

2. सच्ची सभ्यता और इंद्रिय संयम

3. वेदान्त की सार्वभौमिकता तथा वैज्ञानिकता

4. सामाजिक-न्याय के बिना कल्याण नहीं

5. शास्त्र झूँठे नहीं हैं-समझने वाले झूँठे हैं !

6. गायत्री जीवन को सफल बनायेगी

7. पशु-प्रवृत्तियों का परिष्कार कीजिए

8. जो जस करहि सो तस फल चाखा

9. योग-मनुष्य के विकास का सर्वोत्तम मार्ग

10. समाजवाद और यन्त्रों का प्रयोग

11. बीज मन्त्र ‘‘क्लीं’’ की साधना

12. अतिथि-यज्ञ अथवा मानव सेवा

13. योगी बिना खाये-पीये कैसे जीवित रहते हैं ?

14. संत कबीर की ‘‘सोऽम’’ साधना

15. रसायन विद्या और गायत्री मंत्र

16. साहित्य-सेवा के लिए सदाचार की आवश्यकता

17. सद्ज्ञान से ही विश्व का कल्याण होगा

18. गायत्री परिवार संगठन का लक्ष्य

19. गायत्री परिवार की गतिविधियां

20. कला और सामाजिक कल्याण

कोई टिप्पणी नहीं:

LinkWithin

Blog Widget by LinkWithin