सोमवार, 16 अगस्त 2010

युग परिर्वतन के अग्रदूत

परमपूज्य गुरुदेव अपने प्रवचन में कहा करते थे-

‘‘ मै धरती का भाग्य-भविष्य बदलने आया हूँ। 

मै आना नही चाहता था, पर मुझे धकेला गया है। और विशिष्ट कार्यो के लिए भेजा गया है । 

लोग मुझे मनोकामना पूरी करने की मशीन मानते है । 

मै उनकी थोड़ी मानकर उन्हें बदलने का प्रयास करता हूँ । 

जो बदल जाते हैं, वे ही मेरे सैनिक-युग परिर्वतन के अग्रदूत बन जाते है । 

-युगऋषि वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पं. श्रीराम शर्मा आचार्य

1 टिप्पणी:

चिट्ठाप्रहरी टीम ने कहा…

एक अच्छी पोस्ट लिखी है आपने ,शुभकामनाएँ और आभार

आदरणीय
हिन्दी ब्लाँगजगत का चिट्ठा संकलक चिट्ठाप्रहरी अब शुरु कर दिया गया है । अपना ब्लाँग इसमे जोङकर हिन्दी ब्लाँगिँग को उंचाईयोँ पर ले जायेँ

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